पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है. अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता हुआ है, जिसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने की मंजूरी दे दी है. इस बीच, भारत सरकार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और उसके आसपास काम कर रहे भारतीय नाविकों व व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए हुए है.
एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ब्रीफिंग के दौरान शिपिंग मिनिस्ट्री के ओपेश शर्मा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, लगभग 18,000 भारतीय नाविक अभी भी खाड़ी क्षेत्र में तैनात हैं.
ओपेश शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बावजूद, अब तक भारतीय झंडे वाले 10 जहाजों और विदेशी झंडे वाले 5 जहाजों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार किया है.
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भारतीय जहाज 'दिशा' 62,370 टन LNG कार्गो लेकर होर्मुज को सुरक्षित रूप से पार कर चुका है और इसके 18 जून को भारत पहुंचने की उम्मीद है.
अधिकारियों ने यह भी बताया कि 325 भारतीय नाविक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिम में जहाजों पर मौजूद हैं, जबकि 200 से अधिक ओमान की खाड़ी में फंसे हुए हैं. अधिकारी उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार संपर्क और निगरानी बनाए हुए हैं.
शिपिंग मिनिस्ट्री ने कहा कि भारतीय चालक दल के सदस्यों और जहाज ऑपरेटरों को हर संभव सहायता दी जा रही है.
शिपिंग मिनिस्ट्री ने उस विशेष रिपोर्ट की भी पुष्टि की, जिसमें हांगकांग के झंडे वाले तेल और रसायन टैंकर 'बोकेम मारेन्गो' (Bochem Marengo) का ज़िक्र था. इस जहाज पर 12-13 जून की रात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरते समय एक UAV (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) से हमला किया गया था.
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वहीं, जानकारी के मुताबिक जहाज पर 21 भारतीय क्रू मेंबर्स के थे, और हमले के बावजूद वे सभी सुरक्षित बताए जा रहे हैं.
शिपिंग मिनिस्ट्री ने यह सुनिश्चित किया है कि क्षेत्र में फंसे नाविकों को जरूरी मदद और समर्थन दिया जा रहा है. साथ ही, यह भी बताया गया है कि जैसे ही स्थिति सामान्य होगी, क्षेत्र में फंसे सभी भारतीय जहाज और लोग भारत लौट सकेंगे.
भारत दुनिया के सबसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील शिपिंग कॉरिडोर में से एक में अपने समुद्री हितों, ऊर्जा आपूर्ति मार्गों और काम कर रहे हजारों भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए प्रयास जारी रखे हुए है.
शिवानी शर्मा