मनमोहन को जवाब? AMU में पीएम मोदी बोले- जो देश का है वो हर देशवासी का है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे प्रधानमंत्री बने हैं, जिन्होंने करीब पांच दशक के बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में हिस्सा लिया. पीएम मोदी ने मंगलवार को अपने संबोधन में कई बड़े संदेश दिए.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (फाइल फोटो, PTI) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (फाइल फोटो, PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 2:02 PM IST
  • पीएम मोदी का AMU के कार्यक्रम में संबोधन
  • जो देश का है, वो हर देशवासी का है: PM मोदी
  • मनमोहन के कथन से पीएम के बयान की तुलना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि जो भी इस देश का है, वो हर देशवासी है और उसका लाभ हर किसी को मिलना चाहिए. पीएम मोदी के इस बयान को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा दिए उस बयान को जवाब माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने देश की संपत्ति पर अल्पसंख्यकों के पहले अधिकार की बात कही थी. 

आज क्या कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने...
शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार के कामों का बखान किया, साथ ही उन योजनाओं को गिनाया जिसके जरिए देश के हर नागरिक को लाभ मिल रहा है. 

इसी दौरान अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, ‘सर सैयद का संदेश कहता है कि हर किसी की सेवा करें, चाहे उसका धर्म या जाति कुछ भी हो. ऐसे ही देश की हर समृद्धि के लिए उसका हर स्तर पर विकास होना जरूरी है, आज हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के विकास का लाभ मिल रहा है. पीएम बोले कि नागरिक संविधान से मिले अधिकारों को लेकर निश्चिंत रहे, सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास ही सबसे बड़ा मंत्र है. जो देश का है, वो हर देशवासी है और उसका लाभ हर किसी को मिलना चाहिए.

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मनमोहन ने कब और क्या दिया था बयान?
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यूपीए के पहले कार्यकाल में एक बयान दिया था, जिसपर काफी विवाद हुआ था. दिसंबर, 2006 में राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश के अल्पसंख्यकों का यहां के संसाधनों पर पहला हक है. 

मनमोहन अपने संबोधन में बोले थे, ‘समाज के सभी पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों विशेषकर मुसलमानों को विकास के लाभ में बराबर की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए उनका सशक्तिकरण किए जाने की ज़रूरत है. देश के संसाधनों पर पहला हक उन्हीं का है.’

तब भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में थी और इस बयान को लेकर काफी हंगामा किया था. बीजेपी की ओर से कांग्रेस और तत्कालीन यूपीए सरकार पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाया गया था. सिर्फ तब नहीं बल्कि लंबे वक्त तक बीजेपी इस बयान को उछालती रही थी. 

अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में अपना संबोधन दिया, तो उनके बयान को मनमोहन के इसी कथन से जोड़ा गया. आपको बता दें कि लाल बहादुर शास्त्री के बाद नरेंद्र मोदी ही ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में हिस्सा लिया.

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