PAK से दोस्ती तुर्की को ऐसे पड़ी भारी, भारत के एक फैसले से डूब गए थे 4,300 करोड़ रुपए

पाकिस्तान को तुर्की के समर्थन की कीमत अब उसकी एविएशन कंपनी सेलेबी को चुकानी पड़ी है. भारत में दो दशक से ज्यादा समय तक एयरपोर्ट ग्राउंड हैंडलिंग का बड़ा कारोबार खड़ा करने वाली कंपनी का दावा है कि सिक्योरिटी क्लियरेंस रद्द होने के बाद उसकी करीब 500 मिलियन डॉलर की वैल्यू खत्म हो गई.

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भारत से निकाली गई थी तुर्की की बड़ी कंपनी, लगा था अरबों डॉलर का चपत. (File Photo: ITG) भारत से निकाली गई थी तुर्की की बड़ी कंपनी, लगा था अरबों डॉलर का चपत. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:09 PM IST

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के पक्ष में खड़े होने की कीमत तुर्की की सेलेबी एविएशन को चुकानी पड़ी थी. भारत से बाहर किए जाने के एक साल बाद कंपनी ने पहली बार अपने नुकसान पर खुलकर बात की है. कंपनी का दावा है कि भारत की कार्रवाई से उसे एक दिन में ही अरबों रुपए का झटका लगा था. 

कंपनी की चेयरपर्सन कैनन सेलेबिओग्लू का कहना है कि भारत सरकार द्वारा सिक्योरिटी क्लीयरेंस रद्द किए जाने से उनकी कंपनी की 500 मिलियन डॉलर (4,300 करोड़) की वैल्यू खत्म हो गई. ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारत में कंपनी ने साल 2000 से बहुत मेहनत के साथ मौजूदगी बनाई थी.

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सेलेबिओग्लू ने कहा कि यह सिर्फ कारोबारी नुकसान नहीं था. यह दो दशकों की मेहनत का अंत था. उनके मुताबिक, "हमने इस सेक्टर को खड़ा करने के लिए सरकार के साथ मिलकर नीतिगत बदलावों पर काम किया. हर समस्या को हल करके ये कारोबार खड़ा किया, लेकिन एक दिन में सब खत्म हो गया."

भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक चले सैन्य टकराव के दौरान तुर्की खुलकर इस्लामाबाद के समर्थन में उतर आया था. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को हथियार, ड्रोन और सैन्य सहयोग मिलने की खबरों के बीच भारत में तुर्की और उसकी कंपनियों को लेकर लगातार सवाल उठने लगे थे. 

इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने मई 2025 में सेलेबी की भारतीय इकाई की सिक्योरिटी क्लीयरेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी थी. कार्रवाई से पहले सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया देश की सबसे बड़ी ग्राउंड हैंडलिंग कंपनियों में शामिल थी. ये दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु समेत 9 बड़े एयरपोर्ट हब पर काम कर रही थी.

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इस कंपनी के जिम्मे हर साल करीब 58 हजार उड़ानों और 5.40 लाख टन कार्गो की हैंडलिंग थी. एयरपोर्ट ऑपरेशंस में उसकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी. उसके पास एयरपोर्ट ग्राउंड हैंडलिंग, कार्गो सर्विस, कार्गो सिक्योरिटी चेक, पैसेंजर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और लॉजिस्टिक्स कोऑर्डिनेशन जैसी अहम जिम्मेदारियां थीं. 

यही वजह थी कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में इसकी भूमिका को बेहद संवेदनशील माना जाता था. सिक्योरिटी क्लीयरेंस रद्द होने के बाद भारत सरकार ने कंपनी के सभी ऑपरेशन रोक दिए. कंपनी के उपकरण जब्त कर लिए गए. करीब 10 हजार कर्मचारियों को दूसरे ऑपरेटरों के पास ट्रांसफर कर दिया गया. 

इससे कंपनी का पूरा कारोबारी ढांचा बिखर गया. सेलेबिओग्लू ने कहा, "एक ही दिन में हमारे 10 हजार कर्मचारी दूसरी कंपनियों में भेज दिए गए. हमारी बनाई हुई 400-500 मिलियन डॉलर की वैल्यू एक झटके में जीरो कर दी गई." भारत को अपना दूसरा देश बताने वाली सेलेबिओग्लू को व्यक्तिगत रूप से झटका लगा था. 

उन्होंने कहा कि भारत जैसा बड़ा और जटिल बाजार हमेशा चुनौतियों से भरा रहा है. लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि हालात इस मोड़ तक पहुंच जाएंगे. भारत ने सेलेबी की सिक्योरिटी क्लीयरेंस ऑपरेशन सिंदूर के ठीक बाद रद्द की थी. यह ऑपरेशन 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था.

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इस हमले में 26 नागरिकों की जान गई थी. इसके बाद भारत ने 6 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे. इस दौरान तुर्की खुलकर पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा दिखाई दिया. पाकिस्तान को 350 से ज्यादा बायरकटर TB2 और असिसगार्ड सोंगर ड्रोन उपलब्ध कराए गए.

इतना ही नहीं, तुर्की वायुसेना का C-130 विमान और एक युद्धपोत भी पाकिस्तान पहुंचा था. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह भी सामने आया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की के दो सैन्य ऑपरेटिव मारे गए थे. इन घटनाओं के बाद भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए सेलेबी का लाइसेंस रद्द कर दिया. 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्ट कहा था कि यह फैसला देश के हितों और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. सेलेबी ने केंद्र सरकार के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. उसका दावा था कि उसका तुर्की सरकार से कोई सीधा संबंध नहीं है. उसने कहा था कि राष्ट्रपति एर्दोगन के परिवार की हिस्सेदारी से जुड़े आरोप निराधार हैं.

हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने कंपनी की याचिका खारिज कर दी. अदालत ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में अफसोस करने से बेहतर है कि सुरक्षित रहा जाए. भारत में सेलेबी जिन क्षेत्रों में काम कर रही थी, वे एयरपोर्ट के सबसे संवेदनशील और हाई-सिक्योरिटी जोन माने जाते हैं.

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कंपनी कार्गो मूवमेंट, यात्रियों के दस्तावेजों की जांच, सुरक्षा प्रक्रियाओं और एयरपोर्ट लॉजिस्टिक्स जैसी गतिविधियों से जुड़ी हुई थी. केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने उस समय कहा था कि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की है. देश के लिए जोखिम स्वीकार नहीं किया जा सकता.

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