केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उनके गृह नगर वडनगर में उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला. इस खास मौके पर प्रधानमंत्री के बचपन के दोस्तों और परिचितों ने उनके साथ बिताए दिनों को याद करते हुए कई दिलचस्प बातें साझा कीं. उनका कहना है कि नरेंद्र मोदी बचपन से ही मेधावी, अनुशासित और नेतृत्व क्षमता से भरपूर व्यक्तित्व के धनी थे.
वडनगर निवासी त्रिकमलाल मकवाना ने भी प्रधानमंत्री मोदी के बचपन को याद करते हुए कहा कि उन्हें पढ़ने का बेहद शौक था. उनका अधिकांश समय लाइब्रेरी में बीतता था, जहां वह विभिन्न विषयों की पुस्तकें पढ़ते थे. त्रिकमलाल ने बताया कि मोदी पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी रुचि रखते थे और हर गतिविधि में आगे रहने की कोशिश करते थे. त्रिकमलाल ने कहा, 'PM मोदी का अधिकांश समय लाइब्रेरी में बीतता था.'
त्रिकमलाल मकवाना ने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल को देखकर वडनगर के लोग गर्व महसूस करते हैं. उनका मानना है कि इस दौरान गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गईं, जिनका लाभ समाज के बड़े वर्ग तक पहुंचा है.
प्रधानमंत्री के बचपन के मित्र और रिटायर प्राथमिक शिक्षक चंदूभाई रामी ने अपने छात्र जीवन की यादों को ताजा करते हुए बताया कि वे और नरेंद्र मोदी एक साथ स्कूल में पढ़ते थे. उनके अनुसार, बचपन से ही नरेंद्र मोदी की बुद्धिमत्ता और सीखने की क्षमता अन्य बच्चों से अलग दिखाई देती थी. वह पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहते थे.
RSS की शाखा में जाते थे मोदी
चंदूभाई रामी ने बताया कि नरेंद्र मोदी नियमित रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में जाते थे. शाखा में होने वाले खेल, बौद्धिक कार्यक्रम और प्रेरणादायक गतिविधियों में वह बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे. उन्होंने कहा कि मोदी में बचपन से ही नेतृत्व करने की क्षमता दिखाई देती थी और वह समूह के बीच अपनी बात प्रभावशाली ढंग से रखते थे.
बचपन के मित्रों को पत्र लिखते हैं मोदी
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद भी नरेंद्र मोदी ने अपने पुराने दोस्तों से संबंध बनाए रखे हैं. चंदूभाई के अनुसार, आज भी मोदी अपने बचपन के मित्रों को पत्र लिखते हैं और विशेष अवसरों पर शुभकामनाएं भेजना नहीं भूलते. इससे उनके पुराने रिश्तों के प्रति सम्मान और आत्मीयता का पता चलता है.
वडनगर में लोगों का कहना है कि नरेंद्र मोदी की सफलता की कहानी उनके संघर्ष, मेहनत और अनुशासन का परिणाम है. उनके बचपन के मित्रों और परिचितों की यादों से यह तस्वीर उभरकर सामने आती है कि बचपन में दिखाई देने वाले उनके गुण आगे चलकर उनके सार्वजनिक जीवन की पहचान बने.
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