मॉनसून पर अल नीनो का असर, जून-जुलाई-अगस्त में कितनी होगी बारिश? मौसम पर आ गया अपडेट

2026 में भारत का मॉनसून सामान्य से करीब 6% कम बारिश के साथ कमजोर रहने की संभावना है. स्काईमेट के अनुसार, जून से सितंबर तक कुल बारिश 94% LPA रहेगी. मध्य और पश्चिम भारत में कम बारिश होगी जबकि पूर्वोत्तर में बेहतर बारिश की उम्मीद है. अल नीनो के प्रभाव से सूखे का खतरा बढ़ सकता है.

Advertisement
मॉनसून सीजन में सामान्य से कम बारिश की उम्मीद (फाइल फोटो- ITG) मॉनसून सीजन में सामान्य से कम बारिश की उम्मीद (फाइल फोटो- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:12 PM IST

भारत में इस साल (2026) मॉनसून सामान्य से कमजोर रहने की संभावना है. मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट (Skymet) के मुताबिक, पूरे मॉनसून सीजन में कुल बारिश सामान्य से करीब 6 फीसदी कम हो सकती है. जून से सितंबर यानी 4 महीने के दौरान कुल 94 फीसदी बारिश होगी. स्काईमेट वेदर (Skymet Weather) 2026 के मॉनसून पूर्वानुमान के मुताबिक, जून से सितंबर इन 4 महीनों में सामान्य औसत (LPA) 868.6 मिलीमीटर होता है. जबकि इस बार लगभग 817 मिलीमीटर बारिश होने का अनुमान है.   

Advertisement

बता दें कि LPA (Long Period Average) का मतलब है किसी जगह की लगभग 30 साल की औसत बारिश. यह मॉनसून को समझने का एक मानक होता है, जिसके आधार पर तय किया जाता है कि साल का मॉनसून सामान्य, अच्छा या कमजोर है.

किन क्षेत्रों में कम और कहां होगी ज्यादा बारिश?
स्काइमेट के अनुसार, मध्य और पश्चिम भारत के मुख्य वर्षा-आधारित (rainfed) क्षेत्रों में कम बारिश हो सकती है. अगस्त-सितंबर में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में सामान्य से कम बारिश रहने की संभावना है. वहीं, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत (जैसे बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय आदि) में बाकी हिस्सों की तुलना में बेहतर बारिश होने की उम्मीद है.

अल नीनो क्या है और मॉनसून पर इसका क्या असर?
अल नीनो प्रशांत महासागर में पानी के गर्म होने की स्थिति है. यह मॉनसून की हवाओं को कमजोर कर देता है, जिससे भारत में बारिश कम हो जाती है. 2025 में ला नीना (ठंडा पानी) था, जिससे अच्छी बारिश हुई थी. अब ला नीना खत्म हो रहा है और अल नीनो बनने की संभावना बढ़ रही है. ऐसे में सामान्य से कम बारिश हो सकती है.

Advertisement

स्काईमेट के पूर्वानुमान के मुताबिक जून-जुलाई-अगस्त में कितनी बारिश होगी?

  • जून: लगभग सामान्य (101% LPA) – शुरुआत अच्छी रह सकती है.
  • जुलाई: सामान्य से थोड़ी कम (95% LPA) – मुख्य बारिश का महीना कमजोर रहने की आशंका है.
  • अगस्त: और भी कम (92% LPA)– कृषि के लिए महत्वपूर्ण महीने में बारिश की कमी हो सकती है.
  • सितंबर: सबसे कम (89% LPA) बारिश होगी.

किन राज्यों में सूखे का खतरा?
उत्तर-पश्चिम भारत (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली) और कुछ मध्य भारत के इलाकों में सूखे का खतरा ज्यादा है. जबकि दक्षिण भारत और पूर्वी हिस्सों में कुछ बेहतर स्थिति रह सकती है. 

सामान्य से कम बारिश का क्या होगा असर?
जुलाई-अगस्त में कम बारिश से धान, मक्का, सोयाबीन जैसी फसलों पर असर पड़ सकता है. खेती-किसानी के लिए पानी की कमी हो सकती है. वहीं, बांधों और तालाबों में कम पानी भरने से गर्मियों में संकट बढ़ सकता है. इसके अलावा अल नीनो के कारण इस साल गर्मी भी ज्यादा पड़ने की आशंका है. 

अप्रैल में आंधी-बारिश, गर्मी से राहत
मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, अप्रैल की शुरुआत में पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से बारिश या आंधी-तूफान की गतिविधियां जारी हैं. हवाओं की रफ्तार और मौसम में नमी की वजह से तापमान में गिरावट आई है. 9 अप्रैल को भी आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे. इसके बाद 10 और 11 अप्रैल को मौसम साफ होने की उम्मीद है.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement