मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव...कांगपोकपी में कुकी प्रदर्शनकारियों का मार्च, सुरक्षा बलों ने छोड़े आंसू गैस के गोले

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में मंगलवार को तनाव बढ़ गया. जरूरी सामानों की सप्लाई शुरू कराने की मांग को लेकर कुकी-जो समुदाय के लोगों ने मार्च निकाला, वहीं नागा संगठनों ने छह लोगों की हत्या के विरोध में आर्थिक नाकेबंदी तेज करने का फैसला किया.

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प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए सुरक्षा बलों ने छोड़े आंसू गैस के गोले (Photo:ITG) प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए सुरक्षा बलों ने छोड़े आंसू गैस के गोले (Photo:ITG)

aajtak.in

  • मणिपुर ,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:52 PM IST

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में मंगलवार को तनाव काफी बढ़ गया. वहां जरूरी सामानों की सप्लाई दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर कुकी-जो समुदाय के प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बफर जोन की तरफ मार्च निकाला. दूसरी तरफ, छह नागा नागरिकों की हत्या के विरोध में नागा संगठनों ने अपनी अंतर-जिला आर्थिक नाकेबंदी को और तेज करने का फैसला किया है.

ये विरोध प्रदर्शन कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी नाम के संगठन ने आयोजित किया था. संगठन ने केंद्र और मणिपुर सरकार को नेशनल हाईवे-2 से कांगपोकपी जिले में सामान की आवाजाही शुरू कराने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. ये समय सीमा खत्म होने के बाद ही मार्च निकाला गया.

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सैकड़ों की संख्या में कुकी प्रदर्शनकारी कांगलातोंगबी के पास गामगीफाई बफर जोन की तरफ बढ़े. उनका आरोप था कि कांगपोकपी आने वाले जरूरी सामान को रास्ते में ही रोका जा रहा है. सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को कुकी-जो और मैतेई इलाकों को अलग करने वाले इस बफर जोन को पार नहीं करने दिया.

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सुरक्षा बलों ने छोड़े आंसू गैस के गोले

प्रदर्शनकारियों ने वहां लगाए गए अस्थायी बैरिकेड्स को तोड़ने की कोशिश की, तो सुरक्षा बलों ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया. अधिकारियों के मुताबिक, इस घटना में कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ है. लेकिन हालात को बिगड़ने से रोकने के लिए वहां और ज्यादा सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है.

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ये पूरा विवाद 11 जून से नागा संगठनों द्वारा शुरू की गई अंतर-जिला आर्थिक नाकेबंदी के कारण गहराया है. इसके तहत नागा-बहुल इलाकों से कुकी-बहुल कांगपोकपी जिले में जाने वाले माल और जरूरी सामान की सप्लाई रोक दी गई है.

छह नागा पुरुषों की हत्या के बाद की नाकेबंदी

नागा संगठनों ने ये नाकेबंदी तब शुरू की, जब 13 मई को लीलोन वैफेई गांव से लापता हुए छह लियांगमई नागा पुरुषों के शव 10 जून को बरामद किए गए थे. नागा संगठनों का आरोप है कि इन लोगों को कुकी हथियारों से लैस गुटों ने अगवा कर मार डाला था. 

हालांकि, इस दावे की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. नागा संगठनों का ये भी आरोप है कि उन लोगों की पहचान जानने के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की है. मंगलवार को सेनापति जिले में हुई एक बैठक में यूनाइटेड नागा काउंसिल, नागा पीपल्स ऑर्गनाइजेशन और अन्य नागा निकायों ने फैसला किया कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार कर न्याय नहीं मिलता, वे इस आर्थिक नाकेबंदी को और तेज करेंगे.

सरकार से दखल की मांग....

दूसरी तरफ, कुकी संगठन कोटू ने प्रशासन पर जरूरी सामानों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित न कराने का आरोप लगाया है. संगठन का कहना है कि लंबे समय से चल रही इस नाकेबंदी की वजह से कांगपोकपी जिले में भोजन, दवाओं और अन्य जरूरी चीजों की भारी किल्लत हो गई है, जिससे वहां एक मानवीय संकट खड़ा हो गया है.

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उन्होंने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार से तुरंत दखल देने की अपील की है. मई 2023 से चल रहे मणिपुर के जातीय संघर्ष के बीच, नागा और कुकी-जो समुदायों का ये नया आमना-सामना राज्य में तनाव की एक और बड़ी वजह बन गया है.

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