मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, गोलीबारी में घायल 3 कूकी युवकों को लेकर अस्पताल में बवाल

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में हुई गोलीबारी में तीन युवक घायल हो गए हैं, जिन्हें इम्फाल के RIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल में उनकी भर्ती को लेकर प्रदर्शन शुरू हो गया, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए हैं.

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मणिपुर में तीन साल बाद भी शांति नहीं आ पाई है (Image: PTI) मणिपुर में तीन साल बाद भी शांति नहीं आ पाई है (Image: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:01 PM IST

हिंसा की आग में जल रहे मणिपुर में तीन साल से अधिक बीतने के बाद भी तनाव कम नहीं हुआ है. पहाड़ी और घाटी के इलाकों में हालात अभी भी बिगड़े हुए हैं और आए दिनों दोनों पक्षों में टकराव हो रहा है. ताजा घटनाक्रम कांगपोकपी जिले से सामने आया है, जहां बीते सोमवार हुई गोलीबारी में तीन युवक घायल हो गए. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए इम्फाल स्थित रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) अस्पताल लाया गया, जहां उनकी भर्ती को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया.

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यह घटना ऐसे समय हुई है जब कुछ दिन पहले ही कांगपोकपी जिले से किडनैप हुए छह नागा लोगों के शव मिले थे. इस वजह से इलाके में पहले से ही तनाव था, गोलीबारी की घटना ने इस गुस्से की आग में घी का काम किया है. 

अधिकारियों ने बताया कि सोमवार सुबह करीब छह बजे कांगपोकपी जिले के लेलोन वैफेई गांव के पास हथियारबंद लोगों के बीच गोलीबारी हुई. यह वही गांव है जहां से 13 मई को नागा समुदाय के छह लोगों का कथित तौर पर अपहरण किया गया था. बाद में 10 जून को छह शव बरामद किए गए, जिन्हें किडनैप लोगों का माना जा रहा है.  गोलीबारी में घायल हुए युवकों की पहचान 18 वर्षीय जेनलेनमांग वैफेई, 20 वर्षीय लुनलियांदाव वैफेई और 18 वर्षीय पाओगौलाल के रूप में हुई है. तीनों कूकी समुदाय से जुड़े बताए जा रहे हैं. उन्हें बेहतर इलाज के लिए इम्फाल के RIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया.

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हालांकि अस्पताल पहुंचते ही मामला विवाद का कारण बन गया. बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी अस्पताल परिसर के बाहर इकट्ठा हुए और घायल युवकों की भर्ती का विरोध करने लगे. प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि घायल युवक उग्रवादी गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या कांगपोकपी जैसे कूकी बहुल क्षेत्रों से गुजरने वाले आम नागरिकों को भी इसी तरह की सुरक्षा और सरकारी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है.

स्थिति तनावपूर्ण होती देख सुरक्षा बलों को तैनात किया गया. अधिकारियों के मुताबिक, जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल की बिल्डिंग में घुसने की कोशिश की तो सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और हल्का बल प्रयोग किया. बाद में अतिरिक्त केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई. प्रशासन का कहना है कि हालात फिलहाल नियंत्रण में हैं, लेकिन स्थिति संवेदनशील बनी हुई है.

प्रदर्शन में शामिल ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, मणिपुर के नेता टीपी डाइनिंग ने भी घायल युवकों को उपलब्ध कराई गई सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था पर सवाल उठाए. उनका कहना था कि प्रशासन को सभी समुदायों के लोगों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए.

दूसरी ओर, चुराचांदपुर से जारी एक बयान में एक प्रमुख कूकी संगठन ने कांगपोकपी की घटना की निंदा की है. कूकी-जो काउंसिल ने कहा कि घायल युवकों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. संगठन ने खास तौर से पाओगौलाल चोंगलोई का उल्लेख करते हुए कहा कि वह एक प्रतिभाशाली फुटबॉलर हैं और उन्होंने देश के प्रतिष्ठित फुटबॉल क्लब मोहन बगान सुपर जाएंट को भी रिप्रेजेंट किया है. 
 

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