खेलते-खेलते लगा था छोटा-सा कट... टांके लगवाने अस्पताल पहुंचा डेढ़ साल का मासूम, एनेस्थीसिया के बाद बिगड़ी हालत और चली गई जान

केरल के कन्नूर जिले से दर्दनाक मामला सामने आया है. यहां एक साल पांच महीने के बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान दिए गए एनेस्थीसिया की वजह से बच्चे की हालत बिगड़ी और आखिरकार उसकी जान चली गई.

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परिजनों ने लापरवाही के लगाए आरोप. (Photo: ITG) परिजनों ने लापरवाही के लगाए आरोप. (Photo: ITG)

शिबिमोल

  • कन्नूर,
  • 11 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:39 AM IST

डेढ़ साल का बच्चा अपने घर में खेल रहा था. इसी दौरान उसके होंठ और ठुड्डी के बीच हल्की चोट लग गई. परिवार उसे टांके लगवाने अस्पताल लेकर पहुंचा था. लेकिन परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान दिए गए एनेस्थीसिया के बाद बच्चे की तबीयत इतनी बिगड़ी कि कई दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उसने दम तोड़ दिया. 

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केरल के कन्नूर जिले से आई यह खबर किसी भी माता-पिता को बेचैन कर सकती है. घर में खेलते समय लगी एक मामूली चोट के बाद जिस बच्चे को परिवार सिर्फ टांके लगवाने अस्पताल लेकर गया था, कुछ दिनों बाद उसी बच्चे की मौत हो गई. अब परिजन इस मौत के लिए अस्पताल में इलाज के दौरान बरती गई कथित लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.

मृतक बच्चे की पहचान देवांश के रूप में हुई है. वह कन्नूर जिले के एरामम इलाके के रहने वाले सूरज और विजिशा का बेटा था. बताया गया कि खेलते समय देवांश के निचले होंठ और ठुड्डी के बीच कट लग गया था. परिवार उसे इलाज के लिए पय्यानूर स्थित एक प्राइवेट अस्पताल लेकर पहुंचा.

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परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने टांके लगाने से पहले बच्चे को एनेस्थीसिया दिया. इसके कुछ ही समय बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी. आरोप है कि एनेस्थीसिया के बाद बच्चे को गंभीर न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम होने लगीं. इसके बाद कई दिनों तक उसका इलाज चलता रहा, लेकिन शुक्रवार को उसकी मौत हो गई.

बच्चे की मौत के बाद परिवार ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही की शिकायत दर्ज कराई है. मामला सामने आने के बाद डीवाईएफआई (DYFI) के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल तक मार्च निकाला और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की.

बच्चे की शुक्रवार रात हॉस्पिटल में मौत हो गई. वह एरामाम-कुट्टूर ग्राम पंचायत के मथामंगलम के रहने वाले टी. सूरज और विजीशा का इकलौता बेटा था और शादी के आठ साल बाद पैदा हुआ था. परिजनों का कहना है कि एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे होश नहीं आया. बाद में उसे अस्पताल की कन्नूर यूनिट में शिफ्ट किया गया था. इस मामले में बच्चे के रिश्तेदार के. राजीवन की शिकायत पर पयन्नूर पुलिस ने एनेस्थेटिस्ट डॉ. अंजलि पोडुवल के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

हॉस्पिटल प्रबंधन ने आरोपों को किया खारिज

वहीं हॉस्पिटल प्रबंधन ने इलाज में लापरवाही के आरोपों को खारिज कर दिया है. अस्पताल की तरफ से कहा गया कि एनेस्थीसिया दिए जाने के तुरंत बाद बच्चे को अचानक कार्डियक अरेस्ट हुआ और उसे गहन देखभाल (intensive care) के लिए कन्नूर स्थित अस्पताल में भेजने से पहले इमरजेंसी वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया. अस्पताल ने यह भी कहा कि एनेस्थीसिया सही तरीके से दिया गया था. बच्चे की जान बचाने के लिए हर संभव कोशिश की गई थी.

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