बेंगलुरु: अस्पतालों में बेड का संघर्ष जारी, स्वास्थ्य मंत्री ने 'अपनों' के लिए आरक्षित किए 15% बेड

कर्नाटक के लोग अस्पतालों में बेड के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन यहां के स्वास्थ्य मंत्री के. सुधाकर ने अपने निर्वाचन क्षेत्र चिकबल्लापुरा के लोगों के लिए बेंगलुरु के अस्पतालों में 15% बेड आरक्षित रखे हैं.

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स्वास्थ्य मंत्री के. सुधाकर (फाइल फोटो-PTI) स्वास्थ्य मंत्री के. सुधाकर (फाइल फोटो-PTI)

नागार्जुन

  • बेंगलुरु,
  • 19 मई 2021,
  • अपडेटेड 12:18 PM IST
  • चर्चा में स्वास्थ्य मंत्री का अजीबोगरीब आदेश
  • बेंगलुुरु के 3 अस्पतालों के 100 बेड आरक्षित

कोरोना की दूसरी लहर से कर्नाटक सबसे अधिक प्रभावित है. लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं, लेकिन हॉस्पिटल में खाली बेड होते हुए भी यहां के स्वास्थ्य मंत्री के. सुधाकर के एक अजीबोगरीब आदेश से लोगों को राजधानी बेंगलुरू में बेड नहीं मिल रहा है. दरअसल, स्वास्थ्य मंत्री ने अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए बेंगलुरु के अस्पतालों में 15% आरक्षित किए हैं.

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कर्नाटक के लोग अस्पतालों में बेड के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन यहां के स्वास्थ्य मंत्री के. सुधाकर ने अपने निर्वाचन क्षेत्र चिकबल्लापुरा के लोगों के लिए बेंगलुरु के अस्पतालों में 15% बिस्तर आरक्षित रखा है. एस्टर सीएमआई अस्पताल, बैपटिस्ट अस्पताल और कोलंबिया एशिया, वो अस्पताल हैं, जहां बेड आरक्षित किए गए हैं.

बीबीएमपी पोर्टलों पर ये अस्पताल बेड फुल दिखाते हैं लेकिन हकीकत में स्वास्थ्य मंत्री के आदेश के कारण 15 फीसदी बेड खाली रह जाते हैं. स्वास्थ्य मंत्री के इस आदेश से कांग्रेस विधायक कृष्णा बायरेगौड़ा बेहद नाराज हैं. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को बड़ी आबादी की चिंता नहीं है, वह केवल अपने लोगों के बारे में सोच रहे हैं.

वहीं, स्वास्थ्य मंत्री के. सुधाकर का कहना है कि चिक्कबल्लापुर जिले में कोई मेडिकल कॉलेज नहीं है, गंभीर मरीजों का इलाज उपलब्ध नहीं है, सिर्फ इसलिए कि सुधाकर स्वास्थ्य मंत्री हैं, क्या चिक्कबल्लापुर के लोगों को सही इलाज नहीं मिलना चाहिए? एक अस्पताल बेंगलुरु में आरक्षित है, सिर्फ 100 बेड, क्या वे हकदार नहीं हैं?

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इस पर कांग्रेस विधायक कृष्णा बायरेगौड़ा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग बेंगलुरु के लोगों को एस्टर अस्पताल में जाने की इजाजत नहीं दे रहा है, इसे केवल चिक्काबल्लापुर के लिए आरक्षित किया गया है, जीवन और मृत्यु की स्थिति में किसी को भी अस्पताल में बेड न देना अवैध और अनैतिक है, सीएम से इस अवैध आदेश को रद्द करना चाहिए.

 

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