ऑपरेशन सिंदूर के लगभग एक साल बाद इंडिया टुडे/ आजतक की टीम पंजाब बॉर्डर के ग्राउंड जीरो पर पहुंची. जहां से हमारी टीम ने ये पता लगाने की कोशिश की कि सेना के अपग्रेड गन, मिसाइल और रडार नेटवर्क ने पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों को कैसे नाकाम किया. अब भारत का ये 'एयर डिफेंस ग्रिड' पहले से कहीं अधिक तेज और सटीक हो चुका है. इस पूरे सिस्टम को भारतीय क्षेत्र में एंट्री करने से पहले ही हवाई खतरों का पता लगाने, उन पर नजर रखने और उन्हें नष्ट करने के लिए बनाया गया है.
पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में न सिर्फ सैन्य ठिकानों, बल्कि नागरिक इलाकों को भी निशाना बनाने की कोशिश की थी. लेकिन भारत पूरी तरह तैयार था. सेना और वायुसेना के बीच रीयल-टाइम कमांड नेटवर्क, स्वदेशी रडार, अपग्रेडेड तोपें और पोर्टेबल मिसाइल सिस्टम ने मिलकर एक मजबूत डिफेंसिव शील्ड तैयार कर लिया था.
भारत टुडे की टीम ने लुधियाना के पास पंजाब बॉर्डर पर एक पूरा दिन बिताकर देखा कि ये डिफेंसिव शील्ड कैसे लगातार सक्रिय रहती है. ZU-23, L-70, Igla-S और आकाश मिसाइल सिस्टम जैसे प्लेटफॉर्म अब ड्रोन और मिसाइल हमलों से निपटने में भारत की ताकत का आधार हैं.
इगला-एस मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम इस सुरक्षा कवच में एक मोबाइल परत जोड़ता है. इसे सैनिक अपने कंधे पर रखकर आसानी से कहीं भी ले जा सकते हैं और दुश्मन के ड्रोन या हेलीकॉप्टर पर हमला कर सकते हैं. 5 से 6 किलोमीटर की मारक क्षमता वाला ये सिस्टम 3.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ने वाले टारगेटों को निशाना बना सकता है. इसका इन्फ्रारेड सीकर इंजन की गर्मी को पकड़कर दुश्मन के विमानों को बचने का कोई मौका नहीं देता है.
मूल रूप से बोफोर्स द्वारा विकसित L-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन में बड़ा बदलाव किया गया है. अब इस गन को भारत में ही तैयार किया जा रहा है और इसे रडार व इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर से लैस किया गया है. ये 40 एमएम की गन प्रति मिनट 330 राउंड फायर कर सकती है और 4 किलोमीटर के दायरे में दुश्मन को ढेर कर देती है. ईरान युद्ध की तरह अब ड्रोन का खतरा बढ़ गया है, जिसे देखते हुए L-70 को खास तौर पर ड्रोन झुंडों को रोकने के लिए तैनात किया गया है.
भारत की रक्षा प्रणाली की असली ताकत आकाश मिसाइल और 'आकाश तीर' कमांड नेटवर्क है. आकाश मिसाइल 25 किलोमीटर की मारक क्षमता के साथ मध्यम दूरी का सुरक्षा कवच प्रदान करती है. बीईएल (BEL) द्वारा निर्मित रडार 80 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के विमान को ट्रैक कर लेता है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसी ग्रिड ने हरियाणा के सिरसा तक हवाई खतरों को बीच रास्ते में ही मार गिराया था.
इस ऑपरेशन की असली ताकत आकाश तीर है. आकाश तीर एक ऐसा फोर्स मल्टीप्लायर है जो सेना और वायु सेना के रडार और सैटेलाइट फीड को एक लाइव बैटल पिक्चर में बदल देता है. इससे कमांडरों को तुरंत ये तय करने में मदद मिलती है कि किस खतरे पर कौन सा सिस्टम हमला करेगा. इस एकीकृत सिस्टम ने ही सैकड़ों पाकिस्तानी हवाई खतरों को रोका और उन्हें भारतीय एयरस्पेस में घुसने से पूरी तरह रोकने में मदद की.
भारत की इस एयर डिफेंस व्यवस्था को अब इजरायल के 'आयरन डोम' जैसा ढाल बताया जा रहा है. ये एक परतदार और नेटवर्क आधारित छतरी है जो खतरों को जमीन पर गिरने से पहले ही हवा में नष्ट कर देती है. ग्राउंड जीरो से संदेश साफ है कि भारत का पश्चिमी सुरक्षा कवच अब केवल प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि वह हर समय अलर्ट और युद्ध के लिए तैयार है.
मंजीत नेगी