हीटवेव का कहर! भीषण गर्मी से लोगों में डिहाइड्रेशन और थकान की शिकायत, दफ्तरों और अस्पतालों में बढ़ रहे मरीज

मध्य दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में कई छोटे क्लीनिक हैं, जहां हीटवेव और तापमान में बढ़ोतरी की वजह से बीमार लोगों की भरमार है.

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उत्तर भारत में भीषण गर्मी (फाइल फोटो) उत्तर भारत में भीषण गर्मी (फाइल फोटो)

आशुतोष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 30 मई 2024,
  • अपडेटेड 1:58 PM IST

उत्तर भारत में पड़ रही भीषण गर्मी (Heatwave) की वजह से स्कूलों और कई शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का आदेश दिया गया है, लेकिन पैदल चलने वाले लोगों के लिए चुनौतियां जस की तस बनी हुई हैं. मुंबई में रहने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपने दफ्तर के लिए जल्दी निकलकर गर्मी से बचने की कोशिश कर रहे हैं. देवाशीष मौर्य कहते हैं, "मैं सुबह करीब 8:30 बजे दफ्तर पहुंचता हूं और गर्मी से बचने के लिए शाम को करीब 5:30 बजे चेकआउट करता हूं, लेकिन यह लचीले कामकाजी घंटों के कारण ही मुमकिन हो पाता है."

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हीटवेव से बचने के लिए वर्क फ्रॉम होम

गुरुग्राम की एक टेक एक्सपर्ट अमृता सिंह का कहना है कि उन्होंने दिल्ली और NCR में पड़ रही भीषण गर्मी की वजह से 2 हफ्ते वर्क फ्रॉम होम (WFH) विकल्प चुना है और उनके दफ्तर ने उन्हें घर से काम करने की छूट देने में अच्छा व्यवहार अपनाया. अब कई अन्य महिलाओं ने भी WFH की गुजारिश की है. 

हालांकि, यह स्थिति हर किसी के लिए नहीं हो सकती है, जो गर्मी से बचने के लिए घर से काम कर सकें. हीटवेव और तापमान में बढ़ोतरी की वजह से भी कई मामले सामने आए हैं. सामाजिक, आर्थिक रूप से गरीब और छोटे वर्ग के लोगों के क्षेत्रों में मामले ज्यादा हैं.

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मरीजों में डिहाइड्रेशन, दस्त और तेज बुखार के लक्षण

मध्य दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में कई छोटे क्लीनिक हैं, जहां ऐसे मामलों की भरमार है. पहाड़गंज की घनी आबादी वाले इलाके में क्लीनिक चलाने वाले इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉक्टर गौरव कपूर इंडिया टुडे से बातचीत में कहते हैं, 'मेरे क्लीनिक में हर दिन हीट स्ट्रोक के कम से कम 4 से 5 मामले आते हैं. मई के महीने में मैं हीट स्ट्रोक और हीट वेव के लक्षण वाले करीब 4 से 5 मरीजों का इलाज कर रहा हूं, जिनमें बच्चे और युवा शामिल हैं. ये लक्षण डिहाइड्रेशन, दस्त और तेज बुखार जैसे होते हैं. इसके अलावा पहाड़गंज इलाके के होटलों में ठहरे हुए महाराष्ट्र से आए पर्यटक भी बीमार पड़ रहे हैं.

ज्यादा मरीज गरीब तबके से...

फरीदाबाद की अमृता हॉस्पिटल में बाल रोग विशेषज्ञ और वरिष्ठ सलाहकार डॉ. मनिंदर धालीवाल कहते हैं कि मई के महीने में हीट स्ट्रोक से संबंधित मामलों में 30 फीसदी तक का इजाफा हुआ है. हीट वेव और हीट स्ट्रोक से प्रभावित मामले ज्यादातर गरीब तबके से हैं. डिहाइड्रेशन और थकान के लक्षणों के बारे में ज्यादा बताया जाता है.

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नोएडा के विनायक हॉस्पिटल के एमडी डॉ. सौरभ चौधरी का कहना है कि पिछले 1 हफ्ते में हम ऐसे मामलों में बढ़ोतरी देख रहे हैं, जिनमें गंभीर डिहाइड्रेशन, उल्टी, डायरिया, सिरदर्द और जोड़ों में दर्द के लक्षण हैं. वो बताते हैं कि इस तरह की ज्यादा परेशानियों युवाओं में हैं.

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