उपवास, थाली बजाना, टोल मुक्ति अभियान...किसान आंदोलन को धार देने का प्लान

कृषि कानून के मसले पर सरकार और किसानों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है. किसानों ने अपने आंदोलन को धार देने के लिए कई नई रणनीति तैयार की हैं.

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किसानों ने आंदोलन को तेज करने की तैयारी की (PTI) किसानों ने आंदोलन को तेज करने की तैयारी की (PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 11:14 AM IST
  • किसानों के आंदोलन को लगभग एक महीना
  • किसानों ने आंदोलन को तेज करने की तैयारी की
  • सरकार ने फिर भेजा है बातचीत का प्रस्ताव

कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन को एक महीना होने को है. दिल्ली में जारी कड़ाके की ठंड के बीच भी हजारों किसान सीमाओं पर डटे हुए हैं और अपनी मांग पूरी करने को कह रहे हैं. सरकार किसानों से चर्चा करना चाह रही है, लेकिन अब किसानों की ओर से अपने आंदोलन को धार दी जा रही है ताकि लड़ाई लंबी चल सके.

लंबी लड़ाई की तैयारी...

किसानों ने अपने आंदोलन को लंबा चलाने का ऐलान पहले ही कर दिया था, लेकिन अब धीरे-धीरे इसके कई चरण सामने आ रहे हैं. किसानों की ओर से अभी तक भारत बंद और एक दिवसीय ऐलान किया जा चुका है लेकिन अब कुछ अलग तैयारी है. 

1.    किसानों ने सोमवार को फिर एक दिवसीय उपवास बुलाया है, ये करीब एक दर्जन से अधिक संगठनों द्वारा बुलाया गया है. किसानों ने पहले भी ऐसा ही एक उपवास बुलाया था. किसान वक्त-वक्त पर इस तरह का एक दिवसीय उपवास करेंगे. यानी जब सोमवार को बैठे किसानों का उपवास खत्म होगा, तब मंगलवार को एक नया ग्रुप उपवास पर बैठेगा.

2.    23 दिसंबर को किसान दिवस है, ऐसे में आंदोलनकारी किसानों ने बड़ी तैयारी की है. किसानों का कहना है कि इस दिन लोग अपने घर पर दोपहर का खाना ना बनाएं और किसानों के आंदोलन का समर्थन करें.

3.    किसानों ने पहले ही देशभर के नेशनल हाइवे को टोलमुक्त करने की बात कही थी. अब 25 दिसंबर से 27 दिसंबर तक हरियाणा के सभी टोल नाके पूरी तरह से मुक्त होंगे और किसानों के हवाले रहेंगे. इस दौरान किसी को टोल देने की जरूरत नहीं होगी.

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4.    हर महीने के आखिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात करते हैं, इस बार 27 दिसंबर को जब ये होगा तब किसान उस वक्त थाली पीटेंगे. बता दें कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पीएम मोदी ने थाली पिटवाई थी, अब उन्हीं के तरीके को किसान अपना रहे हैं. किसान नेताओं ने अपील की है कि जबतक मन की बात में पीएम बोलें, लोग अपने घर पर थाली पीटें.

5.    जमीन पर लड़ाई के अलावा किसानों ने सोशल मीडिया पर भी लड़ाई तेज की है. बीते दिनों में किसान एकता मोर्चा ने सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर उपस्थिति दर्ज कराई, जहां आंदोलन से जुड़े अपडेट दिए जा रहे हैं. बीते दिन किसान एकता मोर्चा का फेसबुक पेज बंद हुआ था, लेकिन विवाद के बाद फिर खोल दिया गया.

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किसानों ने इसके अलावा एनडीए के सांसदों, नेताओं से उनके आंदोलन का समर्थन करने की अपील की है. जबकि अन्ना हजारे भी किसानों के समर्थन में आंदोलन की बात कर रहे हैं.

बातचीत का रास्ता भी खुला...
एक ओर किसानों ने अपने आंदोलन को धार दी है, तो दूसरी ओर सरकार ने फिर बातचीत का प्रस्ताव रख दिया है. कृषि मंत्रालय की ओर से 40 संगठनों को बातचीत का प्रस्ताव भेजा गया है, ये चर्चा फिर विज्ञान भवन में होगी. हालांकि, तारीख क्या होगी इसपर फैसला किसान करेंगे.

सरकार और किसानों के बीच अब से पहले 6 दौर की बात हो चुकी है, सरकार ने लिखित संशोधन प्रस्ताव भी भेजा था. लेकिन किसानों ने उसे ठुकरा दिया था. ऐसे में अब अगर फिर चर्चा होती है, तो कुछ सकारात्मक होने की उम्मीद है. 

बता दें कि अबतक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार कह चुके हैं कि सरकार किसानों से हर मसले पर चर्चा को तैयार है. पीएम का आरोप है कि विपक्ष किसानों को गुमराह कर रहा है. पीएम मोदी भी 25 दिसंबर को फिर से किसानों से संवाद करेंगे. 


 

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