मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी. हालांकि भारती के लिए एक एक दिन भारी हो रहा है. क्योंकि दतिया सीट खाली घोषित होने के बाद उपचुनाव के लिए 13 जुलाई नामांकन की अंतिम तारीख है.
हाईकोर्ट में भारती ने अपनी दोषसिद्धि (Conviction) पर रोक लगाने और दतिया उपचुनावों के मद्देनजर राहत की गुहार लगाई है. दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले उनकी 3 साल की जेल की सजा को निलंबित कर दिया था. लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने की उनकी मुख्य अर्जी पर अंतिम निर्णय होना बाकी है.
इस मामले में कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था. आयोग भी अपना जबाव पेश कर रहा है. आयोग ने 30 जुलाई को दतिया में उपचुनाव के लिए मतदान का कार्यक्रम भी घोषित कर रखा है.
दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की एकल जज पीठ ने पहले उनकी 3 साल की जेल की सजा को तो निलंबित यानी सस्पेंड कर दिया था. लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने की उनकी मुख्य अर्जी पर अंतिम निर्णय होना बाकी है.
बता दें कि दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने 1 अप्रैल 2026 को राजेंद्र भारती को एक दशक पुराने कॉपरेटिव बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) घोटाले और धोखाधड़ी के मामले में दोषी पाया था. इसके बाद 2 अप्रैल 2026 को उन्हें 3 साल की कैद की सजा सुनाई थी.
भारतीय जनप्रतिनिधित्व कानून के नियमों के तहत 2 साल या उससे अधिक की सजा मिलने के कारण मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द (अयोग्य घोषित) कर दी थी. इसके साथ ही दतिया सीट को रिक्त घोषित कर दिया था.
राजेंद्र भारती की कानूनी टीम लगातार कोर्ट से दोषसिद्धि (Conviction) पर स्टे लगाने की मांग कर रही है, क्योंकि जब तक दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगती, तब तक उनकी विधायकी बहाल नहीं हो सकती. न ही वे आगामी चुनाव लड़ सकते हैं. दतिया उपचुनाव के लिए मैदान 30 जुलाई को और नतीजे 3 अगस्त 2026 को आएंगे.
राजेंद्र भारती ने अदालत से यह भी दिशानिर्देश जारी करने की मांग की थी कि चुनाव आयोग अधिसूचना जारी न करे, क्योंकि इससे उनके राजनीतिक करियर को अपूरणीय क्षति होगी. यदि हाईकोर्ट से उन्हें दोषसिद्धि पर अंतरिम राहत नहीं मिलती है, तो वे स्वयं इस उपचुनाव में उम्मीदवार के तौर पर शामिल नहीं हो पाएंगे.
इस हाई-प्रोफाइल मामले पर न केवल दतिया बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें टिकी हुई हैं.
संजय शर्मा