देहरादून-ऋषिकेश हाईवे पर 3000 से ज्यादा पेड़ों की कटाई शुरू, भड़के पर्यावरण प्रेमी, NHAI की आई सफाई

उत्तराखंड के देहरादून-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग पर विकास और पर्यावरण के बीच एक बड़ी जंग छिड़ गई है. 'सात मोड़' के जंगलों में भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर-सिक्स लेन परियोजना और फ्लाईओवर निर्माण के लिए 3000 से अधिक हरे-भरे पेड़ों की कटाई का काम तेजी से चल रहा है.

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'सात मोड़' के जंगलों में तेजी से चल रहा आरी का खेल.(Photo:Screengrab) 'सात मोड़' के जंगलों में तेजी से चल रहा आरी का खेल.(Photo:Screengrab)

aajtak.in

  • देहरादून/ऋषिकेश,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:58 PM IST

देहरादून-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित 'सात मोड़' के जंगलों में सड़क चौड़ीकरण और फ्लाईओवर निर्माण के लिए 3000 हजार से अधिक हरे-भरे पेड़ों की कटाई का कार्य तेजी से जारी है. इस परियोजना को लेकर स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों में गहरा रोष देखने को मिल रहा है.

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होगा. उनका आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर जंगलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जबकि वैकल्पिक योजनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए.

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पर्यावरण प्रेमियों ने सरकार और संबंधित विभागों से परियोजना की दोबारा समीक्षा करने तथा अधिक से अधिक पेड़ों को बचाने के लिए वैकल्पिक समाधान तलाशने की मांग की है. वहीं, परियोजना से जुड़े अधिकारी इसे यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अहम बता रहे हैं.

इस मुद्दे को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध लगातार तेज हो रहा है और आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है. देखें VIDEO:- 

NHAI का क्या कहना है?
वहीं NHAI का कहना है. लगभग 20 किमी लंबी भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश (NH-07) फोर/सिक्स लेन परियोजना को ₹743 करोड़ की लागत से हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के तहत विकसित कर रहा है. परियोजना का उद्देश्य देहरादून, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच बेहतर संपर्क, चारधाम यात्रा व पर्यटन को सुगम बनाना और बढ़ते यातायात दबाव को कम करना है. वर्तमान दो-लेन मार्ग पर प्रतिदिन करीब 18,456 वाहनों की आवाजाही होती है, जिससे जाम और दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ रहा है.

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NHAI ने पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के लिए वन क्षेत्र में राइट ऑफ वे (ROW) को 60 मीटर के बजाय 23 मीटर तक सीमित किया है. फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI) की सिफारिश पर 754 पेड़ों का मानसून के दौरान प्रतिरोपण किया जाएगा.

बड़कोट, ऋषिकेश और थानो वन रेंज से गुजरने वाली इस परियोजना में उत्तराखंड वन विभाग, WWF-India और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के सुझावों के आधार पर 1 ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास, 4 एलीफेंट अंडरपास, ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, वन्यजीव चेतावनी संकेतक, स्पीड कैल्मिंग उपाय और ‘नो हॉर्न’ जोन बनाए जा रहे हैं. 

वन विभाग के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में इस मार्ग पर 29 वन्यजीव सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए हैं. इसी कारण लगभग 3.5 किमी लंबी एलिवेटेड संरचना सहित वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही की विशेष व्यवस्था की जा रही है.

NHAI के अनुसार परियोजना सभी वैधानिक और पर्यावरणीय अनुमतियों के अनुरूप आगे बढ़ रही है. उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा पेड़ों की कटाई पर कोई प्रभावी रोक न होने के बाद राज्य सरकार ने निर्धारित शर्तों के साथ वर्किंग परमिशन जारी की है.

परियोजना पूरी होने पर यात्रा समय और जाम में कमी, सड़क सुरक्षा में सुधार, भविष्य के यातायात का बेहतर प्रबंधन तथा आधारभूत ढांचा विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद मिलेगी.

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पर्यावरणविद ने जताई चिंता?

इस मामले को पर्यावरणविद पद्मश्री डॉ अनिल जोशी ने चिंता जतायी है उन्होंने कहा विकास के नाम पर जो जंगलों का दोहन हो रहा है उसको देखना ज़रूरी है. यह बेशकीमती साल के पेड़ हैं. अब हमको चिंता करनी होगी की विकास के नाम पर कितना जंगलों का कटाव होगा. (रिपोर्ट:- प्रमोद नौटियाल)

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