देश की परीक्षा प्रणाली पर मानो कमियों का ग्रहण लग चुका है. नीट विवाद की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब सीयूईटी (CUET-UG) परीक्षा भी तकनीकी खामियों और कुप्रबंधन का शिकार हो गई. 30 मई को देशभर के कई परीक्षा केंद्रों पर सिस्टम फेल होने से परीक्षा समय पर शुरू नहीं हो सकी, जिसके चलते छात्रों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी.सिस्टम दोबारा शुरू होने के इंतजार में थककर करीब 3,765 छात्र सेंटर से बाहर चले गए. इस अव्यवस्था को लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार को घेरा है.
दरअसल, तकनीकी गड़बड़ी की वजह से शनिवार को हजारों छात्रों को भारी मानसिक तनाव झेलना पड़ा. परीक्षा केंद्रों पर कंप्यूटर सिस्टम ठप होने से टेस्ट समय पर शुरू नहीं हो सका. सबसे बुरा हाल दूसरी शिफ्ट के बच्चों का हुआ. उन्हें चिलचिलाती गर्मी में घंटों तक सेंटर्स के बाहर बेबसी में इंतजार करना पड़ा. इस बड़े बवाल के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) बैकफुट पर है. एजेंसी ने प्रभावित छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का ऐलान किया है. इस विफलता के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है.
सपा और कांग्रेंस ने केंद्र पर साधा निशाना
इस सिस्टम फेलियर को लेकर अखिलेश यादव ने सीधे भाजपा सरकार पर तीखा तंज कसा है. अखिलेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भाजपाई भ्रष्टाचार के रूप अनेक हैं, जिनमें से एक भ्रष्ट परीक्षा प्रणाली भी है. छात्रों की आवाज बुलंद करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि आज का परीक्षार्थी साफ कह रहा है कि उसे अब भाजपा सरकार नहीं चाहिए.
उधर, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि NEET और CBSE के बाद अब CUET में भी गड़बड़ी सामने आ गई है. रमेश का आरोप है कि सरकार सिर्फ हालात संभालने की कोशिश में लगी है, जबकि छात्रों की परेशानी बढ़ती जा रही है. उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की. कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि NTA से जुड़े कुछ कॉन्ट्रैक्टरों पर सही तरीके से निगरानी नहीं हो रही है.
उन्होंने सिर्फ सीयूईटी ही नहीं, बल्कि सीबीएसई (CBSE) की 12वीं बोर्ड परीक्षा के मार्किंग सिस्टम पर भी बड़ा स्कैंडल होने का दावा किया है. जयराम रमेश के मुताबिक, बोर्ड ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) को लागू करने में भारी जल्दबाजी की. टेंडर नियमों को ताक पर रखकर तेलंगाना की एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी 'COEMPT' को फायदा पहुंचाया गया. ट्रायल के दौरान इस सिस्टम में 36 कमियां सामने आई थीं, फिर भी बिना उन्हें सुधारे मुख्य परीक्षा करा दी गई. रमेश ने इस पूरे मार्किंग सिस्टम की सीबीआई (CBI) जांच कराने की मांग उठाई है.
इस पूरे विवाद पर परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था एनटीए तथा तकनीकी सेवा देने वाली कंपनी टीसीएस (TCS iON) ने अपनी गलती मान ली है. टीसीएस ने साफ किया कि उनके सेंट्रल सिस्टम में तकनीकी खराबी आने से दिक्कत हुई थी. इसके लिए कंपनी ने छात्रों से माफी भी मांगी है. एनटीए के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 3,765 छात्र ऐसे थे जो सिस्टम दोबारा शुरू होने के इंतजार में थककर सेंटर से बाहर चले गए थे. एजेंसी अब इन सभी छूटे हुए बच्चों के लिए विशेष तौर पर दोबारा परीक्षा आयोजित करेगी. हालांकि, विपक्ष इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं है, वह देश की पूरी शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की मांग पर अड़ा है.
aajtak.in