जटायु ने जान की बाजी लगाकर की सीता की रक्षा...प्रिया रमानी केस में कोर्ट ने क्यों दिया उदाहरण?

दिल्ली की रॉउज एवेन्यू कोर्ट ने रामायण महाभारत सीता, द्रौपदी, रावण, राम, लक्ष्मण और जटायु तक का जिक्र किया है. इन तमाम पात्रों का जिक्र कोर्ट ने इस संदर्भ में किया है कि कैसे महिलाओं के सम्मान और अस्मिता की रक्षा के लिए इस देश में लोगों ने अपने प्राण भी न्योछावर किए हैं.

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कोर्ट ने एमजे अकबर मानहानि मामले में ऐतिहासिक उदाहरण दिए हैं (प्रतीकात्मक तस्वीर) कोर्ट ने एमजे अकबर मानहानि मामले में ऐतिहासिक उदाहरण दिए हैं (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पूनम शर्मा

  • नई दिल्ली ,
  • 17 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 10:27 PM IST
  • कोर्ट ने मानहानि मामले में प्रिया रमानी को किया बरी
  • दिल्ली के रॉउज एवेन्यू कोर्ट में चल रहा था मामला
  • एमजे अकबर ने 'मीटू' मामले के बाद मानहानि का केस लगाया था

एमजे अकबर द्वारा प्रिया रमानी पर किये गए मानहानि के मामले में रमानी को बरी करने का फैसला सुनाते हुए दिल्ली की रॉउज एवेन्यू कोर्ट ने रामायण, महाभारत, सीता, द्रौपदी, रावण, राम, लक्ष्मण और जटायु तक का जिक्र किया है. इन तमाम पात्रों का जिक्र जज ने इस संदर्भ में किया है कि महिलाओं के सम्मान और अस्मिता की रक्षा के लिए इस देश में लोगों ने अपने प्राण भी न्योछावर किए हैं.

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कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ये शर्मनाक है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध और हिंसा की घटनाएं उस देश में हो रही हैं, जहां "महाभारत" और "रामायण" जैसे महाकाव्यों को महिलाओं के सम्मान के विषय के आसपास ही लिखा गया था. रॉउज एवेन्यू कोर्ट के एसीएमएम रविंद्र कुमार पांडे ने अपने 91 पेज के जजमेंट में लिखा है कि वाल्मीकि रामायण में सीता माता के लिए महान सम्मान का संदर्भ मिलता है, जब राजकुमार लक्ष्मण से राजकुमारी सीता के बारे में वर्णन करने के लिए कहा गया था. लक्ष्मण ने उस पर जवाब दिया कि उन्हें उन्हें सीता माता के सिर्फ पैरों के बारे में याद है क्योंकि उन्होंने पैरों से ऊपर कभी देखा ही नहीं. कोर्ट ने इस उद्धरण के माध्यम से दिखाया कि लक्ष्मण अपनी भाभी सीता का कितना सम्मान करते थे.

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कोर्ट ने आगे लिखा है कि रामचरितमानस के अरण्य कांड में महिलाओं की गरिमा की रक्षा, सम्मान की महान परंपरा का संदर्भ मिलता है, कोर्ट ने कहा कि जब रावण सीता का अपहरण करके अपने साथ ले जा रहा था तो जटायु ने अपने अपने प्राणों की बाजी लगाते हुए सीता की रक्षा करने के लिए भरसक प्रयास किए, यहां तक कि रावण ने उसके पंख भी काट दिए लेकिन उसके बाद भी जटायु तब तक जीवित रहे जब तक कि उन्होंने सीता के अपहरण की जानकारी राम और लक्ष्मण को नहीं दे दी.

जज रविंद्र कुमार पांडे ने एम जे अकबर की याचिका पर दिए फैसले में आखिरी पन्नों में महाभारत के सभा पर्व का भी जिक्र किया है जिसमें रानी द्रौपदी पूरी सभा से दुस्साशन द्वारा उसको बालों से पकड़कर घसीटे जाने के बाद सवाल खड़ा करती है और साथ ही न्याय की दरकार भी. कोर्ट ने कहा कि ये द्रौपदी की मस्तिष्क शक्ति और उसके तेज और तार्किक विश्लेषण की क्षमता का संकेत है. भारतीय महिलाएं सक्षम हैं, उन्हें उत्कृष्टता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करना है, उन्हें सिर्फ स्वतंत्रता और समानता की जरूरत है. भारतीय महिलाओं को समाज में उनकी उन्नति के लिए समान अधिकार और सामाजिक सुरक्षा दिए जाने की जरूरत है.

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