कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही है. गुरुवार को वह लगातार दूसरे दिन असम पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने पेश हुए. इससे पहले बुधवार को पुलिस ने उनसे करीब 10 घंटे से ज्यादा वक्त तक पूछताछ की थी. उनकी ये पेशी मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां द्वारा दर्ज कराए गए आपराधिक मामलों के सिलसिले में हुई है.
दरअसल, पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति है. इसके बाद रिनिकी भुइयां ने खेड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, मानहानि और शांति भंग करने के इरादे से अपमान करने का आरोप लगाते हुए पुलिस को शिकायत दी थी.
उन्हीं की शिकायत पर असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत चुनाव के संबंध में झूठे बयान देने और फर्जी दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. इससे पहले असम पुलिस की एक टीम दिल्ली में खेड़ा के आवास पर भी गई थी.
'संविधान में पूरा यकीन...'
बुधवार को पुलिस ने उनसे 10 घंटे से ज्यादा वक्त तक पूछताछ की थी. पूछताछ के लिए जाने से खेड़ा ने पहले पत्रकारों से कहा कि वो एक कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं और जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं. कांग्रेस लीडर ने जांच पूरी होने तक किसी भी तरह का बयान देने से इनकार किया है. उन्होंने दोहराया कि संविधान में उनकी पूरी आस्था है और वे कानून की हर प्रक्रिया का पालन करेंगे.
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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा, "केंद्र सरकार ने लिखित में कहा है कि पवन खेड़ा द्वारा दिखाए गए डॉक्यूमेंट्स फर्जी थे."
उन्होंने कहा कि जांच जल्द पूरी होगी और पुलिस समय सीमा के अंदर चार्जशीट दाखिल कर देगी. पवन खेड़ा ने पहले इस मामले में तेलंगाना हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की मांग की थी, जिसने उन्हें सात दिन की अग्रिम जमानत दे दी थी. हालांकि, असम पुलिस ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांजिट जमानत आदेश पर रोक लगा दी और खेड़ा को गुवाहाटी हाईकोर्ट में अपील करने का निर्देश दिया. इसके बाद गुवाहाटी हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद खेरा ने फिर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी.
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