चोरी के पैसों से बिजनेस प्लान तक... अयोध्या में ऐसे चल रहा था रकम दोगुनी करने का खेल

राम मंदिर चढ़ावा चोरी के पैसों को सिर्फ खर्च नहीं किया गया, बल्कि उसे 'बढ़ाने' की कोशिश भी हुई. पुलिस सूत्रों के अनुसार, चोरी की गई रकम का हिस्सा शेयर बाजार में निवेश किया गया, कुछ पैसे ब्याज पर चलाए गए और रिश्तेदारों के बैंक खातों के जरिए लेनदेन कर मनी ट्रेल छिपाने की कोशिश हुई. 30 बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं, जबकि जमीन, निवेश और पास सिस्टम समेत पूरे नेटवर्क की जांच जारी है.

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राम मंदिर के चंदा चोरी मामले में एक्शन के बाद कई बड़े बड़े खुलासे होते जा रहे हैं (Photo-ITG) राम मंदिर के चंदा चोरी मामले में एक्शन के बाद कई बड़े बड़े खुलासे होते जा रहे हैं (Photo-ITG)

aajtak.in

  • अयोध्या,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:03 AM IST

चढ़ावे चोरी की जांच की परतें जैसे-जैसे आगे बढ़ती जा रही है वैसे-वैसे नई जानकारी सामने आ रही है. अब बात शेयर बाजार में निवेश, सूद पर पैसा देना और जमीन में इनवेस्ट तक पहुंच गई. पुलिस सूत्रों का दावा है कि राम मंदिर के चढ़ावे से निकाली गई रकम को सिर्फ खर्च नहीं किया गया, बल्कि उसे बढ़ाने की कोशिश भी हुई. रिश्तेदारों के खातों से पैसा घुमाया गया, शेयरों में निवेश किया गया और ब्याज पर रकम चलाने के भी आरोप सामने आए हैं. अब जांच एजेंसियां इस पूरे  वित्तीय नेटवर्क की एक-एक कड़ी जोड़ने में जुटी हैं.

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चोरी के पैसों को निवेश में बदलने का आरोप

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में आरोपी अनुकल्प मिश्रा और सह-आरोपी अविनाश ने कथित तौर पर स्वीकार किया है कि चढ़ावे से निकाली गई रकम का एक हिस्सा शेयर बाजार में लगाया गया. इसके अलावा कुछ रकम ब्याज पर भी चलाई गई, ताकि उससे अतिरिक्त कमाई हो सके. हालांकि पुलिस इन बयानों की पुष्टि करने और उससे जुड़े निवेश रिकॉर्ड, डीमैट खातों तथा बैंक लेनदेन की जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय दस्तावेजों का मिलान पूरा होने के बाद ही इस दावे की पुष्टि हो सकेगी.

रिश्तेदारों के खातों से घुमाया गया पैसा

जांच का सबसे अहम पहलू कथित मनी ट्रेल है. पुलिस का दावा है कि रकम सीधे आरोपियों के खातों में नहीं रखी गई. पहले पैसे रिश्तेदारों और करीबी लोगों के बैंक खातों में भेजे गए. इसके बाद अलग-अलग समय पर वही रकम वापस आरोपियों के खातों में ट्रांसफर की गई. जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरीके का इस्तेमाल कथित तौर पर पैसों के स्रोत को छिपाने के लिए किया गया. इसी वजह से अब तक 30 बैंक खातों को फ्रीज किया जा चुका है. शुरुआती जांच में इन खातों में खाताधारकों की ज्ञात आय से कहीं अधिक लेनदेन मिलने की बात सामने आई है. अब बैंक स्टेटमेंट, आयकर रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है.

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घर की तलाशी में क्या मिला?

जांच के दौरान पुलिस आरोपी अनुकल्प मिश्रा को उसके घर लेकर पहुंची. वहां परिवार के सदस्यों से पूछताछ की गई और कई दस्तावेजों की जांच की गई. इससे पहले सह-आरोपी लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय के घरों पर भी तलाशी ली जा चुकी है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक तलाशी के दौरान नकदी, सोने के आभूषण और एक कार भी बरामद हुई है. हालांकि पुलिस ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि किस आरोपी के घर से कितनी नकदी या कौन-कौन सी संपत्ति मिली. अनुकल्प मिश्रा के घर की तलाशी के दौरान करीब एक एकड़ जमीन के दस्तावेज भी बरामद हुए. दस्तावेजों के अनुसार यह जमीन लगभग 6.7 लाख रुपये में खरीदी गई थी. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि जमीन खरीदने में इस्तेमाल हुई रकम का स्रोत क्या था. सूत्रों के मुताबिक वर्तमान बाजार में इस जमीन की कीमत कई गुना अधिक बताई जा रही है.

कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद?

जून के पहले सप्ताह में राम मंदिर के चढ़ावे चोरी की शिकायत सामने आई थी. इसके बाद श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की. एसआईटी की शुरुआती जांच में कथित गबन के संकेत मिलने के बाद एफआईआर दर्ज की गई और चढ़ावा गणना से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया. इसी जांच के दौरान कथित वित्तीय लेनदेन और निवेश से जुड़े नए पहलू सामने आए.

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पास सिस्टम भी जांच के घेरे में

जांच एजेंसियां अब केवल पैसों की आवाजाही ही नहीं, बल्कि मंदिर के पास जारी करने की व्यवस्था की भी जांच कर रही हैं. सूत्रों के अनुसार, आरोपी टिन्नू यादव ने कथित तौर पर इसी सिस्टम का दुरुपयोग कर बड़ी संख्या में पास जारी करवाए थे. अब यह देखा जा रहा है कि पास जारी करने की प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कहां चूक हुई और भविष्य में इसे कैसे रोका जा सकता है.

ट्रस्ट ने बदली प्रशासनिक व्यवस्था

घटनाक्रम के बाद श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी प्रशासनिक बदलाव शुरू कर दिए हैं. सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास के अधिकार बढ़ा दिए गए हैं. उनके नाम से नई डिजिटल आईडी बनाई गई है, जिसके जरिए अब श्रद्धालुओं के लिए पास जारी किए जाएंगे. वहीं चंपत राय और अनिल मिश्रा की आईडी फिलहाल निष्क्रिय कर दी गई है. ट्रस्ट का मानना है कि इससे पास जारी करने की व्यवस्था अधिक जवाबदेह और नियंत्रित हो सकेगी.

22 जुलाई के बाद बदल सकती हैं कई व्यवस्थाएं

सूत्रों के मुताबिक, 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं. इनमें चढ़ावा प्रबंधन को और पारदर्शी बनाना, दर्शन व्यवस्था में सुधार, पूजा-पद्धति को रामानंदीय परंपरा के अनुरूप व्यवस्थित करना, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को आधुनिक बनाना तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विस्तार शामिल है.   बैठक में ट्रस्ट के रिक्त पदों पर नियुक्तियों पर भी फैसला होने की संभावना है.

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अब जांच का सबसे बड़ा सवाल

जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित तौर पर चढ़ावे से निकली कुल रकम कितनी थी, उसका कितना हिस्सा बैंक खातों के जरिए घुमाया गया, कितना पैसा शेयर बाजार या अन्य निवेश में लगाया गया और क्या इस पूरे कथित नेटवर्क में आरोपियों के अलावा भी दूसरे लोग शामिल थे. 

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