ऑनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेशन को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. अदालत ने कहा कि इंटरनेट के जरिए बच्चों का यौन शोषण तेजी से बढ़ रहा है और यह साइबर अपराध के सबसे गंभीर रूपों में से एक बन चुका है. ऐसे मामलों में सोशल मीडिया कंपनियों की सख्त कार्रवाई पूरी तरह जायज है.
जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस राज वाकोडे की खंडपीठ ने 19 जून को दिए अपने आदेश में Meta के स्वामित्व वाले इंस्टाग्राम (Instagram) द्वारा एक व्यक्ति का अकाउंट स्थायी रूप से सस्पेंड करने के फैसले को सही ठहराया. इस आदेश की प्रति गुरुवार को उपलब्ध कराई गई.
यह भी पढ़ें: NCP मंत्री से जुड़े अश्लील वीडियो मामले में नया मोड़, आरोपी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में FIR रद्द करने की मांग
कोर्ट ने कहा कि बच्चों से जुड़े यौन शोषण के मामलों में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती. ऐसे अपराध बच्चों को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से अपूरणीय नुकसान पहुंचाते हैं.
'ऑनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेशन सबसे गंभीर साइबर अपराध'
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ऑनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेशन दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. यह साइबर माध्यम से होने वाले सबसे गंभीर अपराधों में शामिल है, जिसके परिणाम बच्चों के जीवन पर लंबे समय तक असर डालते हैं.
अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है कि उनकी सेवाओं का इस्तेमाल बच्चों के शोषण या ऐसे अपराधों को बढ़ावा देने के लिए न हो. इस तरह के मामलों में सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई आवश्यक है.
कोर्ट ने Meta की जीरो टॉलरेंस नीति की सराहना करते हुए कहा कि इसे मनमाना या असंगत नहीं कहा जा सकता. यह ऑनलाइन बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी और संतुलित कदम है.
याचिकाकर्ता को नहीं मिली राहत
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में दावा किया था कि उसे अपनी गलती सुधारने का मौका नहीं दिया गया और सीधे उसका Instagram अकाउंट हमेशा के लिए बंद कर दिया गया. उसके वकील प्रीति बडवैक पेंडके ने अदालत से स्थायी निलंबन को कठोर कार्रवाई बताया.
हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह विवादित नहीं है कि जिस व्यक्ति को आपत्तिजनक सामग्री भेजी गई, वह नाबालिग था. ऐसे में यह मामला चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेशन की श्रेणी में आता है.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Meta की नीति के अनुसार यदि उल्लंघन गंभीर हो तो केवल एक बार की घटना पर भी Instagram अकाउंट स्थायी रूप से सस्पेंड किया जा सकता है.
ग्रिवेंस कमेटी से भी नहीं मिली थी राहत
याचिकाकर्ता ने पहले सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 के तहत गठित ग्रिवेंस अपीलीय समिति का भी दरवाजा खटखटाया था. वहां से राहत नहीं मिलने के बाद उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.
हाईकोर्ट ने कहा कि Meta अपने कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स के तहत बच्चों के यौन शोषण, दुरुपयोग और उनके लिए खतरा पैदा करने वाली सामग्री को सबसे गंभीर उल्लंघनों में मानता है. ऐसे मामलों में कंपनी की जीरो टॉलरेंस नीति उचित है.
अदालत ने यह भी कहा कि Meta को ऐसे मामलों में आपत्तिजनक कंटेंट हटाने, संबंधित अकाउंट को स्थायी रूप से बंद करने और जरूरत पड़ने पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सूचना देने का अधिकार है. इसलिए इस मामले में कंपनी द्वारा की गई कार्रवाई में कोई अवैधता नहीं है और याचिका खारिज की जाती है.
aajtak.in