भारतीय जनता पार्टी के भीतर इन दिनों बड़े बदलाव की हलचल तेज है. राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन लगातार अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहे हैं. इसी के साथ पार्टी में नई और युवा टीम तैयार करने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है. दरअसल, 4 मई 2026 को आए चुनावी नतीजों के बाद संगठन को नए ढांचे में ढालने की रणनीति पर काम शुरू हुआ था. इसी दिशा में अब जमीनी स्तर पर नेताओं से बातचीत करके अगली टीम की रूपरेखा तैयार की जा रही है, जिसमें युवा चेहरों को ज्यादा मौका मिलने की उम्मीद है.
चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद नितिन नवीन ने सबसे पहले पश्चिम बंगाल तथा असम के नेताओं के साथ बैठकें कीं. इसके बाद उन्होंने ओडिशा का दो दिवसीय दौरा किया, जहां भुवनेश्वर और पुरी में कार्यकर्ताओं से संवाद कर बूथ स्तर को मजबूत करने पर जोर दिया गया. ओडिशा के बाद वे कर्नाटक पहुंचे, जहां संगठनात्मक ढांचे को लेकर वरिष्ठ नेताओं के साथ लंबी चर्चा हुई. फिलहाल, वे 28 से 30 मई तक उत्तराखंड के तीन दिवसीय पर हैं, जहां वे नेताओं के साथ-साथ बुद्धिजीवियों और संत समाज से फीडबैक ले रहे हैं.
दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल, मुख्यमंत्रियों का जमावड़ा
एक तरफ जहां नितिन नवीन राज्यों का दौरा करके संगठन का हाल जान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में भी सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. कई राज्यों के मुख्यमंत्री लगातार राजधानी पहुंचकर केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर रहे हैं. इनमें असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तथा पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी की बैठकें बेहद अहम मानी जा रही हैं. जिन राज्यों में पार्टी नेतृत्व का दौरा अभी नहीं हो पाया है, वहां के नेता खुद दिल्ली आकर चर्चा का हिस्सा बन रहे हैं.
हालांकि, उत्तर प्रदेश में नई टीम की लिस्ट लगभग फाइनल बताई जा रही है, जिसकी घोषणा जल्द ही हो सकती है. वैसे भी दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और त्रिपुरा में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है, जिससे संगठन में बड़े बदलाव के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं.
अब सबसे बड़ी नजर 10 जून को दिल्ली में होने वाली बैठक पर टिकी है, जहां बीजेपी और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्री शामिल होंगे. इस हाई-प्रोफाइल बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर विस्तार से चर्चा होगी. सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक के तुरंत बाद केंद्र सरकार में भी बड़े फेरबदल देखने को मिल सकते हैं. संभावना जताई जा रही है कि जून के दूसरे हफ्ते में मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है, जिसमें कई नए चेहरों की लॉटरी लग सकती है.
यही वजह है कि पार्टी इस बार संगठन और सरकार दोनों स्तर पर क्षेत्रीय संतुलन बनाने की पूरी कोशिश में है. उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद वहां से अब तक किसी बड़े चेहरे को केंद्रीय कैबिनेट में जगह नहीं मिली है, इसलिए बंगाल बीजेपी अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य के नाम पर गंभीर मंथन चल रहा है. इसके अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड के कुछ युवा व सक्रिय नेताओं को भी केंद्र में जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है. कुल मिलाकर आने वाले कुछ दिन भारतीय राजनीति के लिहाज से बेहद अहम होने जा रहे हैं.
पीयूष मिश्रा