बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले हुए वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है. सुप्रीम कोर्ट ने एसाईआर को वैध और संवैधानिक करार दिया है. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग को किसी समय एसआईआर कराने का कानूनन अधिकार है. एसआईआर को अवैध नहीं कहा जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग ने अपने अधिकारों से बाहर जाकर काम नहीं किया और लोगों को अपनी बात रखने के कई मौके दिए.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने कहा है कि हमें सुप्रीम कोर्ट से उम्मीदें थीं. मैं क्या कहूं? उन्होंने कहा कि हमारी चिंता क्या थी? उन्होंने कहा कि हम समावेशन (इंक्लूजन) की जगह बहिष्करण (एक्स्क्लूजन) की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे थे. मनोज कुमार झा ने कहा कि हमने चुनाव आयोग के अधिकारों को चुनौती नहीं दी थी. हम विस्तृत फैसले को देखेंगे.
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला देखने के बाद हम सभी विपक्षी दलों के लोग साथ बैठकर देखेंगे कि अब क्या किया जा सकता है. फिलहाल इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना है. वहीं, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉक्टर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा है कि विपक्ष का चेहरा बेनकाब हुआ है. कांग्रेस का चोला उतरा है.
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बीजेपी के प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुसार काम करता है. उन्होंने तंज करते हुए कहा कि कुछ संविधान विशेषज्ञ ऐसे हैं, जो अपनी बुद्धि को संविधान से ऊपर मानते हैं.
अजय आलोक ने कहा कि ऐसे लोग एसआईआर का विरोध कर रहे थे- राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस पार्टी, टीएमसी, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव. अजय आलोक ने दावा किया कि यह लोग अपने आपको संविधान से ऊपर समझते हैं. उन्होंने विपक्षी दलों और उनके नेताओं पर चुनाव आयोग के अपमान का आरोप लगाया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें आज करारा जवाब दिया है.
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बीजेपी प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि यह बहुत जरूरी था और हम इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करते हैं. सुप्रीम कोर्ट के फैसले का यूपी सरकार के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने भी स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है और उसे एसआईआर कराने का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अपनी मोहर लगा दी है.
ओमप्रकाश राजभर ने विपक्षी दलों की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष बेवजह की टिप्पणियां करता है और संविधान के तहत किए जाने वाले कामों का भी विरोध करता है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि इस प्रक्रिया में नोटिस देने और सुनवाई जैसे जरूरी सुरक्षा उपाय भी मौजूद थे. जो कदम उठाए गए, वह जरूरत से ज्यादा कठोर नहीं हैं. इस प्रक्रिया का मकसद वोटर लिस्ट को सही और भरोसेमंद बनाना है.
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