चुनाव सुधारों के लिए काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने देश के क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की वित्तीय सेहत को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2024-25 में 36 क्षेत्रीय दलों की कुल कमाई में 51.57% की भारी कमी आई है, जबकि इनमें से 21 दलों ने अपनी घोषित कमाई से ज्यादा पैसा खर्च किया है.
ADR ने 27 मई को जारी रिपोर्ट में 67 मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टियों में से 36 पार्टियों के ऑडिट खातों का जांच की है. इन पार्टियों की 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध थी.
रिपोर्ट में कहा गया है कि बाकी 31 पार्टियों ने 31 अक्टूबर 2025 की तय समयसीमा के 207 दिन बाद भी अपनी ऑडिट रिपोर्ट जमा नहीं की थी.
जांच के मुताबिक, 36 क्षेत्रीय पार्टियों की कुल कमाई 2024-25 में 1,192.94 करोड़ रुपये रही जो पिछले साल 2023-24 में 2,463.17 करोड़ रुपये थी. यानी कमाई में 1,270.23 करोड़ रुपये और 51.57 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
वहीं, इन पार्टियों का कुल खर्च 1,433.07 करोड़ रुपये रहा. ये उनकी कुल कमाई से 240.12 करोड़ रुपये ज्यादा था. यानी खर्च कमाई से करीब 20 फीसदी ज्यादा है.
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि विश्लेषण में सामने आया है कि पांच पार्टियों की कुल कमाई में लगभग 69 फीसदी और कुल खर्च में 77 फीसदी से ज्यादा हिस्सा था.
कमाई के मामले में TDP सबसे आगे
ADR की रिपोर्ट में बताया गया है कि क्षेत्रीय पार्टियों में सबसे ज्यादा आय तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने घोषित की. पार्टी की कमाई 228.31 करोड़ रुपये रही, जो कुल कमाई का 19.14 फीसदी है. इसके बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) की कमाई 219.35 करोड़ रुपये और वाईएसआर कांग्रेस की कमाई 140.39 करोड़ रुपये रही. खर्च के मामले में वाईएसआर कांग्रेस सबसे आगे रही. पार्टी ने 340.20 करोड़ रुपये खर्च किए. इसके बाद बीजू जनता दल (BJD) ने 288.44 करोड़ रुपये और AITC ने 227.59 करोड़ रुपये खर्च किए.
ADR की रिपोर्ट के अनुसार, 36 में से 21 राजनीतिक पार्टियों ने अपनी कमाई से ज्यादा पैसा खर्च किया. इनमें वाईएसआर कांग्रेस का अतिरिक्त खर्च सबसे ज्यादा रहा. पार्टी ने अपनी कमाई से 199.82 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च किए जो उसकी कुल कमाई से 142.33% ज्यादा है. AITC, BRS, BJD, जेडीयू और समाजवादी पार्टी ने भी अपनी कमाई से ज्यादा खर्च दिखाया है.
वहीं, 15 पार्टियों ने अपनी कमाई का कुछ हिस्सा खर्च नहीं किया. TDP के पास सबसे ज्यादा 166.98 करोड़ रुपये की बचत रही. इसके बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के पास 36.27 करोड़ रुपये और AIADMK के पास 35.86 करोड़ रुपये की बचत रही.
क्या है फंड का सोर्स
रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रीय पार्टियों की कमाई का सबसे बड़ा जरिया लोगों और संस्थाओं से मिलने वाला दान है.दान और योगदान से पार्टियों को 702.36 करोड़ रुपये मिले जो उनकी कुल कमाई का 58.88 फीसदी है.
AITC को सबसे ज्यादा 184.08 करोड़ रुपये का चंदा मिला. इसके बाद वाईएसआर कांग्रेस को 140.05 करोड़ रुपये और TDP को 85.20 करोड़ रुपये का योगदान मिला. ब्याज से होने वाली आय 277.21 करोड़ रुपये रही जो कुल कमाई का 23.24 फीसदी है.
रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि चुनाव कराने और प्रशासन चलाने पर सबसे ज्यादा खर्च किया गया. 15 क्षेत्रीय दलों ने अपने कुल खर्च का 55 फीसदी से ज्यादा हिस्सा चुनावों पर खर्च किया. वाईएसआर कांग्रेस ने चुनाव प्रचार पर 299.92 करोड़ रुपये खर्च किए. इसके बाद BJD ने 270.66 करोड़ रुपये और भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने 147.99 करोड़ रुपये खर्च किए.
एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में ऑडिट दस्तावेज वक्त पर जमा न करने की सुस्ती को भी उजागर किया है. केवल 15 पार्टियों ने अपनी रिपोर्ट समय पर दी, जबकि 21 दलों ने इसे दो से लेकर 96 दिनों की देरी के साथ जमा किया.
रिपोर्ट में कहा गया है कि डीएमके, शिवसेना, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी और जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत 31 क्षेत्रीय पार्टियों की 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट तैयार होने तक चुनाव आयोग की वेबसाइट (ECI) पर अपलोड नहीं की गई थी.
ADR ने सिफारिश की है कि राजनीतिक दलों के वित्तीय खुलासे के नियमों को सख्ती से लागू किया जाए, दानदाताओं की जानकारी को ज्यादा पारदर्शी बनाया जाए और समय पर ऑडिट रिपोर्ट जमा नहीं करने वाली पार्टियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.
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