महाराष्ट्र में पैरेंट्स को बड़ी राहत, उद्धव सरकार ने स्कूलों की फीस 15% कम करने का दिया आदेश

कोरोना संकट के बीच महाराष्ट्र सरकार ने शैक्षणिक वर्ष 2021-22 के लिए माता-पिता और छात्रों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है. सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में 15% फीस कटौती की जाएगी.

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सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई) सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई)

कमलेश सुतार

  • मुंबई,
  • 12 अगस्त 2021,
  • अपडेटेड 8:32 PM IST
  • कोरोना संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने लिया फैसला
  • सिर्फ वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में 15% फीस कटौती की जाएगी
  • जिन लोगों ने पहले ही फीस दिया, वो 3 तरह से ले सकेंगे पैसे

कोरोना संकट के बीच महाराष्ट्र सरकार ने शैक्षणिक वर्ष 2021-22 के लिए माता-पिता और छात्रों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है. सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में 15% फीस कटौती की जाएगी.

कोविड काल में माता-पिता के सामने आर्थिक संकट को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से फीस कटौती का यह निर्णय लिया गया है. नए आदेश के बाद अब तक जिन अभिभावकों ने पहले ही फीस जमा कर दी है, उन्हें अगले महीने पूरी तरह या तीन भागों में वापस दिया जाना होगा या फिर अगले साल की फीस में समायोजित किया जाना चाहिए.

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आदेश में यह भी कहा गया है कि किसी भी स्कूल को किसी भी तरह से छात्रों को ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल होने से नहीं रोकना चाहिए. साथ ही अगर वे फीस का भुगतान करने में असमर्थ हैं तो भी परीक्षा देने दें.

पिछले महीने कैबिनेट ने लिया था फैसला

इससे पहले 28 जुलाई को महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में राज्य के निजी स्कूलों के लिए 15 प्रतिशत फीस में कटौती को मंजूरी दी गई थी.

महाराष्ट्र कैबिनेट ने तब निर्णय लिया था कि फीस भुगतान का ढांचा ऐसा हो कि कोई भी छात्र शिक्षा से वंचित न रहे. लंबे समय से माता-पिता की ओर से यह चिंता जताई जा रही थी कि कई निजी संस्थान महामारी के दौरान भी मुनाफा कमा रहे हैं जबकि इसकी वजह से कई माता-पिता के सामने वित्तीय संकट ने स्थिति को और खराब कर दिया.

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राज्य की स्कूल की शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ ने तब कहा था, 'हमने इस साल की फीस के संबंध में यह निर्णय लिया गया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य सरकार के कैबिनेट द्वारा यह निर्णय लिया गया. यह स्पष्ट किया गया है कि यदि फैसले पर निजी स्कूलों की ओर से पालन नहीं किया जाता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.'

 

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