महाराष्ट्र के पुणे में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां खुद को चमत्कारी शक्तियों वाला आध्यात्मिक गुरु बताने वाले एक शख्स को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आरोपी पर एक महिला ने पिछले कई सालों तक यौन शोषण, मानसिक प्रताड़ना और धोखे से नियंत्रण में रखने के गंभीर आरोप लगाए हैं. पुलिस ने इस मामले में कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें आरोपी बाबा और उसके सात सहयोगी शामिल हैं.
पुणे क्राइम ब्रांच ने 59 वर्षीय राधामोहन मिश्रा को वाघोली के उबालेनगर स्थित एक बंगलो पर छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किया. यह बंगलो कथित रूप से आश्रम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था. पुलिस ने उसके करीबी सहयोगी 58 वर्षीय कनवल नयन और छह महिला सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया है. सभी आठ आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 20 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.
यह मामला तब सामने आया जब 41 वर्षीय एक महिला ने पुलिस से संपर्क कर गंभीर आरोप लगाए. महिला पुणे के सिंहगढ़ रोड क्षेत्र की रहने वाली है और एक प्रतिष्ठित कंपनी में काम करती है. पुलिस के अनुसार वह कई सालों से आरोपी के संपर्क में थी और बाद में उसी बंगलो में रह रही थी जिसे आश्रम के रूप में चलाया जा रहा था.
2001 से 2026 के बीच हरियाणा और पुणे में फैले अपराध के आरोप
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी राधामोहन मिश्रा मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला है और पिछले लगभग आठ वर्षों से पुणे में रह रहा था. वह खुद को आध्यात्मिक गुरु बताकर लोगों के स्वास्थ्य, पारिवारिक और आर्थिक समस्याओं को दूर करने का दावा करता था. इसी दावे के आधार पर उसने कई अनुयायी भी बनाए थे.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने महिला और उसके परिवार को धीरे धीरे अपने प्रभाव में लिया और उनके जीवन पर नियंत्रण स्थापित कर लिया. जांच में यह भी सामने आया कि कथित अपराध 2001 से 2026 के बीच हरियाणा और पुणे में फैला हुआ है. आरोपी पर आरोप है कि उसने महिला को उसके परिवार और सामाजिक दायरे से अलग कर दिया और मानसिक रूप से उसे नियंत्रित किया.
पुलिस ने यह भी आरोप लगाया है कि महिला के साथ वर्षों तक शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण किया गया. आरोपी ने परिवार के सदस्यों को भी भ्रमित किया और यह विश्वास दिलाया कि पीड़िता झूठ बोल रही है. इस कारण लंबे समय तक मामला सामने नहीं आ सका.
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त तेजस्विनी सटपुते ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें यौन उत्पीड़न और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं. पीड़िता ने आखिरकार बंगलो छोड़ने का निर्णय लिया और अपने परिवार को पूरी घटना की जानकारी दी. इसके बाद परिवार ने गंभीरता को समझते हुए पुलिस से संपर्क किया और खराड़ी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई.
इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए वाघोली स्थित बंगलो पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान पुलिस को बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले. इनमें हार्ड डिस्क, लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल फोन, पेन ड्राइव, सीडी, डीवीडी और सीसीटीवी से जुड़े उपकरण शामिल हैं. इसके अलावा लगभग 6.5 लाख रुपये नकद, 15 लाख रुपये मूल्य के आभूषण और कई दवाइयां भी बरामद की गई हैं.
पुलिस को शक है कि इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत मौजूद हो सकते हैं. जांच में यह भी सामने आया है कि कथित रूप से पीड़िता के निजी वीडियो रिकॉर्ड किए गए थे और उन्हें दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया. पुलिस ने यह भी दावा किया है कि बंगलो के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिनका उपयोग महिला की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाता था. यह भी सामने आया है कि परिसर में एक भूमिगत सुरंग भी बनाई जा रही थी, जिसकी जांच पुलिस कर रही है कि इसका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा था.
जांच अधिकारियों के अनुसार राधामोहन मिश्रा के अनुयायी महाराष्ट्र और उत्तर भारत के कई राज्यों में फैले हुए थे और लोग अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान के लिए उसके पास आते थे. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या अन्य लोगों के साथ भी इसी तरह की घटनाएं हुई हैं. लोक अभियोजक विजय कदम ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान मिले आपत्तिजनक वीडियो और डिजिटल साक्ष्य इस मामले में आरोपी की हिरासत के लिए महत्वपूर्ण आधार हैं.
भूमिगत सुरंग मिलने से जांच और गहराई, पुलिस कर रही पड़ताल
फिलहाल सभी आठ आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और मामले की गहन जांच जारी है. पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हो सकते हैं. यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि कैसे अंधविश्वास और विश्वास का दुरुपयोग कर लोगों के जीवन को लंबे समय तक प्रभावित किया जा सकता है.
ओमकार