NEET पेपर लीक: प्रोफेसर ने बांट लिए थे सब्जेक्ट, फिर बाहर पहुंचे सवाल? CBI की पूछताछ में खुलासा

NEET पेपर लीक मामले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नया सुराग मिला है. सीबीआई ने पुणे की प्रोफेसर मनीषा मांढरे के आवास पर पहुंचकर शनिवार को पूछताछ की. जांच एजेंसी को शक है कि कथित लीक नेटवर्क में अलग-अलग लोगों ने विषयवार सवाल बाहर पहुंचाने का काम किया और इसके तार कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं.

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पुणे की प्रोफेसर मनीषा मांढरे से की गई पूछताछ. (Photo: Screengrab) पुणे की प्रोफेसर मनीषा मांढरे से की गई पूछताछ. (Photo: Screengrab)

ओमकार

  • पुणे,
  • 17 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:03 AM IST

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने NEET पेपर लीक मामले में जांच तेज कर दी है. पुणे के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से जुड़ी प्रोफेसर मनीषा मांढरे को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया है. देशव्यापी परीक्षा में हुई धांधली के मामले में चल रही जांच के तहत, CBI अधिकारियों ने शनिवार को पुणे में मांढरे के आवास पर पूछताछ की.

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जांच सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर परीक्षा के पेपर के कुछ खास हिस्सों को लीक करने के लिए विषयों को आपस में बांट लिया था. कथित तौर पर केमिस्ट्री से जुड़े सवालों की जिम्मेदारी प्रह्लाद कुलकर्णी पर थी, जबकि प्रोफेसर मनीषा मांढरे कथित तौर पर बॉयोलाजी के सवालों को संभाल रही थीं.

जांचकर्ताओं को संदेह है कि एग्जाम के पेपर से चुने हुए सवाल एजेंटों के एक नेटवर्क के जरिए लीक किए गए थे, जिसमें मनीषा वाघमारे, धनंजय लोखंडे और शुभम खैरनार शामिल थे. इसके बाद पेपर छात्रों के बीच बांटे गए थे. सूत्रों का कहना है कि मनीषा वाघमारे और प्रह्लाद कुलकर्णी एक-दूसरे को लातूर के दिनों से जानते थे. कुलकर्णी और मांढरे भी कथित तौर पर NEET परीक्षाओं के लिए पेपर सेट करने में एक-दूसरे से जुड़े थे.

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जांच के दौरान सामने आया कि मांढरे बाद में पुणे के बिबवेवाड़ी इलाके में गंगा ओशियाना सोसाइटी में रहने लगीं, जहां मनीषा वाघमारे पहले से ही रह रही थीं. मांढरे कथित तौर पर अपने घर पर कोचिंग क्लास चलाती थीं, जबकि वाघमारे कथित तौर पर मांढरे और कुलकर्णी दोनों के साथ संपर्क में रहती थीं.

जांच टीम ने खुलासा किया कि मांढरे और कुलकर्णी अपने घरों से कोचिंग क्लास चलाते थे. वाघमारे अक्सर दोनों के घर पर जाती थीं. लीक हुआ पेपर कई एजेंट्स के जरिए आगे बढ़ाया गया था. मनीषा वाघमारे ने वह पेपर धनंजय लोखंडे को सौंपा, जिसने उसे नासिक के शुभम खैरनार को दे दिया.

इसके बाद शुभम खैरनार ने पेपर को गुरुग्राम के यश यादव तक पहुंचाया. वहां से यश यादव ने उसे राजस्थान के सीकर के बिवाल भाइयों के साथ शेयर किया. CBI इस नेटवर्क के पूरे दायरे का पता लगाने और कथित पेपर लीक रैकेट में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए जांच में जुटी है.

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