मुंबई ने कैसे मैनेज किया ऑक्सीजन सप्लाई का संकट? सुप्रीम कोर्ट ने भी की तारीफ

महाराष्ट्र इस वक्त कोरोना की दूसरी लहर का सामना कर रहा है. लेकिन इस संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की तारीफ की है और ऑक्सीजन सप्लाई से निपटने के तरीके को अच्छा बताया है. मुंबई ने ये कैसे किया, यहां समझिए.

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देश के अलग-अलग हिस्सों में दिख रहा है ऑक्सीजन का संकट (फोटो: PTI) देश के अलग-अलग हिस्सों में दिख रहा है ऑक्सीजन का संकट (फोटो: PTI)

साहिल जोशी

  • मुंबई,
  • 06 मई 2021,
  • अपडेटेड 8:44 AM IST
  • मुंबई ने दूसरी लहर में संभाला ऑक्सीजन संकट
  • सुप्रीम कोर्ट ने तारीफ की, दिल्ली को सीखने को कहा

महाराष्ट्र इस वक्त कोरोना की दूसरी लहर का सामना कर रहा है. लेकिन इस संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की तारीफ की है और ऑक्सीजन सप्लाई से निपटने के तरीके को अच्छा बताया है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने जब 30 अप्रैल को राज्य को संबोधित किया था, तब उन्होंने अपने विरोधियों पर तंज कसा था. उद्धव ने कहा था कि जब हमने लॉकडाउन का फैसला किया, तब लोग हमपर निशाना साध रहे थे लेकिन अब कई राज्य हमारे रास्ते पर ही चल रहे हैं. 

उद्धव ठाकरे ने भले ही अपनी सरकार की तारीफ की हो, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी अब बीएमसी के काम को सराहा गया है और दिल्ली को उससे सीखने के लिए कहा गया है. अगर आंकड़ों को देखें, तो मुंबई के हालात बीते कुछ दिनों में सुधरने ही लगे हैं. कोरोना के नए मामलों में कमी आई है, 4 अप्रैल को जहां मुंबई में 11 हजार तक केस आ रहे थे, 4 मई को ये आंकड़ा ढाई हज़ार पर पहुंच गया है.

लेकिन सबसे अहम बात है ऑक्सीजन की सप्लाई का मसला, जिसकी तारीफ सुप्रीम कोर्ट ने की है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने सुनवाई के दौरान कहा कि दिल्ली सरकार के हेल्थ सेक्रेटरी को बीएमसी के अधिकारियों से मिलना चाहिए और उनका अनुभव जानना चाहिए. 

कोरोना संकट के वक्त भी बीएमसी ने अपने यहां ऑक्सीजन की डिमांड को 235 मीट्रिक टन प्रति दिन के पास तक ही रखा. शिवसेना पर अक्सर हमला करने वाली बीजेपी ने भी दिल्ली, मुंबई की तुलना की और ऑक्सीजन सप्लाई के मसले पर मुंबई की तारीफ करते हुए दिल्ली पर निशाना साधा. 

पांच प्वाइंट की रणनीति ने किया काम...
ऑक्सीजन नीति को लेकर बीएमसी के सुरेश काकाणी ने बताया कि हमने कोरोना की पहली लहर में अंदाजा लगा लिया था कि ऑक्सीजन सप्लाई का मसला बड़ा रहेगा. ऐसे में हमने तभी से ही इसकी तैयारी शुरू कर दी थी. बीएमसी ने सबसे पहले जाना कि सिलेंडर के इस्तेमाल से वेस्टेज बढ़ता है, ऐसे में उन्होंने मुंबई के बड़े कोविड केयर सेंटर्स पर ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम को बदला, सिलेंडर बेस्ड सिस्टम को पाइप बेस्ड सिस्टम बना दिया. ये काम जनवरी में ही किया गया. 

बीएमसी ने इसके साथ ही ऑक्सीजन नर्स की तैनाती की, जिनका काम ये था कि वे वार्ड में प्रति मरीज का ऑक्सीजन लेवल 96 तक रखें, जो मरीज के लिए उपयुक्त है. मार्च में जब कोविड के केस बढ़े तब मुंबई में प्रति मरीज ऑक्सीजन की खपत 6 किग्रा. तक पहुंची, जिसे अप्रैल में 4.2 किग्रा. तक लाया गया. 

प्राइवेट अस्पतालों के साथ साधा संपर्क
बीएमसी अधिकारी ने कहा कि अगर हम लोगों को कहें कि कल पानी की कमी होगी, तो लोग पानी जमा करना शुरू कर देंगे. ऐसे में लोगों को पानी की सप्लाई की सही डिटेल देना जरूरी है, ऐसा ही हमने ऑक्सीजन के साथ किया. बीएमसी ने प्राइवेट अस्पतालों से अपनी ऑक्सीजन सप्लाई का बीस फीसदी हिस्सा रिजर्व करने को कहा, साथ ही भरोसा दिलाया कि जरूरत पड़ने पर उन्हें सप्लाई मिलेगी.

इसके अलावा बीएमसी ने डॉक्टरों के साथ मिलकर ट्रेनिंग सेशन किया, ताकि ऑक्सीजन का सही इस्तेमाल किया जा सके. डॉक्टरों को बताया गया कि वो मरीजों को दवाई, वॉक टेस्ट करवाएं, इससे ऑक्सीजन सप्लाई पर निर्भरता कम हुई और मरीज डिस्चार्ज होना शुरू हुए. हमारा मकसद मुंबई की स्थिति को कंट्रोल में लाने का था, वॉर रूम की मदद से ये संभव हो पाया. 

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