उपजाऊ मिट्टी बही, मवेशी भी नहीं रहे... सतारा के किसानों पर कहर बनकर टूटी बारिश

महाराष्ट्र के सतारा जिले में 24 घंटे में 550 मिमी बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात बन गए. कई इलाकों में भारी नुकसान की खबर है, जबकि प्रशासन राहत और बचाव में जुटा है.

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सातारा में कुदरत का कहर. (Photo: ITG) सातारा में कुदरत का कहर. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • सतारा,
  • 07 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:43 PM IST

महाराष्ट्र के सतारा जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा दी है. यहां के वाई तहसील की जांभळी घाटी में पिछले 24 घंटे के दौरान रिकॉर्ड 550 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. इस भारी बारिश के बाद नदियां, नाले और पहाड़ी झरने उफान पर आ गए हैं. बाढ़ के तेज बहाव में सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि की उपजाऊ मिट्टी बह गई है. इतना ही नहीं, कई सड़कें और पुल पानी में डूब गए हैं, जिससे पूरे इलाके का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है.

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इस प्राकृतिक आपदा में सबसे ज्यादा नुकसान स्थानीय किसानों को उठाना पड़ा है. बाढ़ के पानी ने खेतों की उपजाऊ मिट्टी को पूरी तरह से बहा दिया है, जिसके कारण अब वहां केवल पत्थर और बड़े-बड़े बोल्डर ही दिखाई दे रहे हैं. मिट्टी बह जाने की वजह से कई छोटे किसानों के खेत पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं. इतना ही नहीं, खेतों में बंधे कुछ मवेशी भी पानी के तेज बहाव में बह गए हैं. इसी का नतीजा है कि उनके सामने अब रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. शुरुआती अनुमान के मुताबिक, किसानों को इस बार करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है.

गांवों का बाहरी दुनिया से टूटा संपर्क

बारिश की वजह से जांभळी गांव और आदिवासी बस्ती को जोड़ने वाला मुख्य पुल पूरी तरह पानी में डूब गया है. कई रास्ते बंद होने के कारण गांवों का बाहरी दुनिया से संपर्क टूट चुका है. पानी का बहाव इतना तेज है कि लोगों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है. इस समय पूरे क्षेत्र में डर और चिंता का माहौल बना हुआ है.

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हालात की गंभीरता को देखते हुए सोनाली मिटकरी स्वयं बाढ़ के पानी के बीच से होते हुए प्रभावित गांवों तक पहुंचीं. उन्होंने स्थानीय सरपंच समेत ग्रामीणों से मिलकर हालात का जायजा लिया. इसके तुरंत बाद एहतियात के तौर पर आदिवासी बस्ती के लोगों को सुरक्षित जगहों जैसे गांव के स्कूल या मंदिर में शिफ्ट होने के निर्देश दिए गए. वहीं, प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है, जिससे राहत का काम तेजी से जारी है.

प्रशासनिक दौरे के दौरान ग्रामीणों ने अपनी आपबीती सुनाई. किसानों ने बताया कि लगातार दूसरे साल आई इस भीषण बारिश ने उनकी कमर तोड़कर रख दी है. पिछले साल भी इसी इलाके में भारी बारिश से बड़े पैमाने पर खेती तबाह हुई थी, और इस बार फिर वही नजारा सामने है. यही वजह है कि परेशान किसानों ने सरकार से तुरंत नुकसान का पंचनामा कराकर उचित मुआवजा देने की गुहार लगाई है. दूसरी तरफ, मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदी और नालों के पास न जाने की अपील की है.

(इनपुट- इम्तियाज मुजावर)

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