महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन सोमवार को कई चौंकाने वाले घटनाक्रम देखने को मिला, जहां उद्योगपति अरुण लखानी (जो एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले के पुत्री रेवती सुले के ससुर होने वाले हैं) को बीजेपी ने वर्धा-चंद्रपुर-गड़चिरोली निर्वाचन क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया है.
बीजेपी उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद अपने पारिवारिक रिश्तों और राजनीतिक जुड़ाव पर खुलकर बात करते हुए कहा, 'राजनीति और पारिवारिक रिश्ते पूरी तरह से दो अलग-अलग बातें हैं.'
उन्होंने आगे कहा कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी विचारधारा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और चुनावी राजनीति को पारिवारिक मामलों से दूर ही रखा जाना चाहिए.
सबसे ज्यादा सीटों पर मैदान में है बीजेपी
इस विधान परिषद चुनाव में सत्ताधारी महायुति गठबंधन के अंदर बीजेपी सबसे ज्यादा 11 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना चार और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की अगुवाई वाली एनसीपी दो सीटों पर मैदान में है. दूसरी तरफ, विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) खेमे में कांग्रेस आठ सीटों के साथ सबसे आगे है, जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) छह और शरद पवार की एनसीपी (एसपी) तीन सीटों पर चुनाव लड़ रही है.
22 जून को होगी मतगणना
लोकल सेल्फ-गवर्नमेंट बॉडीज के सदस्य इस चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल (इलेक्टोरल कॉलेज) का हिस्सा हैं. चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, दाखिल किए गए सभी नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी यानी जांच 2 जून को की जाएगी और नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 4 जून तय की गई है. इसके बाद 18 जून को सभी 17 सीटों पर मतदान प्रक्रिया पूरी होगी, जिसके बाद 22 जून को नतीजों की घोषणा की जाएगी.
नामांकन के अंतिम दिन पुणे सीट पर एनसीपी द्वारा विक्रम काकड़े को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद भारी ड्रामा देखने को मिला. पूर्व राज्यसभा सदस्य संजय काकड़े और उनके बेटे विक्रम काकड़े सोमवार को ही सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली पार्टी में शामिल हुए थे. विक्रम काकड़े के साथ ही एनसीपी के पुणे इकाई अध्यक्ष सुनील टिंगरे ने भी नामांकन दाखिल कर दिया, जिससे पार्टी के अंदर बगावत की अटकलें तेज हो गईं.
इस राजनीतिक विवाद पर सफाई देते हुए एनसीपी प्रवक्ता उमेश पाटिल ने जोर देकर कहा कि विक्रम काकड़े ही पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार हैं, जबकि सुनील टिंगरे केवल एक "समर्थक" उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं. दूसरी ओर, नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद सुनील टिंगरे ने मीडिया के सामने स्पष्ट रूप से कहा कि उनका ये कदम कोई "डमी" आवेदन या महज औपचारिकता नहीं है.
महायुति पर विपक्ष का गंभीर आरोप
वहीं, विपक्षी दलों ने टिकट बंटवारे को लेकर महायुति गठबंधन पर तीखा हमला बोला है. विपक्ष का आरोप है कि सत्ताधारी दल वरिष्ठ राजनेताओं के रिश्तेदारों को चुनावी मैदान में उतार रहे हैं. एनसीपी ने रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग निर्वाचन क्षेत्र से अपने वरिष्ठ पार्टी नेता सुनील तटकरे के बेटे अनिकेत तटकरे को नामांकित किया है, जिसे लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है.
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने ठाणे और नासिक सीटों से क्रमशः रवींद्र पाठक और नरेंद्र दराडे को फिर से मैदान में बनाए रखा है. इसके अलावा शिवसेना ने परभणी-हिंगोली स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से सईद खान को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि यवतमाल निर्वाचन क्षेत्र से दुष्यंत चतुर्वेदी को पार्टी ने एक बार फिर अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया है.
यवतमाल स्थानीय राजनीति में उस समय एक नया मोड़ आ गया जब राज्य सरकार के मंत्री और शिवसेना नेता संजय राठौड़ की पत्नी शीतल राठौड़ ने भी अपना नामांकन दाखिल कर दिया. शिवसेना के आंतरिक सूत्रों का दावा है कि शीतल राठौड़ का यह नामांकन केवल एक बैकअप प्लान है, ताकि अतीत के किसी आरोप के आधार पर यदि बीजेपी या अन्य दलों के विरोध के कारण दुष्यंत चतुर्वेदी का फॉर्म खारिज होता है, तो पार्टी का विकल्प खुला रहे.
भारतीय जनता पार्टी ने भंडारा-गोंदिया से अविनाश ब्रह्मणकर, अमरावती से प्रवीण पोटे पाटिल, सांगली-सतारा से धैर्यशील कदम, सोलापुर से राजेंद्र राउत, छत्रपति संभाजीनगर-जालना से सुहास शिरसाट, नांदेड़ से अमर राजुरकर, धाराशिव-लातूर-बीड से बसवराज पाटिल और जलगांव से नंदकिशोर महाजन को मैदान में उतारा है. नागपुर के वरिष्ठ बीजेपी नेता चंद्रशेखर बावनकुले के विधानसभा में चुने जाने के कारण ये उपचुनाव कराना पड़ रहा है.
नागपुर की खाली हुई सीट के लिए बीजेपी की ओर से राजीव पोतदार ने दो अलग-अलग सेटों में अपने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं, जिनका कार्यकाल साल 2028 तक रहेगा. इस सीट पर पोतदार का सीधा मुकाबला कांग्रेस नेता अतुल लोंढे से होगा. नागपुर की सीट के लिए कुल पांच उम्मीदवारों ने छह पर्चे भरे हैं, जिनमें निर्दलीय के रूप में राजेश जंगल और सुरेंद्र लोही, कांग्रेस से दिनेश ढोले और अतुल लोंढे शामिल हैं.
विपक्षी खेमे से कांग्रेस पार्टी ने वर्धा-चंद्रपुर-गडचिरोली में शैलेश अग्रवाल, यवतमाल में साहेबराव कांबले, अमरावती में हर्षदीप देशमुख, लातूर-बीड-धाराशिव में महेश देशमुख, सोलापुर में आदित्य फतेहपुरकर और भंडारा-गोंदिया में दिलीप बंसोड़ को टिकट दिया है. इसके अलावा नांदेड़ से रामदास पाटिल सुख्तनकर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि माधवराव जावलगांवकर निर्दलीय दावेदारी ठोक रहे हैं.
वहीं,एनसीपी (एसपी) की ओर से अभिजीत पाटिल ने ठाणे से और वसंतराव देशमुख ने सोलापुर से अपने नामांकन दाखिल किया है. पुणे से श्रीकांत पाटिल और तुषार कामते मैदान में हैं, सतारा-सांगली निर्वाचन क्षेत्र से अभयसिंह जगताप और प्रताप पाटिल ने पर्चा भरा है. पार्टी पदाधिकारी के अनुसार, नाम वापसी की अंतिम तिथि बीतने के बाद ही चुनावी मैदान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
शिवसेना (UBT) ने नासिक में नहीं उतारा उम्मीदवार
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) की ओर से देवयानी पाटिल डोंगांवकर ने छत्रपति संभाजीनगर-जालना से, विवेक नवंदर ने परभणी-हिंगोली से और बाल माने ने रत्नागिरी-रायगढ़-सिंधुदुर्ग निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल किया है. हालांकि, ठाकरे की पार्टी ने नासिक सीट के लिए अपना कोई भी उम्मीदवार चुनावी मैदान में नहीं उतारने का फैसला किया है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी का कार्यालय फिलहाल सभी नामांकनों की अंतिम सूची तैयार कर रहा है.
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