तमिलनाडु के TASMAC ग्रुप पर ED की रेड, जांच में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा!

6 मार्च 2025 को तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (TASMAC) से जुड़े कई स्थानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई. ED ने यह जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज कई FIRs के आधार पर शुरू की थी.

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TASMAC ग्रुप पर ED की रेड (प्रतीकात्मक तस्वीर) TASMAC ग्रुप पर ED की रेड (प्रतीकात्मक तस्वीर)

दिव्येश सिंह

  • मुंबई,
  • 13 मार्च 2025,
  • अपडेटेड 8:10 PM IST

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 6 मार्च 2025 को तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (TASMAC) से जुड़े कई स्थानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई. ED ने यह जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज कई FIRs के आधार पर शुरू की थी.

ED द्वारा की गई तलाशी के दौरान TASMAC कार्यालयों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार पाया गया. इस दौरान स्थानांतरण पदस्थापना, परिवहन निविदा, बार लाइसेंस निविदा, कुछ डिस्टिलरी कंपनियों के पक्ष में इंडेंट ऑर्डर, TASMAC के अधिकारियों की संलिप्तता वाले TASMAC आउटलेट्स द्वारा प्रति बोतल 10-30 रुपये का अतिरिक्त शुल्क आदि से संबंधित आपत्तिजनक डेटा बरामद किया गया है.

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तलाशी में डिस्टिलरी कंपनियों- एसएनजे, काल्स, एकॉर्ड, एसएआईएफएल और शिवा डिस्टिलरी के साथ-साथ देवी बॉटल्स, क्रिस्टल बॉटल्स और जीएलआर होल्डिंग जैसी बॉटलिंग संस्थाओं से जुड़े बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी का पता चला, जिसमें बेहिसाब नकदी सृजन और अवैध भुगतान की एक सुनियोजित योजना का पर्दाफाश हुआ. जांच से पता चलता है कि डिस्टिलरी ने व्यवस्थित रूप से खर्चों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया और विशेष रूप से बोतल बनाने वाली कंपनियों के माध्यम से फर्जी खरीद की, ताकि 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाब नकदी निकाली जा सके. फिर इन पैसों का इस्तेमाल TASMAC से आपूर्ति के अधिक ऑर्डर हासिल करने के लिए रिश्वत के रूप में किया गया. 

बॉटलिंग कंपनियों ने बिक्री के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करके इस धोखाधड़ी वाली योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे डिस्टिलरी को अतिरिक्त भुगतान करने की अनुमति मिली, जिसे बाद में नकद में निकाल लिया गया और कमीशन काटने के बाद वापस कर दिया गया. डिस्टिलरी और बॉटलिंग कंपनियों के बीच यह मिलीभगत वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर, नकदी प्रवाह को छुपाने और व्यवस्थित चोरी के जरिए की गई. 

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ईडी अधिकारियों ने बताया कि जांच से एक ऐसे नेटवर्क की पुष्टि होती है, जिसमें जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर और फर्जी खर्चों के जरिए बेहिसाब नकदी जुटाई जाती थी और बाद में इसका इस्तेमाल भारी मुनाफा कमाने के लिए किया जाता था. इसके अलावा, TASMAC, डिस्टिलरी और बोतल बनाने वाली कंपनियों से जुड़े कर्मचारियों/सहयोगियों और TASMAC से जुड़े अवैध मामलों में अन्य प्रमुख सहयोगियों की भूमिका की जांच की जा रही है. आगे की जांच जारी है.

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