मध्‍य प्रदेश चुनाव 2018: नीमच से बीजेपी के दिलीप सिंह ने मारी बाजी

नीमच विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दिलीप सिंह परिहार और कांग्रेस के सत्‍य नारायण परिहार के बीच मुकाबला था.

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aajtak.in

  • भाेपाल ,
  • 11 दिसंबर 2018,
  • अपडेटेड 10:53 AM IST

मध्य प्रदेश में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के बाद मतगणना हो चुकी है. नीमच विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दिलीप सिंह परिहार और कांग्रेस के सत्‍य नारायण परिहार के बीच मुकाबला था. दिलीप सिंह ने सत्‍यनारायण को 14857 वोटों से हराया है.

मध्य प्रदेश में नीमच जिले में 3 विधानसभा सीटें हैं. इनमें मनासा, नीमच और जावद विधानसभा सीटें शामिल हैं. नीमच विधानसभा सीट पर अभी बीजेपी का कब्जा है.

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इस सीट पर पिछली बार हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी के दिलीप सिंह परिहार ने जीत हासिल की थी. 2008 और 2003 के चुनावों में इस सीट पर भाजपा का ही कब्जा रहा. वैसे यहां चुनावी राजनीति का इतिहास खंगाला जाए तो यह सीट ज्यादातर बीजेपी के ही कब्जे में रही है. ऐसे में मध्य प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने की चाहत रखने वाली कांग्रेस बीजेपी को चौका लगाने से रोकना चाहेगी.

2013 नीमच विधानसभा चुनाव के नतीजे

बीजेपी- दिलीप सिंह परिहार- 73,320(50.1%)

कांग्रेस- नंदकिशोर पटेल- 51,653 (35.3%)

2008 नीमच विधानसभा चुनाव के नतीजे

बीजेपी- खुमान सिंह शिवाजी- 43,580 (37.4%)   

कांग्रेस- रघुराज सिंह चौरदिया- 29,737 (25.5%)     

इस बार की वोटिंग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

निर्वाचन आयोग के मुताबिक इस बार मध्य प्रदेश में 75.05 फीसदी मतदान हुआ. जबकि 2013 में 72.07 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. इस बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 4 फीसदी बढ़कर 74.03 प्रतिशत रहा. 2013 में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 70.11 प्रतिशत रहा था.

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कितने लोगों ने किया मताधिकार का प्रयोग

निर्वाचन आयोग के मुताबिक 2013 में मध्य प्रदेश में कुल 4,66,36,788 मतदाता थे जिनमें महिला मतदाताओं की संख्या 2,20,64,402 और पुरुष मतदाताओं की संख्या 2,45,71,298 और अन्य वोटर्स 1088 थे. 2013 में 72.07 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था.

इसके पहले कैसा रहा है वोटिंग का प्रतिशत

मध्‍य प्रदेश में 1990 में स्व. सुंदरलाल पटवा के नेतृत्व में भाजपा मैदान में उतरी और 4.36 फीसदी वोट बढ़ गए. तत्कालीन कांग्रेस की सरकार को हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद 1993 में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस चुनाव में उतरी तो 6.03 प्रतिशत मतदान बढ़ा और बीजेपी की पटवा सरकार हार गई थी.

वहीं, 1998 में वोटिंग प्रतिशत 60.22 रहा था जो 1993 के बराबर ही था. उस वक्त दिग्विजय सिंह की सरकार बनी. लेकिन 2003 में उमा के नेतृत्व में भाजपा सामने आई और दिग्विजय सिंह की 10 साल की सरकार सत्ता से बाहर हो गई. उस वक्त भी 7.03 प्रतिशत वोट बढ़े थे.

पिछले तीन बार से शिवराज सूबे के मुख्‍यमंत्री

2003 में मुख्‍यमंत्री बनी उमा भारती के इस्तीफे के बाद सूबे के वरिष्ठ नेता बाबूलाल ने 23 अगस्त 2004 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. बाबूलाल गौर के 29 नवंबर 2005 को पद छोड़ने पर शिवराज ने प्रदेश की बागडोर संभाली और 2008 और 2013 का विधानसभा चुनाव भी जिताने में सफल रहे. पिछले 13 वर्षों से राज्य में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड शिवराज के नाम दर्ज है.

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