झारखंड ने केंद्रीय वित्त आयोग से मांगे 15 लाख करोड़ रुपये का अनुदान

झारखंड सरकार ने राज्य के विकास को लेकर कई मांगें वित्त आयोग के समक्ष रखी है. वहीं कई विपक्षी दलों ने झारखंड को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग की है.

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वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह और रघुवर दास वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह और रघुवर दास

धरमबीर सिन्हा / वरुण शैलेश

  • रांची,
  • 02 अगस्त 2018,
  • अपडेटेड 8:14 PM IST

झारखंड सरकार ने केंद्रीय वित्त आयोग से 150002.73 करोड़ रुपये के अनुदान की मांग की है. सरकार ने सबसे अधिक 20899.66 करोड़ रुपये शहरी विकास के लिए मांगे हैं. जबकि स्वास्थ्य संरचनाओं के लिए 10345.44 करोड़ रुपये की मांग की है. राज्य सरकार ने आपदाओं से निपटने के लिए विशेष मांग की है. इनमें झरिया में कोल माइंस की आग, हाथियों से होने वाले नुकसान और वज्रपात शामिल हैं. वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह गुरुवार को अपनी  टीम के साथ रांची में थे.

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विपक्ष की मांग- झारखंड को मिले विशेष राज्य का दर्जा

राज्य के कई राजनीतिक दलों ने वित्त आयोग से झारखंड को विशेष दर्जा देने की मांग की. हालांकि झारखंड सरकार ने इस तरह की कोई मांग नहीं की है. एनके सिंह ने भी कहा कि विशेष राज्य का दर्जा देने में आयोग सक्षम नहीं है. कांग्रेस और झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने विशेष सहायता राशि की मांग की.

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा, 'पिछड़े राज्य विकसित होंगे, तभी भारत पूरी तरह से विकसित होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए भारत का सपना भी यही है कि सारे राज्य विकसित हों.' मुख्यमंत्री ने कहा, 'आजादी की लड़ाई हो या अलग राज्य का भाइयों ने अपना खून-पसीना बहाया है. अब हमारा फर्ज है कि उनके जीवन में बदलाव आए. गांव-गांव तक अच्छी सड़क, बिजली और शुद्ध पेयजल पहुंचाने का काम तेजी से किया जा रहा है. गांव में इनके पहुंचते ही लोगों के जीवन में गुणात्मक बदलाव आ जाएगा.'

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ने कहा कि केंद्र सरकार की सात फ्लैगशिप योजनाओं को लाभार्थियों तक पहुंचाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ग्राम स्वराज अभियान के दूसरे चरण में राज्य के 6,512 गांवों तक इन योजनाओं का लाभ 15 अगस्त तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.  इसके अलावा राज्य के 1000 से ज्यादा अनुसूचित जनजाति की आबादी वाले 3,312 गांवों तक भी इन योजनाओं को पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. राज्य में 24 में से 19 जिले आकांक्षी जिलों की सूची में शामिल हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि  राज्य निर्माण के 14 वर्षों के बाद भी विधान सभा, हाईकोर्ट समेत अन्य प्रमुख भवन नहीं थे. हमारी सरकार ने इन्हें बनवाने का बीड़ा उठाया. ये 2019 तक बन कर तैयार हो जाएंगे.

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