झारखंडः भूख ने ली एक और व्यक्ति की जान, प्रशासनिक लापरवाही का मामला आया सामने

झारखंड के सिमडेमा में कुछ ही दिन पहले संतोषी नाम की एक बच्ची की मौत भी भूख की वजह से हो गई थी. आधार कार्ड न होने की वजह से संतोषी को अनाज नहीं मिल पाया था. राजेंद्र के मामले में बताया जा रहा है कि उनके पास राशन कार्ड नहीं था.

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पीड़ित परिवार पीड़ित परिवार

वरुण शैलेश / धरमबीर सिन्हा

  • रांची,
  • 27 जुलाई 2018,
  • अपडेटेड 12:28 PM IST

झारखंड में भूख से मौत का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है. इस कड़ी में एक नया मामला जुड़ गया है. रामगढ़ जिले के मांडू इलाके में राजेंद्र बिरहोर की भूख से मौत का मामला सामने आया है. राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने रामगढ़ डीसी से रिपोर्ट मांगी है.

सरयू राय ने कहा है, वह इस तर्क में नहीं पड़ना चाहते कि मौत भूख से हुई या बीमारी से. मंत्री ने बकायदा ट्वीट भी किया और कहा कि राजेंद्र बिरहोर की मौत का कारण भूख हो या बीमारी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी. चिकित्सा सुविधा ना मिलना, पोस्टमॉर्टम ना होना, राशन कार्ड ना बनना...ये प्रशासनिक लापरवाही है.

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बता दें कि मामले के खुलासे के बाद भी पोस्टमॉर्टम ना होना भी लापरवाही है. क्योंकि इससे पता चल पाता है कि मौत भूख से हुई है या बीमारी से. आदिम जनजाति का राशन कार्ड नहीं बना था तो यह बड़ी लापरवाही है. राशन कार्ड होने से आदिम जन जाति को राज्य सरकार की तरफ से हर महीने 35 किलो अनाज देने का प्रावधान है.

गौरतलब है कि रामगढ़ के मांडू प्रखंड के नावाडीह पंचायत के जरहिया टोला में गत मंगलवार को राजेंद्र बिरहोर की मौत हो गई थी. घर में अनाज का एक दाना नहीं था. वैसे सूचना के बाद स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र के घर पहुंचे, लेकिन भूख से मौत को नकार दिया. पोस्टमॉर्टम भी नहीं कराया गया. वहीं बताया जा रहा है कि अखिकारी सिर्फ पारिवारिक लाभ के तहत 10 हज़ार रुपये देकर निकल लिए.

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बता दें कि के सिमडेमा में कुछ ही दिन पहले संतोषी नाम की एक बच्ची की मौत भी भूख की वजह से हो गई थी. आधार कार्ड न होने की वजह से संतोषी को अनाज नहीं मिल पाया था. राजेंद्र के मामले में बताया जा रहा है कि उनके पास राशन कार्ड नहीं था.

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