झारखंड: शेल कंपनी मामले में हाई कोर्ट में होगी सुनवाई, राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की SLP

झारखंड सरकार ने रांची हाई कोर्ट के शेल कंपनी मामले में 3 जून के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने चुनौती दी है. सरकार शुरू से ही जनहित याचिका 727 और 4290 को मैंचेनेबल नहीं मान रही थी.

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हेमंत सोरेन (फाइल फोटो) हेमंत सोरेन (फाइल फोटो)

सत्यजीत कुमार

  • रांची,
  • 10 जून 2022,
  • अपडेटेड 7:06 PM IST
  • शेल कंपनी से जुड़े मामले में झारखंड सरकार SC पहुंची
  • हाई कोर्ट ने शुरू की थी सुनवाई

राज्य सरकार ने झारखंड़ हाई कोर्ट के द्वारा शेल कंपनी मामले और माइनिंग लीज मामला को मैंटेनेबल होने के आदेश दिए जाने को सुप्रीम कोर्ट में SLP के माध्यम से चुनौती दी है. मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होगी. 

झारखंड सरकार ने रांची हाई कोर्ट के शेल कंपनी मामले में 3 जून के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने चुनौती दी है. सरकार शुरू से ही जनहित याचिका 727 और 4290 को मैंचेनेबल नहीं मान रही थी और सुप्रीम कोर्ट गई थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर सुनवाई करने के लिए हाई कोर्ट को निर्देश दिया था. हाई कोर्ट ने 3 जून को दोनों PIL को सुनवाई योग्य मान लिया था. अब उस 3 जून के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की है. ये जानकारी महाधिवक्ता राजीव रंजन ने दी है. 

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झारखंड़ हाई कोर्ट द्वारा मैंटेनबिलिटी की बिंदु पर आदेश दिए जाने के बाद से ही यह कयास लगाया जा रहा था कि सरकार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी. इस बीच झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर कर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दे दी है. अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कब होगी और शीर्ष अदालत क्या आदेश सुनाती है ये केस मेंशन किए जाने के बाद ही पता चलेगा.

शेल कंपनी से जुडी PIL पर सुनवाई के दौरान झारखंड हाई कोर्ट ने शेल कंपनियों में इन्वेस्टमेंट की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर फैसला सुनाया था. अदालत ने जनहित याचिका को स्वीकार कर लिया है. साथ ही मेंटेनबिलिटी की बिंदु पर सरकार द्वारा दी गई दलीलों को खारिज कर दिया है.

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झारखंड़ हाई कोर्ट में तीन मामलों की सुनवाई मेरिट के आधार पर एक साथ होनी है. PIL 727- इसमें मुख्य्मंत्री रहते हुए अपने नाम माइंस आवंटित करवाने की जांच CBI /ED से करवाने की मांग याचिकाकर्ता शिव शंकर शर्मा ने की है. वहीं PIL- 4290 शेल कंपनी से जुड़ा है. इसमें सोरेन परिवार पर अकूत संपत्ति अर्जित करने और मनी लॉन्ड्रिंग करने समेत फर्जी शैल कंपनी में निवेश दिखाकर पैसे अर्जित करने का मामला है. इसमें भी याचिकाकर्ता ने ED /CBI जांच की मांग की थी. 

एक अन्य PIL 4632 अरुण कुमार दुबे द्वारा दायर की गई थी. इसमें मनरेगा में 18 करोड़ की धांधली में 15 FIR दर्ज हुई थीं. उसको CBI को ट्रांसफर करने की याचिका लगाई गई थी. हालांकि आखिर में सरकार की एडजर्नमेंट पिटीशन को कोर्ट ने मंजूर कर लिया. SV राजू ASG- एडिशनल सॉलिसिटर जनरल, GOI ने ये जानकारी दी है. 

 

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