Exclusive: नाम, पता, हुलिया बदलकर पाकिस्तान में छुपता फिर रहा पहलगाम हमले का हैंडलर, सामने आई तस्वीर

पहलगाम हमले के एक साल बाद उस खूनी साजिश का मास्टरमाइंड साजिद जट्ट बेनकाब हो गया है. आजतक की इस एक्सक्लूसिव जांच में आतंकी की पहली तस्वीर और उसके पाकिस्तान में छिपे होने के पक्के दस्तावेज सामने आए हैं. लश्कर और TRF का यह मोस्ट वांटेड आतंकी 'अज्ञात हमलावरों' के डर से पाकिस्तान में नाम, हुलिया और पहचान बदलकर छिपता फिर रहा है. जांच में पता चला है कि ISI की मदद से वह सलीम लंगड़ा और 'हबीबुल्लाह तबस्सुम' जैसी नकली पहचान के साथ सेफ हाउस में लो-प्रोफाइल जिंदगी जी रहा है.

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पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड साजिद जट्ट की पहली तस्वीर (Photo: ITG) पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड साजिद जट्ट की पहली तस्वीर (Photo: ITG)

अरविंद ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 21 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:43 PM IST

पहलगाम हमले के एक साल बाद उस पूरी साजिश का सबसे बड़ा खिलाड़ी बेनकाब हो गया है. आजतक के पास उस आतंकी की पहली तस्वीर और उसकी पूरी जानकारी है, जो पाकिस्तान में बैठकर कश्मीर में हमले करवाने की प्लानिंग करता है. इस मास्टरमाइंड का नाम साजिद जट्ट है, जो लश्कर और TRF का बड़ा आतंकी है. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि वह अब वहां साजिद बनकर नहीं, बल्कि अपनी पहचान और हुलिया बदलकर एक साये की तरह रह रहा है.

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पहलगाम हमले के एक साल बाद मास्टरमाइंड पर यह आजतक/इंडिया टुडे की सबसे बड़ी तहकीकात है. हमारी टीम ने उस आतंकी का असली घर और उसके पाकिस्तानी होने के वो सबूत ढूंढ निकाले हैं, जिन्हें उसने दुनिया से छिपा रखा था. NIA ने अपनी जांच में साजिद जट्ट उर्फ सैफुल्लाह साजिद को ही इस पूरे हमले का असली जिम्मेदार बताया है. इस पड़ताल में यह भी पता चला है कि इसका असली नाम हबीबुल्लाह तबस्सुम है. इसी ने बैरसन घाटी में मासूम लोगों पर गोलियां चलवाई थीं. इस आतंकी की दहशत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि NIA ने इस पर 10 लाख रुपये का इनाम रखा हुआ है

पहलगाम में जिस तरह बेगुनाह लोगों को मारा गया, उसका मास्टरमाइंड अब खुद अपनी जान बचाने के लिए दर-दर भाग रहा है. जांच के दौरान इसके वो आईडी कार्ड हाथ लगे हैं, जो इसके झूठ की पोल खोल देते हैं. इन कागजों से साफ पता चलता है कि कैसे यह अपनी उम्र और नाम बदलकर पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में ठिकाने बना रहा है. कसूर की गलियों से लेकर रावलपिंडी के किराए के कमरों तक, इस जांच में उसकी हर छिपने वाली जगह का पता चल गया है.

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अज्ञात हमलावरों का डर और ISI का 'सेफ हाउस' वाला खेल

यहां असली खेल ये चल रहा है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI साजिद जट्ट को एकदम साधारण आदमी बनकर रहने में मदद कर रही है. असल में साजिद और उसके आकाओं को अब उन 'अज्ञात हमलावरों' का डर सता रहा है, जो पाकिस्तान में घुसकर भारत के दुश्मनों को खत्म कर रहे हैं. इसी डर की वजह से साजिद अब किसी बड़े कमांडर की तरह नहीं, बल्कि एक बहुत ही मामूली आदमी बनकर रहता है. तस्वीरों में वह रावलपिंडी के एक साधारण घर में, पुराने कपड़ों में और एक बहुत ही पुराने की-पैड वाले मोबाइल फोन के साथ दिख रहा है ताकि किसी को उस पर शक न हो.

साजिद की असलियत बताने वाले दो अलग-अलग पहचान पत्र सामने आए हैं, जो पाकिस्तान के झूठ की पूरी पोल खोल देते हैं. पहला पहचान पत्र 26 अप्रैल 2015 को जारी हुआ था, जिसमें उसका पता कसूर जिला और जन्म की तारीख 23 मार्च 1976 दर्ज है. वहीं, दूसरा पहचान पत्र इस्लामाबाद के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले G-6 इलाके के पते पर बना है. यहां साजिद की चालाकी देखिए, इस नए कार्ड में उसने अपनी उम्र 6 साल कम करवा दी और जन्म का साल 1982 लिखवा लिया. हालांकि, इन दोनों ही कागजों ने उसका असली सच दुनिया के सामने ला दिया है कि साजिद जट्ट का असली नाम हबीबुल्लाह तबस्सुम है और उसके पिता का नाम मोहम्मद रफीक है. यही इस मास्टरमाइंड की असली पहचान है.

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खुफिया सूत्रों की मानें तो साजिद जट्ट कई सालों तक जम्मू-कश्मीर में भी आतंकी बनकर रहा है. एक मुठभेड़ के दौरान उसके पैर में गोली लगी थी, जिसके बाद से वह लंगड़ा कर चलता है. इसी वजह से पाकिस्तान में उसने अपना नाम 'सलीम लंगड़ा' रख लिया है ताकि वह एक आम लाचार आदमी जैसा दिखे. वह ISI के बड़े अफसरों के सीधे संपर्क में रहता है और वहीं से कश्मीर में नेटवर्क चलाता है.

साजिद का यह डर ऐसे ही नहीं है. साल 2022 में उसके एक बहुत करीबी साथी को पाकिस्तान में सरेआम गोलियों से मार दिया गया था. अपने साथी का हाल देखकर वह इतना घबरा गया कि उसने इस्लामाबाद का अपना छिपने का ठिकाना भी बदल दिया. उसे बहुत ही खुफिया तरीके से एक ऐसी जगह भेजा गया है जिसके बारे में किसी को खबर न हो.

कश्मीर में हुए दर्जनों हमलों के पीछे इसी 'सलीम लंगड़ा' का दिमाग रहा है. वह रावलपिंडी और इस्लामाबाद के सुरक्षित कमरों में बैठकर नई-नई साजिशें रचता है. लेकिन इस बड़ी जांच ने उसके चेहरे से नकाब हटा दिया है. साजिद भले ही अपना हुलिया बदल ले या नाम हबीबुल्लाह रख ले, लेकिन पहलगाम के गुनहगार की फाइल अब पूरी तरह खुल चुकी है. फिलहाल, वह अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि उसे पता है कि अब उसकी बारी आ सकती है.

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