जम्मू-कश्मीर: हाईकोर्ट ने फिर खोली नदीमार्ग नरसंहार की फाइल, 24 कश्मीरी पंडितों की हत्या का ट्रायल होगा शुरू

23 मार्च 2003 को जब ये नरसंहार हुआ था तब भारत और पाकिस्तान के बीच एक रोजा क्रिकेट मैच चल रहा था. रात के अंधेरे में गांव में घुसे आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी. जिसमें 24 लोगों की मौत हो गई थी. वहीं जो लोग बचे, वह गांव छोड़कर भाग गए थे.

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अशरफ वानी

  • श्रीनगर,
  • 27 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 12:11 PM IST

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कश्मीर के नदी मार्ग में 23 मार्च 2003 को हुए नरसंहार का केस दोबारा खोल दिया है. अब इस मामले में 15 सितंबर को सुनवाई होगी. दरअसल, सेना के भेष में आए आतंकवादियों ने 24 निर्दोष कश्मीरी पंडितों की हत्या कर दी थी. मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई थी. वहीं गवाहों के कश्मीर छोड़ देने के चलते मामले का ट्रायल रुक गया था. अब इसे फिर से खोलने के आदेश हाईकोर्ट ने दिए हैं. 

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बता दें कि 23 मार्च 2003 को जब ये नरसंहार हुआ था तब भारत और पाकिस्तान के बीच एक रोजा क्रिकेट मैच चल रहा था. पूरा देश क्रिकेट मैच देख रहा था. तभी आतंकी रात के अंधेरे में गांव में घुस आए और अंधाधुंध सभी लोगों पर गोलीबारी की थी. आतंकवादियों ने घरों में घुस घुसकर बच्चे, महिलाएं, बुजुर्गों, सभी को अपना निशाना बनाया था. हालांकि कुछ लोग इस आतंकी हमले में बच गए थे, जो उसी दिन शाम को यहां से पलायन करके जम्मू और देश के दूसरी स्थानों पर भाग गए थे. 

पुलिस जांच में आतंकी हमले का हुआ था खुलासा

24 मार्च 2003 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी. वर्षों बाद मामले की जांच में यह बात सामने आई थी कि विदेशी आतंकियों का इस कत्लेआम में हाथ था. हालांकि गवाहों के नहीं मिलने से कारण 2011 में केस की फाइल बंद कर दी गई थी. अब आजतक की टीम इस मामले को लेकर शोपियां जिले के नदीमार्ग पहुंची तो वहां तबाही के निशानों के सिवा कुछ नहीं मिला. अब इस गांव में कश्मीरी पंडितों का कोई भी परिवार नहीं रहता है. कभी यह मोहल्ला कश्मीरी पंडितों के ही नाम से जाना जाता था, लेकिन उस नरसंहार के बाद अब न तो गांव के मंदिर में घंटी बजती है और ना ही घरों में कोई चीज नजर आ रही है. 

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