चिनाब ब्रिज का डिजाइन कई बार बदला, एफिल टावर से तीन गुना ज्यादा मेटल का यूज... सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा इंजीनियरिंग का जादू

चिनाब ब्रिज को बहुत ही मज़बूती से तैयार किया गया है, अगर इसके 14 में से कोई एक पिलर भी गिर जाए, तब भी पुल खड़ा रहेगा. कंपनी का दावा है कि यह पुल 40 किलोग्राम टीएनटी विस्फोट को भी झेल सकता है. इतना ही नहीं, अगर पुल को किसी आपदा में आंशिक नुकसान भी हो, तो भी ट्रेनों का आवागमन कम गति से जारी रह सकता है.

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चिनाब रेल ब्रिज में एफिल टावर से तीन गुना ज्यादा मेटल लगी है (फोटो- पीटीआई) चिनाब रेल ब्रिज में एफिल टावर से तीन गुना ज्यादा मेटल लगी है (फोटो- पीटीआई)

बिदिशा साहा

  • नई दिल्ली,
  • 07 जून 2025,
  • अपडेटेड 3:40 AM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज और देश के पहले केबल-स्टे अंजी ब्रिज का उद्घाटन कर दिया है. ये पुल जम्‍मू-कश्‍मीर के रियासी जिले में बना है और उधमपुर-श्रीनगर के बीच रेल लिंक (USBRL) प्रोजेक्‍ट का हिस्‍सा है. बता दें कि चिनाब रेल ब्रिज दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च पुल है, जिसकी निर्माण यात्रा अब सैटेलाइट तस्वीरों के ज़रिए दुनिया के सामने आ गई है. इन तस्वीरों में लगभग एक दशक की मेहनत और इंजीनियरिंग के अद्भुत नमूने को देखा जा सकता है.

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2017 की शुरुआती सैटेलाइट तस्वीरों में धरोट में चिनाब नदी के दोनों ओर स्थित पहाड़ियों पर संरचनाएं दिखाई दी थीं, जो पुल के निर्माण की शुरुआत को दर्शाती हैं. 2022 तक 1,315 मीटर लंबा स्टील आर्च लगभग पूरा हो चुका था, बस एक छोटा हिस्सा जोड़ना बाकी था. फरवरी 2025 की ताज़ा तस्वीर में पुल पूरी तरह से तैयार दिखाई दे रहा है, यह पुल 25,000 टन धातु से बना है, जो एफिल टावर में लगी धातु से तीन गुना ज़्यादा है.

 

 

चिनाब ब्रिज जम्मू-कश्मीर के उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (USBRL) परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके बन जाने से अब कश्मीर घाटी भारत के बाकी हिस्सों से रेल मार्ग से सीधे जुड़ गई है. हालांकि, इसे हिमालय की जियोलॉजिकल रूप से अस्थिर पहाड़ियों में बनाना एक बहुत बड़ी चुनौती थी. ये इलाका भूकंप संभावित क्षेत्र में आता है, इसलिए निर्माण से पहले भारतीय रेलवे को कई जियोलॉजिकल और स्ट्रक्चरल स्टडी करनी पड़ी. पुल के डिज़ाइन को कई बार बदला गया, ताकि यह 266 किमी/घंटा तक की तेज़ हवाओं को सह सके.

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यह पुल एफ़कॉन्स इन्फ्रास्ट्रक्चर द्वारा बनाया गया है, जो शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप का हिस्सा है. इसे बहुत ही मज़बूती से तैयार किया गया है, अगर इसके 14 में से कोई एक पिलर भी गिर जाए, तब भी पुल खड़ा रहेगा. कंपनी का दावा है कि यह पुल 40 किलोग्राम टीएनटी विस्फोट को भी झेल सकता है. इतना ही नहीं, अगर पुल को किसी आपदा में आंशिक नुकसान भी हो, तो भी ट्रेनों का आवागमन कम गति से जारी रह सकता है.

IIT रुड़की ने चिनाब पुल के लिए भूकंप प्रतिक्रिया मॉडलिंग का आयोजन किया था, जिससे यह सुनिश्चित किया गया कि यह पुल 2001 के गुजरात भूकंप जैसी तीव्रता (रिक्टर स्केल पर 7.7) को भी झेल सके. इस अद्वितीय निर्माण में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक थी दुर्गम पहाड़ी इलाके में स्थित स्थल तक भारी निर्माण उपकरण और सामग्री पहुंचाना. ऊंचे पहाड़ों और सीमित सड़कों वाले इस दूरस्थ क्षेत्र में काम करना इंजीनियरों और श्रमिकों के लिए एक बड़ा काम था. इसके बावजूद परियोजना टीम ने हर कठिनाई को पार करते हुए इस पुल को भारत की इंजीनियरिंग का एक शानदार उदाहरण बना दिया है.

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