हिमाचल प्रदेश: खेती, किसानी नहीं बन पाया है चुनावी मुद्दा

हिमाचल प्रदेश एक पर्वतीय प्रदेश है और यहां खेती करना काफी कठिन कार्य है. 80 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र असिंचित हैं जहां खेती बारिश पर निर्भर है. इसके अलावा भी किसानों को जंगली जानवरों के हमले के खतरों से निपटना पड़ता है. प्रदेश विधानसभा चुनाव में खेती का मुद्दा प्रमुख विषय के रूप में नहीं उभर रहा है.

Advertisement
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह

केशवानंद धर दुबे / BHASHA

  • शिमला,
  • 04 अक्टूबर 2017,
  • अपडेटेड 1:54 PM IST

पर्वतीय क्षेत्र हिमाचल प्रदेश में खेती करना दुरूह और घाटे का सौदा होने के बावजूद खेती, किसानी आसन्न विधानसभा चुनाव में मुद्दा नहीं बन पाया है. प्रदेश के किसानों के समक्ष सिंचाई सुविधा की कमी, पशुओं के लिये चारा जुटाना और जानवरों के हमले प्रमुख समस्या बनी हुई है.

बता दें कि हिमाचल प्रदेश एक पर्वतीय प्रदेश है और यहां खेती करना काफी कठिन कार्य है. 80 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र असिंचित हैं जहां खेती बारिश पर निर्भर है. इसके अलावा भी किसानों को जंगली जानवरों के हमले के खतरों से निपटना पड़ता है. प्रदेश विधानसभा चुनाव में खेती का मुद्दा प्रमुख विषय के रूप में नहीं उभर रहा है.

Advertisement

हालांकि भाजपा ने किसान मोर्चा को मजबूत बनाने के लिए सीटों के हिसाब से कैम्प बनाए हैं. साथ ही कैम्प प्रभारियों के माध्यम से किसान फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना समेत केंद्र सरकार के किसानोन्मुखी कार्यक्रमों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और कृषि क्षेत्र में प्रदेश सरकार की नाकामियों को उजागर करने पर जोर दिया है. दूसरी ओर, कांग्रेस छोटी-छोटी सभाओं के माध्यम से प्रदेश में किसानों के कल्याण के लिए अपनी सरकार के कार्यो को रेखांकित कर रही है.

सूख रहे पानी के स्रोत

सोलन के शाधयाल गांव के किसान चेतराम शर्मा ने बताया कि खेती करना अब केवल घाटे का सौदा नहीं रहा बल्कि यह कठिन हो गया है. पहाड़ों पर पानी के स्रोत सूख रहे हैं और सिंचाई का कोई वैकल्पिक साधन नहीं है. खेती बारिश पर निर्भर रह गई है.

जंगली जानवरों पर खतरा

Advertisement
शोघी गांव के मनोज सूद ने बताया कि सिंचाई के साधन की कमी के साथ हमें जंगली जानवरों के हमलों का लगातार खतरा रहता है. सरकार ने इस बारे में कुछ योजनाएं बनाई है लेकिन इसमें इतनी समस्या है कि हम दफ्तरों के चक्कर लगा कर कुछ दिनों बाद घर में बैठ जाते हैं.

खेती के अलावा पशुपालन भी कठिन

शोघी गांव के ही दिनेश शर्मा ने बताया कि खेती के अलावा पशुपालन भी कठिन हो गया है. बारिश ठीक से नहीं हो पाती है. इसके कारण पशुओं के लिए चारा जुटाना समस्या बन गया है. दूसरी ओर, प्रदेश के कृषि मंत्री सुजान सिंह पठानिया ने  दावा किया कि कांग्रेस की प्रदेश सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए कई कार्य किए हैं और इसका असर जमीन पर दिख रहा है. जंगली जानवरों के हमलों से निपटने के लिए बाड़ लगाने के वास्ते 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है. हमारी कर रही है. समस्या यह है कि पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण पानी के सही स्रोत नहीं हैं.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »