हिमाचल में एंट्री फीस ढाई गुना तक बढ़ी, शिमला पहुंचने के लिए देना होगा एक्स्ट्रा पैसा 

हिमाचल प्रदेश सरकार ने बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों की एंट्री फीस में भारी बढ़ोतरी की है. नई दरें एक अप्रैल से लागू होंगी. सामान्य वाहनों का शुल्क 70 से बढ़ाकर 170 रुपये किया गया है, जबकि हैवी और निर्माण वाहनों पर भी दरें बढ़ाई गई हैं. राज्य में 55 एंट्री बैरियरों पर नई नीति लागू होगी, फास्टैग सिस्टम भी जोड़ा जाएगा.

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शिमला जाने में अब ज्यादा टोल देना होगा. (File Photo: PTI) शिमला जाने में अब ज्यादा टोल देना होगा. (File Photo: PTI)

कमलजीत संधू

  • शिमला ,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:58 AM IST

आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश में सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों के वाहनों पर एंट्री फीस में भारी बढ़ोतरी का निर्णय लिया है. नई दरें एक अप्रैल से लागू होंगी.

सरकार ने प्रदेश की नई बैरियर नीति जारी करते हुए एंट्री टैक्स में करीब ढाई गुना तक इजाफा किया है. इसका सीधा असर उन पर्यटकों और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ेगा जो अपनी गाड़ियों या वाणिज्यिक वाहनों के साथ हिमाचल में प्रवेश करते हैं. हालांकि, हिमाचल पंजीकरण वाले वाहनों को पहले की तरह एंट्री टैक्स से छूट रहेगी.

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कितनी बढ़ी एंट्री फीस?

नई दरों के मुताबिक, बाहरी राज्यों से आने वाले सामान्य वाहनों को अब 170 रुपये एंट्री फीस देनी होगी. पहले यह राशि 70 रुपये थी. यानी करीब ढाई गुना बढ़ोतरी. 12+1 सवारी क्षमता वाले वाहनों से पहले 110 रुपये लिए जाते थे, अब उनसे भी 170 रुपये वसूले जाएंगे. हैवी वाहनों पर भी बोझ बढ़ाया गया है. पहले जहां 720 रुपये एंट्री टैक्स लिया जाता था, अब 900 रुपये देने होंगे. निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली मशीनरी जैसे जेसीबी और अन्य भारी उपकरण वाहनों पर पहले 570 रुपये शुल्क था, जिसे बढ़ाकर 800 रुपये कर दिया गया है. ट्रैक्टरों का प्रवेश शुल्क 70 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है. डबल एक्सल बस और ट्रक के लिए 570 रुपये की दर यथावत रखी गई है. इस श्रेणी में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सरकार का तर्क है कि विभिन्न श्रेणियों के वाहनों की प्रकृति और उपयोग के आधार पर दरें तय की गई हैं.

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55 एंट्री बैरियर पर लागू होंगी नई दरें

प्रदेश में कुल 55 एंट्री बैरियर हैं, जहां से बाहरी राज्यों के वाहन हिमाचल में प्रवेश करते हैं. प्रमुख बैरियर सिरमौर के गोविंदघाट, नूरपुर के कंडवाल, ऊना के मैहतपुर, बद्दी, परवाणू और बिलासपुर जिले के गरामोड़ा के पास स्थित हैं. इन सभी बैरियरों पर एक अप्रैल से नई दरें लागू हो जाएंगी. सरकार ने इन बैरियरों पर फास्टैग सिस्टम लागू करने की भी तैयारी शुरू कर दी है, ताकि शुल्क वसूली में पारदर्शिता और गति लाई जा सके. बैरियरों की नीलामी के लिए उपायुक्त (डीसी) की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है, जिसमें आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारी भी सदस्य होंगे. यह समिति ठेका प्रक्रिया की निगरानी करेगी.

हिमाचल प्रदेश इस समय गंभीर वित्तीय दबाव से गुजर रहा है. राजस्व संग्रह में गिरावट और बढ़ते खर्चों के कारण सरकार पर संसाधन जुटाने का दबाव बढ़ा है. वेतन, पेंशन और विकास परियोजनाओं के लिए धन की जरूरत को देखते हुए सरकार लगातार आय बढ़ाने के विकल्प तलाश रही थी. राज्य सरकार का मानना है कि एंट्री टैक्स में संशोधन से अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, जिससे वित्तीय संतुलन बनाने में मदद मिलेगी. पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े वाहनों की संख्या को देखते हुए यह कदम आय का स्थिर स्रोत बन सकता है.

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पर्यटन पर असर

हिमाचल प्रदेश देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है. हर साल लाखों सैलानी अपनी निजी गाड़ियों से यहां पहुंचते हैं. ऐसे में एंट्री फीस बढ़ने का सीधा असर पर्यटन क्षेत्र पर पड़ सकता है. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि 170 रुपये की राशि बहुत बड़ी नहीं मानी जा रही, लेकिन लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों और अन्य खर्चों के बीच यह अतिरिक्त बोझ जरूर है. पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का मानना है कि सरकार को संतुलन बनाकर फैसले लेने चाहिए. उनका कहना है कि यदि पर्यटकों पर अधिक वित्तीय दबाव डाला गया तो पड़ोसी राज्यों की ओर रुख बढ़ सकता है. हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि इस बढ़ोतरी का पर्यटन पर कितना प्रभाव पड़ेगा. 

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