'हैलो सर, मैं कस्टमर सपोर्ट से बोल रहा हूं...' फोन के दूसरी तरफ बैठा शख्स यही कहता था. आवाज में भरोसा होता था, बातों में प्रोफेशनलिज्म. सामने वाला अमेरिकी नागरिक समझता था कि वह किसी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी के ग्राहक सेवा अधिकारी से बात कर रहा है. लेकिन असलियत कुछ और थी. यह पूरा खेल हरियाणा के पंचकूला से संचालित हो रहा था.
एजेंसी के अनुसार, हरियाणा पुलिस ने पंचकूला के सेक्टर-2 में चल रहे एक फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है. इस कार्रवाई में 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें चार लोग पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड बताए जा रहे हैं.
पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी एक स्पेशल सॉफ्टवेयर के जरिए विदेशी ग्राहकों की कॉल लेते थे. इसके बाद खुद को एक नामी ई-कॉमर्स कंपनी का कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव बताकर बातचीत शुरू करते थे.
बातों-बातों में वे पीड़ितों से उनकी निजी जानकारी हासिल कर लेते थे. फिर उन्हें रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए कहते थे. जैसे ही सामने वाला व्यक्ति ऐसा करता, उसके कंप्यूटर तक ठगों की पहुंच बन जाती थी.
यह भी पढ़ें: बेंगलुरु में फर्जी कॉल सेंटर्स का भंडाफोड़, अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले साइबर गैंग का पर्दाफाश
इसी के बाद ठगी का खेल शुरू हो जाता था. लोगों को तरह-तरह के बहाने बनाकर गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए कहा जाता था. बाद में इन्हीं गिफ्ट कार्डों को कैश में बदलकर मोटी कमाई की जाती थी. यहां साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, हरियाणा साइबर टीम और स्थानीय पुलिस ने छापेमारी की तो भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कैश बरामद हुआ.
बरामद सामान में 19 कंप्यूटर सिस्टम, तीन लैपटॉप, 16 हेडसेट, दो पीओएस मशीनें, तीन वॉकी-टॉकी सेट, दो वाई-फाई राउटर और एक करेंसी काउंटिंग मशीन शामिल हैं.
इसके अलावा पुलिस ने 11.30 लाख रुपये कैश, एक हार्डवेयर क्रिप्टो वॉलेट, नकली विदेशी मुद्रा, सोने के जेवरात, डायमंड स्टड, चेन और ब्रेसलेट भी जब्त किए हैं.
पैसा कहां जाता था?
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठगी से कमाए गए पैसे को हवाला नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए अलग-अलग राज्यों और संभवतः विदेशों तक पहुंचाया जा रहा था.
पुलिस ने जिन चार लोगों को मुख्य आरोपी बताया है, उनमें कोलकाता का राजा सिद्दीकी, पंजाब का अक्षय उर्फ टिक्कू, दिल्ली का नवदीप बेदी उर्फ राज बेदी और हरियाणा का अंकुर कपूर शामिल हैं. चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है.
बाकी कर्मचारियों का क्या हुआ?
गिरफ्तार किए गए अन्य 17 लोगों में पांच महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं. ये सभी कॉल सेंटर में कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर काम कर रहे थे. पुलिस के मुताबिक उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया है. डीसीपी (क्राइम एंड ट्रैफिक) अमरिंदर सिंह का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ में कई अहम सुराग मिले हैं.
इन सुरागों के आधार पर दूसरे राज्यों में भी छापेमारी की तैयारी की जा रही है. पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क जितना दिखाई दे रहा है, उससे कहीं बड़ा हो सकता है. आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है.
aajtak.in