हरियाणा के रोहतक में रहने वाला एक साधारण-सा परिवार आज ब्रिटेन की राजनीति का चमकता सितारा बन गया है. 2013 में बेहतर भविष्य की तलाश में UK गए सुनील दहिया के परिवार के लिए यह दोहरी खुशी का मौका है. उनके 23 वर्षीय बेटे तुषार कुमार को एल्स्ट्री और बोरहमवुड टाउन काउंसिल का मेयर चुना गया है, जबकि उनकी पत्नी परवीन रानी को हर्ट्समेयर बरो काउंसिल की पहली भारतीय मूल की मेयर बनने का गौरव प्राप्त हुआ है.
तुषार के पिता सुनील दहिया ने रविवार को एक न्यूज एजेंसी को फोन कॉल पर बताया कि जहां तुषार को 13 मई को मेयर चुना गया, वहीं परवीन 20 मई को मेयर बनीं. यह परिवार हरियाणा के सोनीपत स्थित गांव रोहना का रहने वाला है. 2013 में UK जाने से पहले लंबे समय तक रोहतक में रहा था.
'तब तुषार सिर्फ 10 साल का था'
कारोबारी सुनील दहिया ने बताया कि जब वह अपनी पत्नी परवीन और दो बच्चों के साथ 2013 में UK गए थे, तो उनके मन में कोई खास प्लानिंग नहीं थी... तब तुषार सिर्फ 10 साल का था."
उन्होंने कहा, "आज यह बहुत गर्व की बात है कि भारतीय मूल के एक ही परिवार की मां और बेटे, दोनों एक ही समय पर मेयर बने हैं."
20 की उम्र में पार्षद बन गए थे तुषार
तुषार 2025 में डिप्टी मेयर बने थे. उन्होंने लंदन के किंग्स कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है. जब वे 20 साल की उम्र में काउंसलर (पार्षद) बने थे, तब वे कॉलेज में अंडरग्रेजुएट के दूसरे साल के छात्र थे और पॉलिटिक्स में BSc कर रहे थे. वे इस साल सितंबर में अपनी मास्टर्स की डिग्री भी शुरू करेंगे.
पिता ने बताया, "मेरा छोटा बेटा भी किंग्स कॉलेज से ही अपनी डिग्री कर रहा है. वह किंग्स कॉलेज स्टूडेंट्स यूनियन में ट्रस्टी भी है..."
पहला चुनाव 2023 में लड़ा
तुषार और उनकी मां ने 2023 में पहली बार चुनाव लड़ा था और वे काउंसलर चुने गए थे. मेयर बनने से पहले परवीन 'स्ट्रीटसीन, पार्क, लेजर और कल्चर' की कैबिनेट सदस्य, हर्ट्समीयर की डिप्टी मेयर और 'फिल्म और टेलीविजन' की ग्लोबल एनवॉय के तौर पर भी काम कर चुकी हैं.
दहिया ने बताया कि तुषार और उनकी मां को हमेशा से ही समाज की मदद करना और समाज सेवा करना पसंद रहा है. तुषार बहुत ज्यादा समाज सेवा किया करता था.
मुफ्त में हिंदी सिखाते हैं मां-बेटे
तुषार ने हाल ही में एल्स्ट्री और बोरहमवुड के मेयर का पद संभाला है. लेबर पार्टी के इस काउंसलर ने 2023 में एल्स्ट्री और बोरहमवुड टाउन काउंसिल में शामिल हुए थे और इससे पहले वे डिप्टी मेयर के पद पर काम कर चुके हैं.
पिता ने बताया, "तुषार और उनकी मां UK में पैदा हुए और पले-बढ़े लोगों को मुफ्त में हिंदी भी सिखाते थे. तुषार एक चैरिटी संस्था हिंदी शिक्षा परिषद से भी जुड़े हुए हैं."
आज भी हरियाणा में बसी है जान
तुषार के पिता सुनील दहिया ने बताया कि उनका परिवार आज भी हरियाणा में अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है और रोहतक में उनका एक घर भी है, जहां परिवार के कुछ अन्य सदस्य रहते हैं. हम हमेशा अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं. हम हर साल अपने गृह नगर जाते हैं.
तुषार का मानना है कि सार्वजनिक और समाज सेवा में आने के लिए उम्र कभी भी कोई बाधा नहीं होनी चाहिए. युवाओं के लिए उनका संदेश है कि वे किसी खास उम्र का इंतजार किए बिना ही सार्वजनिक या समाज सेवा के क्षेत्र में कदम रख सकते हैं. उनके पिता ने बताया कि उनका पक्का मानना है कि इंसान को अपनी संस्कृति और विरासत से जुड़ा रहना चाहिए.
तुषार को आगे बढ़ने के मौके वॉलंटियरिंग और कम्युनिटी के कामों से मिले. दहिया ने बताया कि जहां एक तरफ तुषार को अपनी भारतीय विरासत पर बहुत गर्व है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें उस शानदार और अलग-अलग संस्कृतियों वाले ब्रिटिश शहर पर भी उतना ही गर्व है, जिसकी वे सेवा करते हैं और जो कई संस्कृतियों का संगम है.
aajtak.in