न पैसे थे, न रिश्तेदार आए... लाचार पत्नी को झोपड़ी के बाहर करना पड़ा अंतिम संस्कार

वडोदरा के वाघोड़िया रोड इलाके में गरीबी और बेबसी की दर्दनाक तस्वीर सामने आई. जहां कबाड़ बीनकर गुजारा करने वाले महेश राठौड़िया की मौत के बाद उनकी पत्नी जशोदाबेन के पास अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे. वहीं रिश्तेदारों के नहीं पहुंचने और शव से बदबू आने पर महिला ने झोपड़ी के बाहर ही शव को जला दिया.

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लाचार पत्नी ने घर के बाहर किया पति का अंतिम संस्कार. (Photo: Screengrabs) लाचार पत्नी ने घर के बाहर किया पति का अंतिम संस्कार. (Photo: Screengrabs)

ब्रिजेश दोशी

  • वडोदरा,
  • 27 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:56 AM IST

गुजरात के वडोदरा से इंसानियत को झकझोर देने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है. शहर के वाघोड़िया रोड इलाके में गरीबी और लाचारी के चलते एक महिला ने अपने पति का अंतिम संस्कार श्मशान घाट के बजाय झोपड़ी के बाहर ही कर दिया. घटना सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी.

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जानकारी के अनुसार महेश राठौड़िया और उनकी पत्नी जशोदाबेन पिछले करीब दो वर्षों से वाघोड़िया रोड स्थित डी-मार्ट के पीछे सरकारी जमीन पर बनी एक झोपड़ी में रह रहे थे. दोनों कबाड़ इकट्ठा कर उसे बेचकर अपना गुजारा करते थे. बताया जा रहा है कि अचानक महेश राठौड़िया की मौत हो गई. पति की मौत के बाद जशोदाबेन ने रिश्तेदारों को सूचना दी और अंतिम संस्कार के लिए उनके आने का इंतजार करती रहीं.

महिला के मुताबिक देर रात तक कोई रिश्तेदार मौके पर नहीं पहुंचा. इस दौरान शव से बदबू आने लगी और कीड़े पड़ने लगे. अकेलेपन और डर के कारण जशोदाबेन ने बिना किसी सलाह के झोपड़ी के सामने ही पति के शव को आग लगा दी. कुछ देर बाद मृतक की मां लक्ष्मीबेन, भतीजी विद्या और अन्य रिश्तेदार मौके पर पहुंचे तो उन्होंने महेश का अधजला शव देखा. यह दृश्य देखकर परिवार के लोग फूट-फूटकर रोने लगे और पूरा माहौल गमगीन हो गया.

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परिवार से अलग रह रहे थे पति-पत्नी
घटना की जानकारी मिलने पर पाणिगेट पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची. पुलिस ने आवश्यक जांच-पड़ताल कर शव को कब्जे में लिया और बाद में परिजनों की मौजूदगी में गजरावाड़ी रामनाथ श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कराया. पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. पुलिस जांच में सामने आया है कि महेश राठौड़िया मूल रूप से डभोई तालुका के बहरामपुरा गांव के रहने वाले थे. 

कई साल पहले उनका विवाह जशोदाबेन से हुआ था और दोनों लंबे समय से परिवार से अलग रह रहे थे. पूछताछ के दौरान जशोदाबेन ने अपनी मजबूरी बयां करते हुए कहा कि पति की मौत के बाद उनके पास अंतिम संस्कार के लिए एक रुपया तक नहीं था. उन्होंने कहा, “हमारे पास कोई सहारा नहीं था. मदद करने वाला भी कोई नहीं था. मजबूरी में मुझे यह कदम उठाना पड़ा.”
 

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