प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल से गुजरात की कल्पसर परियोजना को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा है. रविवार को नीदरलैंड्स की अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने डच समकक्ष रॉब जेटेन के साथ विश्व प्रसिद्ध बांध 'अफस्लुइटडिज्क' का दौरा किया. उन्होंने इस बांध में इस्तेमाल की गई तकनीक को शानदार बताया. 'अफस्लुइटडिज्क' और गुजरात की 'कल्पसर योजना' में कई समानताएं बताई जा रही हैं.
कल्पसर योजना के लिए तकनीकी सहयोग के लिए प्रधानमंत्री की उपस्थिति में भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के अवसंरचना एवं जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (एलओआई) पर हस्ताक्षर किए गए. इससे योजना के कार्यान्वयन में और तेजी आएगी.
गुजरात, जो लंबे समय से अनियमित सालों और सूखे जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है, उसे सरदार सरोवर बांध के निर्माण से राहत मिली है, लेकिन लंबे समय तक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसी एक परियोजना पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है.
इसी कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खंभात की खाड़ी में कल्पसर परियोजना की परिकल्पना की. हालांकि यह परियोजना तकनीकी रूप से बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण है.
कल्पसर योजना क्या है?
कल्पसर परियोजना खंभात की खाड़ी में एक विशाल बांध बनाने और समुद्र में गिरने वाली सात नदियों के जल का दोहन करने की योजना है. इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य खंभात की खाड़ी पर एक विशाल मीठे पानी का जलाशय बनाना है. इसके साथ ही, इसमें ज्वारीय ऊर्जा उत्पादन, सिंचाई और परिवहन अवसंरचना का एकीकृत विकास भी शामिल है.
साल 2004 में, तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल्पसर बांध की रूपरेखा निर्धारित करने के लिए भावनगर में एक ऐतिहासिक समुद्री सर्वेक्षण का शुभारंभ किया था. हालांकि इस परियोजना की जटिलता के कारण इसके कार्यान्वयन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
सरकार इन कठिनाइयों को दूर करने के लिए लगातार कोशिश कर रही है. हाल ही में 30 मार्च 2026 को गांधीनगर में नीदरलैंड की राजदूत मारिसा गेरहार्ड्स के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कल्पसर परियोजना के संबंध में महत्वपूर्ण चर्चा की.
इस दौरान एक 'भारत-नीदरलैंड' विशेषज्ञ समूह के गठन और वैश्विक अंतर-पार (जी2जी) साझेदारी पर भी विचार किया गया.
कल्पसर योजना से क्या होगा फायदा?
कल्पसर योजना के लागू होने के बाद, सौराष्ट्र के 9 जिलों के 42 तालुकों में लगभग 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलेगा. इस योजना के माध्यम से दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र के बीच की दूरी 240 किलोमीटर से घटकर लगभग 60 किलोमीटर रह जाएगी.
इतना ही नहीं, इस योजना से नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के रूप में लगभग 1500 मेगावाट पवन ऊर्जा और 1000 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन भी होगा. इसके साथ ही, पर्यटन और मत्स्य पालन के विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा.
कल्पसर परियोजना को लागू करने के लिए समय-समय पर विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट तैयार की गई हैं. समुद्री क्षेत्र में लंबे अनुभव वाली नीदरलैंड की विश्व-प्रसिद्ध संस्था रॉयल हास्कोनिंग ने कल्पसर परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में सबसे महत्वपूर्ण 'समापन पद्धति' में बहुत अहम कार्य किया है.
'अफस्लुइटडिज्क' क्या है?
'अफस्लुइटडिज्क' नीदरलैंड ही नहीं बल्कि विश्व की सबसे प्रसिद्ध इंजीनियरिंग परियोजनाओं में से एक है. इसे जल प्रबंधन के क्षेत्र में विश्व के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है. इसका निर्माण लगभग 80 साल पहले हुआ था. 32 किलोमीटर लंबा यह बांध उत्तरी सागर को एक मीठे पानी की झील से अलग करता है.
यह नीदरलैंड के निचले इलाकों को भीषण बाढ़ से बचाता है, जिससे यह बाढ़ नियंत्रण में एक वैश्विक मानक बन गया है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह समुद्र के खारे पानी को रोककर अपने भीतर मीठे पानी का एक विशाल जलाशय बनाता है. अफस्लुइटडिज्क परियोजना में मीठे पानी का भंडारण, जहाजरानी, परिवहन संपर्क और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन शामिल हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा दूरदर्शिता और बड़े लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ने के लिए जाने जाते हैं. गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कल्पसर योजना का सपना देखा था.
राज्य को जल संकट से बाहर निकालने और उसे जल समृद्ध बनाने के संकल्प के साथ उन्होंने सरदार सरोवर जैसी भव्य परियोजना को साकार किया. दशकों से राजनीतिक और पर्यावरणीय बाधाओं का सामना कर रही सरदार सरोवर योजना को साकार करने के लिए उन्होंने दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प का परिचय दिया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल्पसर योजना को लेकर शुरू से ही आशावादी रहे हैं. कई बाधाओं के बावजूद, उन्होंने इस परियोजना को साकार करने का सपना जीवित रखा है.
जटिल इंजीनियरिंग और तकनीकी चुनौतियों के कारण परियोजना में देर जरूर हुई, लेकिन नीदरलैंड की वर्तमान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री का 'अफस्लुइटडिज्क' का दौरा और कल्पसर योजना के लिए भारत और नीदरलैंड के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर प्रधानमंत्री की इस परियोजना के प्रति गंभीरता और प्रतिबद्धता के स्पष्ट संकेत हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, यह दौरा जल प्रबंधन, जलवायु अनुकूलन और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में मिलकर काम करने के लिए दोनों देशों की संयुक्त प्रतिबद्धता को दर्शाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा और कल्पसर परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर ने गुजरात के लिए सुनहरे अवसरों के नए दरवाजे खोल दिए हैं.
साथ ही नीदरलैंड अपने विश्व प्रसिद्ध 'अफस्लुइटडिज्क' परियोजना से प्राप्त 90 सालों से अधिक के अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ भारत को देगा.
यह सहयोग 29 मार्च 2022 को भारत और नीदरलैंड के बीच हुए ‘इंडो-डच स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप ऑन वॉटर’ समझौते पर आधारित है. नीदरलैंड के पास समुद्र में बांध बनाने की उच्च स्तरीय तकनीकी विशेषज्ञता है और अब गुजरात को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने वाला है, जो राज्य की कल्पसर योजना को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी.
ब्रिजेश दोशी