गुजरात कांग्रेस में भूचाल, इंद्रनील के समर्थन में 17 कांग्रेसी कॉर्पोरेटरों का इस्तीफा

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को कड़ी चुनौती देने वाले इंद्रनील राजगुरु के इस्तीफे के बाद मंगलवार को उनके समर्थन में राजकोट के 17 कॉर्पोरेटर ने भी अपना इस्तीफा पार्टी नेतृत्व को भेज दिया है.

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इंद्रनील राजगुरु इंद्रनील राजगुरु

राम कृष्ण / गोपी घांघर

  • राजकोट,
  • 26 जून 2018,
  • अपडेटेड 5:24 PM IST

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले इंद्रनील राजगुरु के इस्तीफे के बाद प्रदेश कांग्रेस में भूचाल आ गया है. उनके समर्थन में कई कांग्रेसी कॉर्पोरेटर और नेताओं ने भी इस्तीफा दे दिया है. बता दें कि सोमवार को प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व से नााखुशी जाहिर करते हुए इंद्रनील राजगुरु ने राजकोट कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था.

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सोमवार को कांग्रेस नेता राजगुरु ने कहा था, 'मैंने अपना इस्तीफा पार्टी के प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अमित चावड़ा को भेज दिया है. पार्टी की प्रदेश इकाई जिस तरह से काम कर रही है, उससे मैं नाखुश हूं और इसी वजह से इस्तीफा दे रहा हूं.'

इस बार गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 79 सीटों पर जीत दर्ज की. पिछले 15 साल में कांग्रेस ने पहली बार इतनी ज्यादा सीटें जीती और सूबे में मजबूत विपक्ष के रूप में सामने आई. लेकिन अब अंदरूनी कलह और गुटबाजी के चलते कांग्रेस सौराष्ट्र में टूटने की कगार पर पहुंच गई है.

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को कड़ी चुनौती देने वाले इंद्रनील राजगुरु के इस्तीफे के बाद मंगलवार को उनके समर्थन में राजकोट के 17 कॉर्पोरेटर ने भी अपना इस्तीफा पार्टी नेतृत्व को भेज दिया है.

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दरअसल, गुजरात कांग्रेस में जिस तरह से युवाओं के हाथों में के जरिए कमान सौंपी जा रही है, उससे ज्यादातर सीनियर नेता नाराज हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जरिए शहर के 12 अध्यक्षों के नाम घोषित किए गए. हितेश वोरा को राजकोट शहर का अध्यक्ष बनाया गया, जिससे नाराज इंद्रनील राजगुरु ने इस्तीफा दिया. इसके अलावा राजकोट के सीनियर नेता और विधायक कुंवरजी बावलिया और विक्रम माडम भी नाराज चल रहे हैं.

वहीं, मामले में कांग्रेस के अध्यक्ष अमित चावड़ा का कहना है कि मंगलवार सुबह उनकी इंद्रनील राजगुरु से बात हुई है. उधर, सौराष्ट्र में कांग्रेस के नेताओं के इस्तीफा देने से सूबे की सत्तारूढ़ बीजेपी को सबसे ज्यादा फायदा होता दिख रहा है. सौराष्ट्र में पाटीदारों का विरोध झेल रही है बीजेपी को नई ऊर्जा मिलेगी. पाटीदारों की नाराजगी के चलते सौराष्ट्र में जहां कांग्रेस मजबूत हई थी, वहीं इस बवाल के बाद इसका सीधा फायदा लोकसभा चुनाव में बीजेपी को होगा.

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