गुजरात: 13 साल बाद कच्छ के चरवाहे की हुई घर वापसी, पाकिस्तान से लौटने पर सुनाई आपबीती

लगभग एक दशक तक परिवार को इस्माइल समा के बारे में कोई खबर नहीं थी कि वो अचानक कहां गायब हो गया. परिवार के लोग उसे सालों तक भारत में ही तलाशते रहे. अक्टूबर 2017 में पास के एक गांव के मूल निवासी रफीक जाट पाकिस्तान से रिहा होने के बाद घर लौटे थे. उन्होंने बताया कि वह और इस्माइल कराची की जेल में एक साथ बंद थे.

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गुजरात का शख्स पाकिस्तान जेल से लौटा वापस (फोटो- आजतक) गुजरात का शख्स पाकिस्तान जेल से लौटा वापस (फोटो- आजतक)

गोपी घांघर

  • अहमदाबाद,
  • 30 जनवरी 2021,
  • अपडेटेड 3:15 PM IST
  • 13 साल बाद घर वापस लौटा चरवाहा
  • मवेशी लेकर गलती से चला गया था सीमा पार
  • पाकिस्तान की जेल में बंद था शख्स

गुजरात के कच्छ जिले का एक चरवाहा साल 2008 में अनजाने में कच्छ बॉर्डर पार कर पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हो गया था. जिसके बाद पाकिस्तान ने उस चरवाहे को जासूस बताते हुए गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन लंबे समय तक पड़ोसी देश की जेलों में बंद रहने के बाद आखिरकार वो शख्स भारत लौट आया है.

गुजरात से सटी पाकिस्तान सीमा से करीब 60 किलोमीटर दूर कच्छ के नाना दिनारा गांव के 60 वर्षीय इस्माइल समा, 2008 में अपने घर से गाय चराने बाहर निकले थे और गलती से पाकिस्तान में प्रवेश कर गए. इसके बाद जासूसी के आरोप में उसे पाकिस्तान की जेलों में बंद कर दिया गया था.  

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लगभग एक दशक तक परिवार को इस्माइल समा के बारे में कोई खबर नहीं थी कि वो अचानक कहां गायब हो गया. परिवार के लोग उसे सालों तक भारत में ही तलाशते रहे. अक्टूबर 2017 में पास के एक गांव के मूल निवासी रफीक जाट पाकिस्तान से रिहा होने के बाद घर लौटे थे. उन्होंने बताया कि वह और इस्माइल कराची की जेल में एक साथ बंद थे. इसके बाद घर वालों को मालूम चला कि इस्माइल भारत में नहीं, पाकिस्तान में है.

जासूसी के आरोप में इस्माइल को अक्टूबर 2011 में पाकिस्तान की एक अदालत ने पांच साल जेल की सजा सुनाई थी. इसके बाद उन्हें हैदराबाद पाकिस्तान सेंट्रल जेल में कैद किया गया था. अक्टूबर 2016 में उनकी सजा पूरी हो गई. लेकिन वो चार साल से अधिक समय तक पाकिस्तान के एक डिटेंशन सेंटर में रहे. क्योंकि भारतीय अधिकारियों को उनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि करने में समय लगा और लगभग बारह साल बाद इस्माइल समा की घर वापसी हुई है.  

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भारतीय उच्चायोग द्वारा दायर एक याचिका पर इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के दो दिन बाद 26 जनवरी 2021 को उन्हें भारत सरकार के हवाले किया गया. इस्माइल समा ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि मैं मवेशियों को चराने के दौरान गलती से पाकिस्तान की तरफ चला गया था. लेकिन उन्होंने मुझे एक जासूस समझकर जेल में बंद कर दिया. आईएसआई ने मुझे छह महीने तक जेल में रखा, फिर मुझे पाकिस्तान की सेना को सौंप दिया. पांच साल जेल की सजा सुनाए जाने से पहले मैं तीन साल तक उनकी हिरासत में था.

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समा ने कहा कि अक्टूबर 2016 में मेरी सजा पूरी होने के बाद भी मुझे रिहा नहीं किया गया था. मैं 2018 तक हैदराबाद सेंट्रल जेल में रहा. सात साल की सजा काटी. इसके बाद मुझे दो अन्य भारतीयों के साथ कराची सेंट्रल जेल भेज दिया गया. इस बीच मेरे साथ पाकिस्तान सुरक्षा एजेंसियों ने बहुत सख्ती दिखाई और बुरी तरीके से मारा पीटा. 

13 साल बाद इस्माइल की घर वापसी से परिवार में खुशी का माहौल है. इस्माइल अपने घर लौट रहे हैं. इस्माइल का कहना है कि उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि उनकी रिहाई होगी और वो कभी भारत वापस लौट पाएंगे.

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