अहमदाबाद में नकली ब्लड प्लाज्मा रैकेट का पर्दाफाश, 4 गिरफ्तार 

गुजरात के अहमदाबाद में फार्मा और मेडिकल जगत को हिलाकर रख देने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है. चांगोदर की एक लैब में कैंसर की दवाओं और मरीजों के इलाज में काम आने वाले असली ब्लड प्लाज्मा को चुराकर उसकी जगह नमक का पानी (सलाइन वॉटर) भरकर बाजार में बेचने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है.

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फेक ब्लड प्लाज्मा रैकेट का खुलासा. (सांकेतिक फोटो) फेक ब्लड प्लाज्मा रैकेट का खुलासा. (सांकेतिक फोटो)

ब्रिजेश दोशी

  • अहमदाबाद,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:42 AM IST

अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस की SOG टीम ने चांगोदर इलाके में चल रहे नकली ब्लड प्लाज्मा रैकेट का भंडाफोड़ कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपी असली प्लाज्मा निकालकर उसकी जगह सलाइन वॉटर (नमक का पानी) भर देते थे और नकली प्लाज्मा को आधी कीमत पर अस्पतालों और मरीजों को बेचते थे. पुलिस ने आरोपियों के पास से 1150 यूनिट असली प्लाज्मा समेत कुल 15 लाख रुपये का माल बरामद किया है. इस पूरे गिरोह की धरपकड़ के बाद अब पुलिस इस बात की गहन जांच कर रही है कि आरोपियों ने अब तक किन-किन अस्पतालों में इसकी सप्लाई की है और क्या इस नकली प्लाज्मा को चढ़ाने से किसी मरीज की तबीयत बिगड़ी है.

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अहमदाबाद ग्रामीण एसपी ओमप्रकाश जाट ने इस रैकेट के काम करने के तौर-तरीकों का खुलासा करते हुए बताया कि चांगोदर में एक लैब में खून से असली प्लाज्मा निकालकर, उसकी जगह सलाइन वॉटर भरकर आधी कीमत पर बेचने वाले गिरोह के चार सदस्यों- मुख्य आरोपी दिनेश चौधरी, लैब के मालिक मोहन गायकवाड़, सप्लायर ड्राइवर रफीक और जितेंद्र सोलंकी को गिरफ्तार किया है.

पुलिस ने बताया कि जब भी किसी लैब या ब्लड बैंक से मरीज के लिए प्लाज्मा भेजा जाता था तो आरोपी रास्ते में ही संबंधित व्यक्ति को अपने झांसे में ले लेते थे. वो उनसे असली प्लाज्मा हासिल कर लेते थे और उसकी जगह पर सलाइन वॉटर से भरा नकली प्लाज्मा थमा देते थे. चांगोदर की लैब में जो असली प्लाज्मा निकाला जाता था, उसे आरोपी बाजार में बेहद कम और आधी कीमत पर दूसरे खरीदारों को बेच दिया करते थे.

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आधे रेट पर बेचते थे प्लाज्मा

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी मिलकर पिछले छह महीनों से नकली प्लाज्मा का ये खतरनाक रैकेट धड़ल्ले से चला रहे थे. बाजार में असली प्लाज्मा की कीमत आमतौर पर 2,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये प्रति यूनिट तक होती है. आरोपी इस असली प्लाज्मा को चुरा लेते थे और उसकी जगह नमक का पानी पैक करके उसे अवैध रूप से 1,000 रुपये से लेकर 3,000 रुपये के बीच बेचकर मोटी कमाई कर रहे थे.

ब्लड बैंक और डिलीवरी नेटवर्क से जुड़े थे तार 

इस रैकेट का नेटवर्क ब्लड बैंक की डिलीवरी चेन से सीधे जुड़ा हुआ था. ब्लड बैंक से असली प्लाज्मा लेकर निकलने वाले ड्राइवर रफीक और उसके साथी जितेंद्र सोलंकी से मुख्य आरोपी दिनेश चौधरी लगातार संपर्क में रहता था. दिनेश अपनी जरूरत के हिसाब से उनसे अलग-अलग ब्लड ग्रुप का असली प्लाज्मा मंगवाता था. इसके बाद चांगोदर की लैब में ले जाकर इस असली प्लाज्मा को निकालने और उसकी जगह नकली घोल पैक करने का खेल खेला जाता था.

पकड़े गए चार आरोपियों में से चांगोदर की लैब का मालिक मोहन गायकवाड़ लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा धारक है. वह पहले से ही ब्लड बैंक के काम से जुड़ा हुआ था और उसने अपने इसी तकनीकी अनुभव का इस्तेमाल इस घिनौने अपराध को अंजाम देने के लिए किया.
वहीं, मुख्य आरोपी दिनेश चौधरी का कोई मेडिकल बैकग्राउंड नहीं है. उसने सिर्फ बीकॉम किया है और वह एक सेल्स एग्जीक्यूटिव के तौर पर ब्लड बैंक के साथ तालमेल बिठाने (लायज़निंग) का काम करता था, जबकि बाकी दो आरोपी डिलीवरी का काम संभालते थे.

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क्या होता है प्लाज्मा

ब्लड प्लाज्मा मानव खून का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. ये असल में हमारे खून का ही हल्के पीले रंग का एक तरल पदार्थ होता है, जो पूरे शरीर के कुल खून का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है. इस प्राकृतिक प्लाज्मा के अंदर 92 प्रतिशत हिस्सा पानी का होता है, जबकि शेष 8 प्रतिशत भाग में प्रोटीन, ग्लूकोज और मिनरल्स जैसे शरीर के लिए बेहद जरूरी तत्व मौजूद होते हैं.  इंसानी शरीर के अंदर ये मुख्य रूप से लिवर में प्राकृतिक रूप से बनता है और इसे जरूरत पड़ने पर लैब में खून से अलग किया जाता है.

बता दें कि प्लाज्मा का इस्तेमाल न केवल गंभीर मरीजों के इलाज और उन्हें चढ़ाने में होता है, बल्कि एंटी-कैंसर (कैंसर रोधी) दवाएं बनाने में भी इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है. मेडिकल मानकों के अनुसार, एक बार शरीर से निकाले जाने के बाद प्लाज्मा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उसे -18 डिग्री तापमान पर स्टोर करना बेहद जरूरी होता है. इसके उलट, आरोपी इसे बेहद लापरवाही से बिना किसी सावधानी के साधारण आइस बॉक्स में रख रहे थे, जिससे असली प्लाज्मा के भी पूरी तरह खराब हो जाने की संभावना थी.

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