पूरे देश में तानाशाही का माहौल: संजय सिंह

बिहार के भीतर हालिया दौर की राजनीतिक उथल-पुथल पर आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने बयान दिया है कि देश में किसी भी पार्टी को दिया गया वोट बीजेपी को जाएगा. सरकार बीजेपी की ही बनेगी. वे बीजेपी स्टाइल ऑफ पॉलिटिक्स को आपातकाल की पुनरावृत्ति और तानाशाही बता रहे हैं. वे इस पूरे घटनाक्रम को 3 महीने की प्लानिंग बताते हैं जिसे पूरे देश ने 15 घंटे के भीतर देखा.

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संजय सिंह संजय सिंह

आशुतोष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 27 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 5:03 PM IST

बिहार के भीतर हालिया दौर की राजनीतिक उथल-पुथल पर आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने बयान दिया है कि देश में किसी भी पार्टी को दिया गया वोट बीजेपी को जाएगा. सरकार बीजेपी की ही बनेगी. वे बिहार में नीतीश कुमार को समर्थन दिए जाने को देश की राजनीति के लिए खतरनाक संकेत करार देते हैं.

महागठबंधन का जनादेश नफरत की राजनीति के खिलाफ

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वे कहते हैं कि महागठबंधन को बीजेपी की नफरत भरी राजनीति के खिलाफ जनादेश मिला था. अब नीतीश कुमार इसके खिलाफ जा रहे हैं. उन्हें जनता का फैसला जानने के लिए में जाना चाहिए. हालिया दौर में देश के भीतर चलने वाली चीजें आने वाले दिनों में लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बन जाएंगीं.

वे आगे कहते हैं कि चुनाव में समझौता करना हुआ तो सजा काट चुके लालू यादव नीतीश के लिए अच्छे हो गए. वे आगे सवाल खड़ा करते हैं कि जो पार्टी गाय के नाम पर इंसानों की हत्या कर रही है. देश भर में सांप्रदायिकता फैला रही है. आप उसके साथ तो नहीं खड़े?

वे बीजेपी स्टाइल ऑफ पॉलिटिक्स को आपातकाल की पुनरावृत्ति और तानाशाही बता रहे हैं. वे इस पूरे घटनाक्रम को 3 महीने की प्लानिंग बताते हैं जिसे पूरे देश ने 15 घंटे के भीतर देखा.

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संजय सिंह कहते हैं कि बीजेपी ने उत्तराखंड, अरुणाचल, गोवा और मणिपुर में ऐसा ही किया. वे दिल्ली में ऐसा क्यों नहीं कर सकते? वे आगे कहते हैं कि उनकी पार्टी इस खतरे के प्रति पूरी तरह जागरुक है. वे नीतीश कुमार के इस कदम को विपक्षी दलों की राजनीति पर एक गहरा धक्का बताते हैं.

वे आगे कहते हैं कि देश के अंदर के खिलाफ विपक्षी पार्टियां लामबंद हो रही थीं. BJP के के नफरत की राजनीति के खिलाफ लोग एकजुट हो रहे थे. उसे नीतीश कुमार के दोहरे चरित्र की वजह से खासा धक्का लगा है.

वे आगे कहते हैं कि कल बिहार विधानसभा के भीतर नीतीश कुमार के पक्ष में वोट देना क्या उनके डीएनए पर प्रश्नचिन्ह नहीं है? वे इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत करार देते हैं. वे चिंता जता रहे हैं कि दिल्ली में भी इसकी शुरुआत हो सकती है.

वे कह रहे हैं कि लगातार उनके विधायकों पर मुकदमे होते हैं. वे सवाल पूछते हैं कि सिसोदिया और सत्येंद्र जैन पर छापे के क्या मायने हैं? वे इसे देश को तानाशाही की ओर ले जाने वाला कदम कह रहे हैं.

 

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