Ground Report: ओल्ड राजेंद्र नगर में अब क्या बदला? बेसमेंट लाइब्रेरी में डूबने से हुई थी तीन छात्रों की मौत

आजतक की टीम ओआरएन में 'रेवोल्यूशन लाइब्रेरी' नाम की एक लाइब्रेरी के अंदर गई. यह लाइब्रेरी पहली मंजिल पर थी, लेकिन वहां आने-जाने का केवल एक ही रास्ता था. इतना ही नहीं, बाहर निकलने के रास्ते पर बिजली के तार ढीले लटके हुए थे.

Advertisement
आजतक की टीम ओल्ड राजेंद्र नगर गई ताकि यह पता चल सके कि पिछले दो सालों में क्या बदलाव आया है. (Photo: ITG) आजतक की टीम ओल्ड राजेंद्र नगर गई ताकि यह पता चल सके कि पिछले दो सालों में क्या बदलाव आया है. (Photo: ITG)

अंशुल सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 13 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:20 PM IST

ओल्ड राजेंद्र नगर के राउस इंस्टीट्यूट के बेसमेंट में 27 जुलाई 2024 को पानी भर जाता है जहां एक लाइब्रेरी चल रही थी, उस लाइब्रेरी में पानी भरने की वजह से तीन बच्चों की मौत हो जाती है. इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी.

जांच के दौरान, सीबीआई ने तीन जूनियर अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की क्योंकि उन्होंने अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाई थी. वहीं, सीनियर अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी गई क्योंकि उनका कहना था कि उन्हें पता नहीं था कि RAU की IAS एकेडमी के बेसमेंट में गैर-कानूनी लाइब्रेरी चल रही थी. 'आजतक' की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची ताकि सीनियर अधिकारियों को असलियत का पता चल सके.

Advertisement

 

आजतक की टीम ओआरएन (ओल्ड राजेंद्र नगर) वापस गई ताकि यह पता चल सके कि पिछले दो सालों में क्या बदलाव आया है.

बेसमेंट में चल रही लाइब्रेरी पूरी तरह से बंद कर दी गई थीं. हमारी विजिट के दौरान हमें बेसमेंट में कोई लाइब्रेरी चालू हालत में नहीं मिली, लेकिन जिम और दुकानों जैसी कमर्शियल गतिविधियां वहां चल रही थीं. एमसीडी के बिल्डिंग नियमों के मुताबिक, किसी बिल्डिंग के बेसमेंट से कमर्शियल गतिविधियां चलाना गैर-कानूनी है. फिर भी, ये कमर्शियल गतिविधियां खुलेआम चल रही थीं.

अब हमने यह पता लगाने की कोशिश की कि जिन लाइब्रेरी को बंद करने के लिए कहा गया था, उनका क्या हुआ. ये लाइब्रेरी अब बिल्डिंग की पहली और दूसरी मंजिल पर शिफ्ट हो गई हैं, लेकिन वहां भी एमसीडी और डीएफएस के नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है.

Advertisement

हम ओआरएन में 'रेवोल्यूशन लाइब्रेरी' नाम की एक लाइब्रेरी के अंदर गए. यह लाइब्रेरी पहली मंजिल पर थी. लेकिन वहां आने-जाने का केवल एक ही रास्ता था, जिसकी चौड़ाई डेढ़ फीट से ज्यादा नहीं थी. 

इतना ही नहीं, बाहर निकलने के रास्ते पर बिजली के तार ढीले लटके हुए थे. जब हम पहली मंजिल पर पहुंचे, तो हमने देखा कि कई छात्र कंप्यूटर सिस्टम पर पढ़ाई कर रहे थे और कई एयर कंडीशनर भी चल रहे थे. इसका मतलब है कि बिजली की भारी खपत हो रही थी, जिससे सही रखरखाव न होने पर शॉर्ट सर्किट और स्पार्किंग हो सकती थी.

लाइब्रेरी का मैनेजमेंट संभालने वाले एक व्यक्ति ने हमें रोकने की कोशिश की. हमने बस एक सीधा सा सवाल पूछा कि क्या उनके पास फायर डिपार्टमेंट और एमसीडी से एनओसी है?  शुरू में उसने दावा किया कि उसके पास जरूरी परमिशन हैं. जब हमने उससे पूछा कि अगर नियमों का पालन नहीं किया गया है तो उसे परमिशन कैसे मिली? यह सुनकर वह जाने लगा, लेकिन फिर उसने कहा कि उन्होंने परमिशन के लिए अप्लाई किया है. इसका मतलब है कि लाइब्रेरी किसी भी विभाग से बिना किसी परमिशन या एनओसी के चलाई जा रही थी, जिसे कैमरे पर माना भी गया.

Advertisement

जब हम दोबारा लाइब्रेरी में घुसे, तो सीढ़ियों पर ही एक व्यक्ति ने हमें रोक दिया. शुरू में उसने हमारा कैमरा बंद करने की कोशिश की, लेकिन जब हमने उससे अपनी पहचान बताने को कहा, तो उसने कहा कि उसका लाइब्रेरी से कोई लेना-देना नहीं है. टीम को लाइब्रेरी पहुंचते देख अंदर से गेट जल्दी से बंद कर दिया गया, जिससे हम उस अवैध लाइब्रेरी को दिखा नहीं पाए.

आजतक की टीम ने 23 जून को लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आग लगने की घटना के बाद ऐसी ही स्थिति का खुलासा किया था. दिल्ली के सीएम ने तब कहा था कि ऐसे कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है और ये सभी अवैध लाइब्रेरी बेरोकटोक चल रही हैं.

सवाल यह है कि अगर प्रशासन की लापरवाही और लाइब्रेरी मालिकों के लालच के कारण छात्र अपनी जान गंवाते हैं, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा?

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »