जेटली का कांग्रेस से सवाल: क्या इंदिरा-राजीव वहां जाते जहां भारत के टुकड़े जैसे नारे लगते?

कांग्रेस को याद दिलाते हुए जेटली ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जो लोग और पार्टी पंडित जी की राजनीतिक विरासत संभालने का दावा करते हैं, यदि उनमें पढ़ने की जरा सा भी ललक है, तो वे निश्चित रूप से वाजपेयी का श्रद्धांजलि भाषण पढ़ेंगे.

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पन्ना लाल

  • नई दिल्ली,
  • 27 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 8:03 PM IST

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस से पूछा है कि क्या इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ऐसे कार्यक्रम में जाते जहां 'भारत के टुकड़े-टुकड़े' जैसे नारे लगाये जाते? इस सवाल का खुद जवाब देते हुए जेटली ने कहा कि हरगिज नहीं.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक अरुण जेटली ने कहा कि मूल्यों के पतन, निजी हित और महात्वाकांक्षा की वजह से कांग्रेस पार्टी अब ऐसा करने को मजबूर हो गई है. वित्त मंत्री जेटली इंडिया आइडिया कॉन्क्लेव नाम के कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे.

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वित्त मंत्री ने कहा, "क्या मिसेज इंदिरा गांधी और राजीव गांधी कभी भी ऐसे जमावड़े में जाते जहां भारत के टुकड़े टुकड़े जैसे नारे लगाये जाते, निश्चित रूप से नहीं."

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि वे ऐसे शख्स थे जिनकी विचारधारा नेहरू से अलग थी फिर भी वाजपेयी उनका बेहद आदर करते थे. जेटली ने कहा, "मेरे ख्याल से वाजपेयी जी का एकमात्र सबसे अच्छा भाषण वो है जो उन्होंने मई 1964 में संसद में दिया था, तब वाजपेयी जनसंघ के 38 साल के सांसद थे, वे नेहरू को श्रद्धांजलि देने के लिए खड़े हुए थे, मेरे विचार से आजाद भारत में इस तरह का श्रेष्ठ भाषण पहले नहीं सुना गया था."

कांग्रेस को याद दिलाते हुए जेटली ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जो पंडित जी की राजनीतिक विरासत संभालने का दावा करते हैं, यदि उनमें पढ़ने की जरा सा भी ललक है, तो वे निश्चित रूप से वाजपेयी का श्रद्धांजलि भाषण पढ़ेंगे.

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आतंक के खिलाफ जंग में सरकार के साथ आएं कश्मीरी

कार्यक्रम में वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि कश्मीर के लोगों को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए, अलगाववादियों के साथ नहीं. जेटली ने कहा, "मेरा मानना है कि यह हम सब के लिए अत्यंत आवश्यक है...कि इस लड़ाई में हमें कश्मीरी लोग अपनी ओर चाहिए। यह लड़ाई संप्रभुता के लिए, यह लड़ाई अलगाववादियों और आतंकवादियों के खिलाफ है और हल भी लोगों के पास है."

उन्होंने इसको लेकर खेद जताया कि ऐसे समय जब देश सीमापार से पैदा की जा रही समस्याओं से निपट रहा है, कुछ स्थानीय समूह उनके साथ हो गए हैं और सबसे अधिक प्रभावित कश्मीरी लोग स्वयं हो रहे हैं. उन्होंने कहा, "हम स्थिति को कैसे सुलझायें? सरकारों ने कहा है कि हम सबसे तार्किक विकल्प के लिए तैयार हैं, हम लोगों से बातचीत करने को तैयार हैं, हम क्षेत्रीय मुख्य धारा की पार्टियों से संवाद करने और उन्हें उसमें शामिल करने को भी तैयार हैं."

जेटली ने कहा कि मुख्यधारा की क्षेत्रीय पार्टियां जो श्रीनगर में एक भाषा और दिल्ली में दूसरी भाषा बोलती हैं, उन्हें स्थिति से सामना करने का साहस होना चाहिए. उन्होंने कहा कि उन्हें अलगाववादियों के लिए एक वैकल्पिक संवाद की रूपरेखा बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा, "दुर्भाग्य से वे उस जिम्मेदारी से दूर रहते हैं. इसलिए यह एक ऐसी लड़ाई है जिसमें भारत को जीतना है और मेरे दिमाग में इसको लेकर कोई संदेह नहीं कि हम अंत में इसमें सफल होंगे क्योंकि भारत की राजनीति से एक स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि अलगाववादी भारत और उसकी मुख्यधारा द्वारा कभी स्वीकार नहीं किये जाएंगे."

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बता दें 2016 में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी पार्टी के दूसरे नेताओं के साथ जेएनयू छात्रों की एक मीटिंग में आए थे. देशद्रोह के आरोप में तत्कालीन JNUSU अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी के बाद उन्हें तत्काल रिहा करने की मांग को लेकर ये मीटिंग जेएनयू के छात्रों और शिक्षकों ने ये की थी.

कन्हैया कुमार पर संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की बरसी में जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाने का आरोप लगा था.

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