दिल्ली में ‘आपदा’ या ‘AAP’ की लापरवाही? पर्यावरण मंत्री सिरसा ने आम आदमी पार्टी पर साधा निशाना

दिल्ली में धूलभरी चादर छाने के बाद राजधानी का राजनीतिक माहौल भी गरमा गया. जहां आम आदमी पार्टी (AAP) ने बीजेपी की रेखा सरकार को दोषी ठहराया तो वहीं हाल ही में नियुक्त किए गए दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सीधे AAP की पिछले सरकार को जिम्मेदार ठहरा दिया.

Advertisement
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मजिंदर सिंह सिरसा (फाइल फोटो) दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मजिंदर सिंह सिरसा (फाइल फोटो)

ऐश्वर्या पालीवाल

  • नई दिल्ली,
  • 15 मई 2025,
  • अपडेटेड 8:08 PM IST

जैसे ही अचानक आई धूलभरी आंधी ने दिल्ली की हवा को ‘गंभीर’ श्रेणी में धकेल दिया, राजधानी का राजनीतिक माहौल भी गरमा गया. जहां आम आदमी पार्टी (AAP) ने बीजेपी की रेखा सरकार को दोषी ठहराया तो वहीं हाल ही में नियुक्त किए गए दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सीधे AAP की पिछले सरकार को जिम्मेदार ठहरा दिया.

Advertisement

मंत्री सिरसा ने एक तीखे ट्वीट में लिखा, “पहले आप दिल्ली के लिए AAP-DA बने, अब आप AAPDA में अवसर तलाश रहे हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक पूर्व सीएम राजनीतिक लाभ के लिए प्राकृतिक रेत के तूफ़ान का इस्तेमाल कर रहे हैं. खासकर तब जब असली दोष AAP के शासन में एक दशक की उपेक्षा का है."

उन्होंने आगे कहा कि भले ही आज की वायु गुणवत्ता आपदा मौसम की देन हो सकती है, लेकिन इसकी जड़ें AAP की “कचरा-और-धूल वाली सरकार” में हैं. उन्होंने लिखा, “दिल्ली को कूड़े का मैदान बना दिया गया है. सड़कें टूटी पड़ी हैं और धूल से अटी हैं. प्रदूषण को लेकर कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई. और हर बार जब प्रकृति प्रतिक्रिया देती है, AAP मौसम के पीछे छिप जाती है.” 

भाजपा उठाएगी सफाई की जिम्मेदारी

Advertisement

मंत्री सिरसा ने यह भी घोषणा की कि अब भाजपा की सरकार “AAP के 10 साल के गंदगी राज” की सफाई की जिम्मेदारी उठाएगी. उन्होंने कहा, “हम एक-एक ईंट, एक-एक सांस से 10 साल की गंदगी साफ करेंगे.” 

AAP की तरफ से फिलहाल मंत्री सिरसा के तीखे आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालांकि पार्टी का अब तक यही रुख रहा है कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता में गिरावट जलवायु परिवर्तन और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के कारण हो रही है.

जैसे-जैसे दिल्ली का आसमान धुएं और धुंध से ढकता जा रहा है, राजधानी की राजनीति में भी धुंधलापन बढ़ता जा रहा है. एक बार फिर प्रदूषण का मुद्दा राजनीतिक वैचारिक युद्ध का केंद्र बन गया है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »