क्या है 'ओ' जोन विवाद? जिससे दिल्ली की 94 कॉलोनियों के 15 लाख घरों पर बुलडोजर एक्शन का खतरा

दिल्ली के यमुना नदी के फ्लड जोन में स्थित 94 कॉलोनियों में लगभग 15 लाख घरों पर डिमोलिशन का खतरा मंडरा रहा है. दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने अवैध निर्माणों के खिलाफ अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

Advertisement
राजधानी दिल्ली के यमुना बाजार कॉलोनी में DDMA की ओर से नोटिस भेजा गया है राजधानी दिल्ली के यमुना बाजार कॉलोनी में DDMA की ओर से नोटिस भेजा गया है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:08 PM IST

राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में अवैध निर्माण पर बुलडोजर एक्शन से हड़कंप मचा हुआ है. जिन इलाकों में ये एक्शन लिया जा रहा है, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) इन इलाकों को 'O' जोन (ओ-जोन) में बता रहा है.  इसका साफ मतलब ये है कि ये कॉलोनिया यमुना के खादर यानी फ्लड जोन (डूब बाढ़ क्षेत्र) में बसी हुई हैं और अवैध हैं. दिल्ली हाई कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की लगातार फटकार के बाद अब प्रशासन यमुना के फ्लडप्लेन को पूरी तरह से खाली कराने की तैयारी कर रहा है.

Advertisement

दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के तहत यमुना नदी के फ्लडप्लेन या बाढ़ क्षेत्र को ‘ओ-जोन’ का नाम दिया गया है. यह इलाका इतने फैलाव वाला है कि इसमें 94 कॉलोनियां आती हैं और इन कॉलोनियों में बने तकरीबन 15 लाख घरों पर डिमोलेशन यानी ध्वस्त किए जाने का खतरा मंडरा रहा है. 

किन-किन कॉलोनियों में कार्रवाई का खतरा

करीब 20 से 22 किलोमीटर के लंबे एरिया में फैले इस इलाके में वजीराबाद से लेकर ओखला तक की कॉलोनियां आती हैं. यही वजह है कि झड़ौदा, संगम विहार, वजीराबाद, जगतपुर, नूर कॉलोनी, दीपांशु कॉलोनी से मिलन विहार तक में कई जगहों पर 'ओ' जोन एरिया के बोर्ड लगे हुए हैं. जहां-जहां ये बोर्ड लग रहे हैं वहां के लोगों में डर का माहौल है. 

कैटेगरी के अनुसार दो हिस्सों में बंटा 'ओ'-जोन

ये इलाके को खास तौर पर दो हिस्सों– ग्रीन और रेड जोन में बांटे गए हैं. इस जोन का एकमात्र उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, पर्यावरण और बायो डाइवर्सिटी का संरक्षण और यमुना को प्रदूषण से मुक्त रखना है. इस मास्टर प्लान के नियमों के अनुसार, इस पूरे इलाके में किसी भी तरह का निर्माण, कॉलोनियां बसाना या रिहायशी गतिविधियां पूरी तरह से गैरकानूनी और बैन हैं.

Advertisement
यमुना बाजार इलाके में मिला नोटिस दिखाते स्थानीय निवासी

30 अप्रैल को DDA ने भेजा था सार्वजनिक नोटिस

30 अप्रैल को DDA ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए सार्वजनिक नोटिस जारी किया था. इसमें कहा गया कि ओ-ज़ोन एरिया से सभी अतिक्रमण हटाए जाएंगे. नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया कि पीएम-उदय योजना के तहत आने वाली कॉलोनियों को छोड़कर अन्य सभी अनधिकृत आवासीय और व्यावसायिक निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.लोगों से कहा गया कि वे खुद जगह खाली कर दें नहीं तो डिमोलिशन किया जाएगा. 

हालांकि DDA की ओर से जारी नोटिस में प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास व अस्थायी आश्रय का जिक्र किया गया था. इसमें बटला हाउस और सराय काले खां के पास स्थित रैन बसेरों का जिक्र किया गया था.

5 मई को DDMA की ओर से यमुना बाजार के निवासियों को मिला नोटिस

दूसरी ओर, 5 मई को DDMA (दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी) ने यमुना बाजार क्षेत्र में रहने वाले करीब 310 परिवारों को नोटिस जारी किया. इसमें कहा गया कि यह इलाका हर वर्ष मानसून के दौरान जलमग्न हो जाता है, जिससे लोगों, पशुओं और संपत्तियों को खतरा पैदा होता है. प्रशासन का कहना है कि हर साल बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्यों में सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है, इसलिए बाढ़ क्षेत्र में लगातार निवास करना संभावित आपदा जोखिम को बढ़ाता है. लेकिन DDMA के नोटिस में न तो किसी अस्थायी आश्रय का जिक्र है और न ही पुनर्वास योजना का. यही वजह है कि स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है.

Advertisement

.यमुना किनारे घाटों पर बढ़ता जा रहा है अतिक्रमण

वहीं सरकार के अनुसार, समय के साथ यमुना किनारे स्थित घाटों और आसपास के इलाकों में अतिक्रमण बढ़ता गया है. सरकार ने बताया कि National Green Tribunal (एनजीटी) पहले ही डीडीए को यमुना के बाढ़क्षेत्र में हुए अतिक्रमणों के खिलाफ जरूरी एक्शन लेने का निर्देश दे चुका है. इसी के तहत डीडीए ने पिछले कुछ वर्षों में ओ-ज़ोन क्षेत्र में कई अभियान चला चुका है. 

डिमोलिशन का नोटिस मिलने के बाद से यमुना बाजार के निवासियों में चिंता बढ़ गई है

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यमुना बाजार क्षेत्र में कुल 32 घाट हैं, जहां लगभग 1,100 लोग निवास करते हैं और करीब 310 आवासीय ढांचे मौजूद हैं. सरकार का कहना है कि यह पूरा इलाका बाढ़ के लिहाज से बेहद संवेदनशील है. लगभग हर वर्ष यमुना में आने वाली बाढ़ के दौरान यह क्षेत्र जलमग्न हो जाता है. खास तौर से 2023 और 2025 की बाढ़ के दौरान यहां गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई थी, जिससे लोगों की जान, पशुधन और संपत्ति को बड़ा खतरा पैदा हुआ.

बार-बार आने वाली बाढ़ से बचाव के लिए जरूरी है कार्रवाई- सरकार का तर्क

सरकार ने कहा कि बार-बार आने वाली बाढ़ के कारण प्रशासन को बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाने पड़ते हैं, जिनमें भारी संख्या में कर्मचारियों, संसाधनों और सरकारी धन का उपयोग होता है. ऐसी परिस्थितियों में राजस्व विभाग को अस्थायी रूप से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और पुनर्वास की व्यवस्था करनी पड़ती है, जिससे सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. दिल्ली सरकार का कहना है कि यमुना के बाढ़क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त रखना पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है. इसलिए नियमों के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »